नमस्ते.. मैं इस पेज को रोज़ बनाता हूँ और महसूस करता हूँ कि ज़्यादा लोग सच नहीं लिखते.. मज़ा तब है जब आप अपनी सच्ची बात लिखते हैं.. यही वह चीज़ है जो मुमकिन है मगर क्या चीज़ न मुमकिन भी लगती है.. किसी भी तरह, मैं अपनी बात पे वापस आता हूँ.!!
ये बात आज से कुछ महीने पहले की है.. मैं पहले ये बता दूं के मैं और मेरी ब्री बहन जो मुझसे 3 साल ब्री है बचपन से ही काफी फ्रैंक थे.. हम काफी लाते भी थे और एक साथ खेलते भी थे.. मुझे याद है जब मैं स्कूल में था एक दिन उस ने मुझे बिस्तर में मुंह मारते देख लिया था.. मगर हमने ने कभी और कोई ऐसी हरकत नहीं की.. हां हम एक दूसरे को काफी पसंद करते हैं… कॉलेज तक हम काफी फ्रैंक थे मैंने क्या बार अपनी बहन ते बूब्स तो खेल खेल में टच भी किया था मगर ना उस ने इस बात का एहसास होने दिया ना मैंने…!! अब उस की शादी हो चुकी है.. मगर हमारा दोनों का वो लाने का स्टाइल अभी भी वैसा ही है.. वो जब भी हमारे पास आती है तो हम काफी मस्ती करते हैं.. बात उस दिन की है जब हम सब एक रिलेटिव की शादी में मिले.. सारा दिन खूब एन्जॉय किया.. गाना और डांस चलता रहा.. काफी दिन के बाद हमने ने ऐसे मजा किया.. कहीं.. रात को सोने का टाइम हुआ तो जैसे अक्सर ऐसे मक्के पे होता है.. सबके बिस्तर नीचे फरास्फ पीडब्लू ही लगे थे.. इतने लोगों को तो बेड देना मुश्किल था तो हमने भी एक कमरे में नीचे ही बिस्तर लगा रखे थे.. सब थके हुए थे और जैसे किसी को जगह मिली सब फटाफट सोने को अपने बिस्तर में घुसे..!!
मेरी बहन की फैमिली भी सो गई.. मैं भी एक कोने में पहले बिस्तर में घुस गया.. थोड़ी देर बाद मेरी बहन अपना बिस्तर ढूंढती थी, लेकिन कोई बिस्तर खाली नहीं था.. उस ने मेरे साथ वाले बिस्तर पे जिस में मेरी एक आंटी सो रही होती थी, थोड़ी जगह बनाई और लेट गए.. सर्दी का मौसम था.. सब सुकून के सो रहे थे.. कमरे की लाइट भी बंद थी… कुछ देर बाद कई करवा ली तो मेरी बहन मेरी तरफ पीठ करके लेती हुई थी.. मगर उस की पीठ मेरे ठीक पास थी.. मैंने महसूस किया कि शायद मैं उसकी पीठ को छू रहा हूँ, मगर उस ने कोई हरकत नहीं कि.. मेरा मूड बन गया.. मैंने हिम्मत की और थोरा और नजदीक लेट गया.. अब मेरा लंड भी खरा हो गया था और मेरी बहन अच्छे से उसे अपने पीछे लगा मेहसूस कर रही थी मगर अभी भी वो ऐसे लेती थी कि उसे कुछ मालूम नहीं.. मैंने मौके का फायदा उठाया और धीरे से अपना एक हाथ उस की रजाई में से उस की कमर पे रख दिया.. उसने हल्की सी करवा ली और सीधी हो कि लेट गए.. मैं एक्साइट हो रहा था.. कमरे में अंधेरा था सब सो रहे थे.. मेरा मूड बन रहा था.. मैंने अपना हार उस की कमर से नीचे ला के उस के पेट के ऊपर रखा तो उस ने मेरा हाथ पकड़कर लिया और मैं समझ गया कि अब इससे ज़्यादा मुझे कुछ नहीं करने देगी… फिर भी मैंने उसका हाथ पकड़कर लिया और धीरे से उसने अपने लंड पे टच कर दिया.. उस ने जैसा कोई ऐतराज़ नहीं किया.. मेरा लंड पूरा तरह खरा हो गया था.. मैंने जल्दी से अपनी बहन का हाथ अपने अंडरवियर के नीचे डाल दिया.. उसने मेरा लंड छुआ और उसे अपने हाथ में ले कि हिलाने लगे… हम चुप चाप लेते हुए थे मगर उस का हाथ मेरे लंड को मसलता जा रहा था.. ओह इतना सॉफ्ट टच था.. वो जानती थी कि मर्द के लंड को कैसे मसलना है… मैं जैसा किसी नशे में था.. उस ने अब पूरे ज़ोर से मेरी मुठ मारना शुरू कर दिया था.. शायद उस का एक हाथ अपनी चूत को भी छू रहा था मगर मैंने उसे नहीं छुआ.. मेरा लंड मेरी बहन के हाथ में था और वो मेरी प्यास बुझाने के लिए अपना काम करती जा रही थी… जैसे ही मुझे लगा कि मैं डिस्चार्ज होने वाला हूँ.. मैंने अपना लंड पूरे से बाहर निकाल दिया.. वो भी समझ गए… उस ने ज़ोर से मुठ मारना चालू रखा और.. एक ही झटके में मेरा डिस्चार्ज निकल गया.. वो अब भी मेरे लंड को हिलाए जा रही थी.. उस के हाथ में भी मेरा बेचैनी लगा होगा मगर उस ने रजाई के कवर सो हाथ साफ किया और मेरा लंड भी साफ कर के करवा ले सो गए.. यह मेरा पहला ताजुर्बान था कि किसी औरत ने मेरी मुठ मारी हो वो भी मेरी बहन ने… इसके बाद हमने 2-3 बार मिले मगर इस बात का जिक्र नहीं किया.. मेरी तमन्ना है कि मैं किसी दिन अपनी बहन को राजी कर लूं और उस की जी भर के चुदाई करो.. जब ऐसा होगा तो अपनी कहानी जरूर लिखूंगा..!!





