ये सेक्स स्टोरी है मेरी एक रिश्ते में लगने वाली मौसी और मेरे सेक्स की। अब मैं कुछ अपने बारे में बता रहा हूँ। मेरा नाम जे है, उम्र 28 साल, ऊंचाई 5.8 फीट, रंग गोरा, और लंड का साइज 5.5 इंच है। जिस मौसी के साथ सेक्स किया, उनका नाम प्रतिभा है, उनकी उम्र 34 साल, रंग सांवला, पर शारीरिक बनावत 36-30-36 है।
अब मैं कहानी पर आता हूँ। ये बात आज से कुछ महीने पहले जनवरी की है, जब मेरी माँ कुछ काम से मेरी दीदी के यहाँ जबलपुर कुछ दिनों के लिए गई थी। तब मैं अपने घर में अकेला था, तो माँ ने प्रतिभा मौसी को मेरा ध्यान रखने को बोला हुआ था।
मैं उनके घर खाना खाने जाता रहता था। वो यहीं मेरे शहर के रेलवे स्टेशन के पास किराए पर रहती थी। उनके परिवार में उनके पति, एक बेटा, और वो खुद है। बाकी का परिवार उनका गांव में रहता है।
मौसा जी एक कीट-नाशक कंपनी में काम करते हैं, तो कभी-कभी शहर से बाहर जाना पड़ता है। और उनका बेटा अस्तित्व 9वीं कक्षा में है। जिस घर में वह किराए से रहता है, वहां पर एक कमरा, छोटा सा हॉल, और किचन है। टॉयलेट हॉल से हो कर जाना पड़ता है।
ये तो थी मेरी मौसी की फैमिली की जानकारी। अब कहानी पर आते हैं. जैसे कि मैंने आपको बताया कि माँ ने मौसी को बोला था मेरा ध्यान रखने का। तो मैं उनके घर लंच करने गया था। तब मौसा जी भी लंच करने घर आये थे। उनका बेटा तो अभी स्कूल में ही था।
मैं जैसा ही घर के अंदर गया, तो मैंने देखा कि मौसा जी कुछ पैकिंग कर रहे थे।
तो मैंने पूछा: कहीं जा रहे हो क्या मौसा जी?
वो बोले: हां, कुछ दिन के लिए भोपाल जाना है कंपनी के ट्रेनिंग प्रोग्राम में।
तो मैने कहाः अच्छा।
फिर मौसी ने खाना लगा कर दिया, और मैंने खाना खाया। उसके बाद मैं हॉल में बैठा। मौसी मौसा जी की मदद कर रही थी कमरे में, तो मैं बैठ कर हॉल में मोबाइल चला रहा था। तभी मुझे मौसी की चूड़ी की खनक सुनाई दी, तो मैंने अपना फोन बंद करके खनक की आवाज पर ध्यान दिया।
मैं दबे जोड़ों से कमरे की तरफ बढ़ा। कमरे के दरवाज़े पर परदा लगा हुआ था, तो मैंने हल्के से परदे की तरफ से अंदर का नजारा देखा। मौसा मौसी के होठों का रस-पान कर रहे थे, और मौसी अपने हाथों से मौसा के सिर को पकड़े हुए थे।
5 मिनट की किस के बाद मौसी ने पूछा: कंडोम लेके आए हो कि नहीं?
तो मौसा ने बोला: अभी नहीं, टिकट निकलवाने जाऊंगा तो लेके आ जाऊंगा। अभी ऐसे ही क्या?
मौसी ने मन कर दिया और बोली: अभी भी घर पर ही है। अभी नहीं, जब कंडोम ले आओ तब।
तो मौसा ने बोला: वो तो मोबाइल में लगा हुआ है। तुम इस खड़े लंड को शांत कर दो किसी और तरीके से।
फ़िर मौसी मुस्कुराती हुई घुटनो के बाल बैठ गई, और मौसा की ज़िप खोल कर लंड को बाहर निकाल कर अपने मुँह में लेने लगी। मौसा के मुँह से उठेजना में आवाज़ निकलने लगी। थोड़ी देर बाद मौसा मौसी के सिर को पकड़ कर ज़ोर-ज़ोर से मुँह चोदने लगे। फ़िर 5 मिनट बाद मौसा ने मौसी के मुँह में ही अपना माल निकाल दिया।
उसके बाद मौसी जल्दी से उठ कर अपनी दशा सुधारने लगी। फिर मैं जाके सोफ़े पर बैठ गया, और कान में कलियाँ लगा कर बैठ गया। जिसे लगे कि मैंने कुछ नहीं सुना। फ़िर मौसी बाहर आईं और पूछा-
मौसी: रात में क्या खायेगा खाने में?
