हाय मैं लीना, मैं 39 साल की हूँ। शादीशुदा हूँ। किस्मत अच्छी है कि मैं आज भी बहुत सुंदर और सेक्सी हूँ, मुझे पता है कि कई लंड वाले मेरी कहानी पढ़कर मुझे चोदना चाहेंगे लड़कों मेरी कहानी पढ़कर अपना लंड हिलाकर शांत मत होना मुझे चोदने की स्टाइल में रिप्लाई करना और रिप्लाई करते समय अपने मीठे लंड को खोलकर रखना और हो सके तो लंड का सेक्स पिक। मेल करना क्योंकि मैं इस कहानी को लिखते समय बहुत हॉट हो गई हूँ और मुझे आज फिर प्यास जाग गई है ....इस समय मैं सो कर उठी हूँ और घर में बिल्कुल अकेली हूँ मेरा बहुत मूड हो रहा है, मैंने ब्लैक बॉर्डर की पिंक सिफोन साड़ी और पिंक ब्लोज़ पहना है, ब्लोज़ के नीचे सफेद नेट वाली ब्रा में मेरे बूब्स तन रहे हैं मैं बहुत कैसा महसूस कर रही हूँ, ऐसा फील हो रहा है कि कोई आकर मेरे बॉब्स को निचोड़ दो, नीचे पिंक पेटीकोट के नीचे हल्के पीले रंग की पैंटी पहनी है और इस समय मैंने अपनी साड़ी जांघों तक उठा ली है और पेंटी की स्टेप सरकार एक हाथ से बार-बार अपनी चूत को सहला रही हूँ, और बॉब्स पर भी थोड़ी-थोड़ी देर में हाथ फेर रही हूँ, मेरी चूत के बाल इस समय बड़े हुए हैं 2 महीने से चूत की बचत नहीं की है .... लेकिन बाल जब पेंटी से रगड़ते हैं तो मज़ा भी आता है,,,, काश कोई जवान मर्द इस समय पास होता .... मेरी रिक्वेस्ट है इसी स्टाइल में हॉट मेल करना ,,,,,, हो सकता है मेरी कहानी पढ़कर मेरी कई बहनों को अपनी जवानी के दिन याद आ जाए बहुत सोचे कि उन्हें मौके का फायदा क्यों नहीं उठाया बहुत भी जवाब दे सकती है और अपने एक्सपी। शेयर कर सकती हैं......लेकिन मेरे जवान दोस्तों प्लीज मुझे अपने मेल से गरम कर देना मुझे लड़के से सेक्स की बातें करना और लंड/चूत/भोसड़ा/चुदाई वगैरह सुनना अच्छा लगता है..मैं खुल कर सेक्स का मज़ा लेना चाहती हूँ मुझे सेक्स फेंटेसी बहुत पसंद है.....10 साल पुरानी घटना है मैं आपसे अपना एक एक्सपीरियंस शेयर करती हूँ बात 10 साल पहले की है मेरे नंद का लड़का (अज्जू) जिसकी उम्र 17-18 साल थी एग्जाम देने के लिए हमारे घर आया मेरे पति उन दिनों टूर पर ज्यादा रहते थे इसलिए मुझे सेक्स के लिए परेशान रहती थी घर में सिर्फ दो रूम थे जिस कारण अज्जू से मुझे चिढ़ हो रही थी कि इसकी बजह से मेरे जीवन का आनंद जा रहा है दिन पति रात की ट्रेन से 7 दिन के लिए बाहर जाने वाले थे पति ने बोला बह दोपहर को आ जाएंगे जब अज्जू कॉलेज में रहेगा, फिर प्यार से जम कर सेक्स करेंगे क्योंकि 7 दिन नहीं मिलेगा,,मैं बहुत खुश थी मैंने नहाने से पहले सेव की बहुत सुंदर सेक्सी अंडरगारमेंट्स और सारी पहनी...लेकिन मेरी किस्मत खराब पहले तो पति लेट हो गए हमारी जैसे ही बह आए पीछे से अज्जू भी आ गया मेरा दिमाग खराब हो गया मैं फलतू में अज्जू को दटने लगी पति भी मुझ पर नाराज हो गए कहने लगे जीवन पड़ा है क्यों परेशान हूँ फिर मैं मान मार्कर उनके जाने की तैयारी करने लगी बारिश के दिन थे पानी गिरने लगा पति की ट्रेन 10 बजे रात की थी मैंने जल्दी खाना सब को खिला दिया 9 बजे करीब पति अंडर रसोई में आए मुझे पीछे से पकड़कर चूमा-चाटी करने लगे उनका हत्यारा मैं अपने नितम्बों पर अहसास करके बहुत उत्तेजित हो गई मैंने पति को बताया आज की तैयारी में मैंने क्या-क्या किया पति ने साड़ी के अंडर मेरी पैंटी में हाथ डालकर मेरी चिकनी चूत सहलाई मैंने उनके हत्यारे को हाथों से सहलाया मेरी चूत चुदाई के लिए तैयारी हो गई थी गीली होने लगी... इतने में अज्जू ने आवाज़ दी मामा ट्रेन का समय हो गया चलो फिर अज्जू उन्हें स्कॉटर से छोड़ने स्टेशन चला गया,,,,, मैं हाल में लेटर टीवी देखने लगी में बहुत गरम बुखार के साथ रही थी और मुझे अपनी किस्मत पर भी रोना आ रहा था मैं उगना से भरकर अपनी सर में हाथ डालकर अपनी बुर को सहलाने लगी मेरी चूत में आजीव सी प्यास लगी थी दिमाग में कुछ सोघ नहीं रहा था मैं छोड़ने के लिए बेकरार थी,, इतने में स्कॉटर की आवाज़ आई मैंने अपने कपड़े सही किए दरवाजा खोला अज्जू भींग कर आया था मैंने उसे गुस्से से बोला जल्दी पंच के कपड़े बदल ले बरना तबीयत खराब हो गई तो हमारी ही मुश्किल होगी"बो सहम गया मैं अंदर कमरे में चली गई कमरे का दरवाजा बंद करने आई तो देखा अज्जू अपनी गीली बनियान उतार रहा था उसकी नंगी पीठ देखकर मुझे कुछ अजीब सा एहसास हुआ हमारे हाल में आ गई हमारा कुछ ढूंढने का नाटक करते हुए तीखी नज़र से उसे देखने लगी फिर उसने अपनी पेंट उतारी उसकी अंडरवियर सफेद थी जो गीली होने से अज्जू के शरीर से चिपक गई थी मैंने देखा अज्जू का काला लंड मुड़ा हुआ साफ दिख रहा था बहुत मोटा था जबकी खड़ा नहीं था, और काले-काले बाल भी नज़र आ रहे थे और उसके लंड का गुलाबी सुपाड़ा तो अकडम चमक रहा था,,,बह मुझे भरपूर मर्द का जवान लंड दिख रहा था जिसकी कोई औरत अपनी चूत में डलवाना चाहेगी चाहे बह संतुष्टि क्यों ना हो,,,मेरी हालत जवान लड़के को अपने इतने करीब नंगा देखकर बहुत खराब हो गई और मैंने सपने में भी नहीं सोच सकी कि अज्जू इतना जवान है उसके शरीर को देखकर मैं रिश्ते को भूल गई मैंने सोचा रात को इसका मजा लेना है जो होगा देखा जाएगा फिर अज्जू ने कपड़े पहन लिए,,फिर अज्जू बहन पर लेट गया मैं अपने कमरे में आ गई हमारी मैंने अपनी साड़ी, ब्लोजॉब ब्रा और पेटीकोट उतार कर नाइटी पहन ली,हमारा बाथरूम पीछे आंगन में था रात के करीब 11 बज रहे थे, मैंने अज्जू को आवाज़ दी बह बोला जिमामी मैंने कहा मुझे पीछे पेशाब जाना है देर लग रहा है तू साथ चल मैंने पीछे की लाइट गलाई हमारे बाथरूम के बाहर नाली के पास जेकर अपनी नाइटी उठाई कमर के ऊपर और धीरे से अपनी पैंटी सरकाई ताकि अज्जू में चिकनी तंग और गांड आराम से देख सके हमारी बैठ गई अज्जू मेरे पीछे ही खड़ा था मैंने पीछे देखते हुए बोला जाना मत बह बोला जिमामी फिर मैं अज्जू की मुंह की तरफ होकर खड़ी हुई फिर मैंने अपनी नाइटी कमर से ऊपर उठा कर पैंटी पहनी ताकि अज्जू को मेरी क्लीन चूत दिख जाए हमारी बह भी बहक जाए अज्जू की आँखों में सरम थी लेकिन बह मेरी चूत हमारी नंगी जांघों को चोरी-चोरी देख रहा था लेकिन बह बस पास जाकर सो गया मैं अपने कमरे में आई हमारी सोच अज्जू को आवाज़ देकर अपने पास बुलाओ लेकिन देर लग रहा था कहीं कुछ गलत तो नहीं हो रहा है लेकिन मेरी साँसें तेज़-तेज़ चल रही थीं और मेरी चूत चिल्ला कर कह रही थी कि उसे लंड चाहिए मेरी हालत पागलों जैसी हो गई मैं उठ कर बैठ गई, अज्जू के कमरे की लाइट जल रही थी मैंने धीरे से उठ कर अज्जू के कमरे में झांका बह उल्टा होकर सो रहा था फिर मेरा हाथ अपने आप अपनी चूत पर जा रहा था, समझ नहीं आ रहा था कि कैसे शुरू करूं .....