तो मैंने बोला: जो आपको बनाना हो बनाना। मैं आ जाऊंगा.
मौसी बोली: ठीक है दाल फ्राई और चावल और रोटी ठीक है? और शाम को जल्दी आ जाना, और मौसा को छोड़ देना रेलवे स्टेशन। उसके बाद यहीं रुक जाना.
मैने कहा: ठीक है.
और मैं इतना कह कर निकल गया। इसके बाद मैं शाम को 6 बजे उनके घर पहुंचूंगा। मैंने एक कैपरी डाला था, और उसके अंदर चड्ढी नहीं पहनी हुई थी। साथ में एक टी-शर्ट डाली हुई थी। मैं अन्दर गया, और मौसा जी का बैग उठा कर स्कूटी में आगे रखा। फिर उनको बिठाकर स्टेशन छोड़ दिया, और ट्रेन आने तक मौसा के साथ बातें करता रहा।
ट्रेन 7:30 पर आई और उसके बाद मैंने मेडिकल से जाके ड्यूरेक्स एक्स्ट्रा डॉटेड कंडोम और स्प्रे ले लिया। साथ में वियाग्रा ज़रुरत के लिए ली। मैं फिर वहां से वाइन शॉप गया, और एक बीयर की बोतल ली। साथ में चखने में चिप्स ली, और नेहर की साइड में जाके पी ली।
फिर मैं पान की दुकान गया, और दो मीठे पान बनवाये। उसके बाद एक पान पलंग-तोड़ बनवाया, पर आधे डोज का जिसकी मौसी उत्तेजित हो जाए, और मेरा काम आसान हो जाए। अब मैंने घर पहुंच कर स्कूटी बाहर लॉक करके खड़ी करी।
फिर अंदर गया तो मौसी का लड़का खाना खाते हुए टीवी देख रहा था। मैं मौसी को देख रहा था। काले रंग की साड़ी पहनी थी, और एक गुलाबी रंग का स्वेटर था। अब उनके बेटे ने खाना खा लिया, और वो कमरे में जाके मोबाइल चलाने लगा।
फिर मैं और मौसी हॉल में ही थे, और 8:30 बजे तक हम बात करते रहेंगे। हमने साथ में खाना खाया और 8:56 पर मैं बार्टन उठा कर मौसी की किचन में मदद के लिए चला गया। फिर वहीं पर बात करते हुए मौसी ने पूछा मेरी जीएफ के बारे में। तो मैंने बोला कि उसकी शादी हो गई थी।
इस पर मौसी ने बोला: तो अब फिर कैसे काम चल रहा है?
मैंने भी मजाक में बोल दिया: आपको देख कर।
इस बात पर उन्हें मुझे चिकोटी काटी और बोली: कुछ भी!
फिर मैंने उनसे पूछा: अच्छा मौसी, मौसा इतने व्यस्त रहते हैं, फिर आप टाइम मैनेज कैसे कर पाती होंगी। और फिर अस्तित्व भी रहता है।
तो वो बोली निकल लेते हैं जब वो स्कूल में होता है तब, या रात में जब गहरी नींद में होता है तब।
फिर मैंने पूछा: अच्छा, क्या आपने कभी बाथरूम में शॉवर लेने की कोशिश की?
वो बोली: नहीं, पर तुम इतने भी फ्रैंक मत हो। मैं मौसी हूं तुम्हारी.
तो इस पर मैंने जवाब दिया: मौसी के साथ-साथ की औरत भी हो। आपकी भी ज़रूरत है, और मैंने सुना है उम्र के साथ-साथ ज़रूरी भी बढ़ती जाती है।
फ़िर मौसी हस दी और बोली: अहल अब हॉल में बैठ। मैं आई बारतन जमा कर.
फिर मैं हॉल में गया, और वो पलंग-तोड़ वाला पान निकाल कर उनको दे दिया। खुद नॉर्मल वाला खा लिया मैंने।
इसके आगे क्या हुआ, वो आपको अगले पार्ट में पता चलेगा। अगला हिस्सा जल्दी ही आएगा.






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