तभी मैंने महसूस किया कि अज्जू कुछ हिल रहा है (जैसे आदमी औरत के ऊपर होकर हिलता है वैसे) मुझे समझते देर नहीं लगी कि बह मेरी नंगी जांघों को हमारी साफ चूत को देखकर उभर गया है और अपना पानी निकालने की तैयारी में है, मैंने समय गबाए बिना अज्जू के कमरे में चली गई ....मैंने देखा अज्जू ने धीरे से अपनी आँख खोल कर मुझे देखा और सोने का नाटक करने लगा.....मैं कुर्सी पर बैठ गई सोचा देखो अब अज्जू हिलता है या नहीं यदि हिलेगा तो उसे खुल कर छोड़ने की बूल दूंगी....लेकिन 10-12 मिनट में साला बिल्कुल नहीं हिला और मेरी हालत खराब हुई जा रही थी...मुझे समझ नहीं आ रहा था कि क्या करूं रात के करीब 1 बज गए थे फिर मैंने टीवी पर कर दिया और देखने लगी....तभी अज्जू आँख घिसे हुए उठ के बैठ गया कहने लगा, क्या हुआ मामी, तो क्यों नहीं रह रही हो? मैंने बोला नीड नहीं आ रही। दुख रहा है। अज्जू ने कहा......क्या से दुख रहा है? मैंने कहा नहीं पूरा शरीर दुख रहा है, अज्जू ने कहा तबीयत तो ठीक है, मैंने कहाँ हाँ ....... अज्जू बोला में कुछ मदद करूँ,, मैंने कहा, प्लीज मेरे पर दबा दे, अज्जू ने कहा ठीक है .... फिर अज्जू की बहन पर मैं लेट गई अज्जू मेरे पर दवाने लगा मैंने कहा कहाँ प्लीज थोड़ा ऊपर-ऊपर अज्जू बहन पर बैठ कर मेरी जांघे दवा रहा था मेरी चूत से रश निकल रहा था मुझे अपनी पैंटी गीली-गिली महसूस हो रही थी .. तभी मुझे महसूस हुआ अज्जू मेरी चूत को नाइटी के ऊपर से अज्जू छू कर रहा था हमारी चूत के ऊपर अपनी उंगली चला रहा था मेरी सांस बहुत तेज़-तेज़ चलने लगी..मैंने अपना एक हाथ अज्जू के लंड पर रख दिया उसका लंड 8' का पुरी तरह खड़ा था बहुत मोटा महसूस हो रहा था..तभी अज्जू बोला ""मेरा लंड कैसा लगा"" फिर मैंने कहा मुझे आज यह चाहिए है तभी अज्जू मेरे बाजू में आज्ञा और मेरे सीने को सहला रहा था. मुझे बहुत मज़ा आ रहा था,मैंने अपने एक हाथ से उसका लंड सहलाना चालू रखा और उसकी गांड भी सहला रही थी.. उसकी हिम्मत और बढ़ी और वो मेरे ब्रेस्ट को जोर-जोर से दवाने लगा. मुझे सिरहन होने लगेगी और मैंने करवट बदल के सीधी सो गई तो उसने हाथ हटा लिया और थोड़ी देर बाद वो फिर से मेरे बूब्स सहलाने लगा। फिर वो मेरी नाइटी उतारने लगा या उसने मेरे नंगे बूब्स को चूसने लगा। मैं बहुत ही गरम हो रही थी मैं उठ गई और मैंने उसे कपड़े निकाले को कहा, उसने तुरंत सारे कपड़े निकाल दिए या पूरा नंगा हो गया। मैंने उसके लंड को डेका वो बहुत ही बड़ा था। फिर उसने मेरी पैंटी को निकाल दिया। फिर वो मुझे किस करने लगा और मैं भी उसे बहुत किस करने लगी फिर उसने मुझे बेली पे किस किया। आआआआह मुझे बहुत मज़ा आ रहा था और मैं बहुत ही गर्म हो चुकी थी। फिर वो मेरी चूत को चाटने लगा। और मैं अंगड़ाई लेने लगी उफ़्फ़ मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि मैं क्या करूँ। फिर मैंने उसे कहाँ प्लीज़ और मत तड़पाओ प्लीज़ मुझे छोड़ो। फिर वो मेरे ऊपर सो गया या उसने उसके लंड को मेरी चूत पे रखा या फिर धक्का मारा तो उसका पूरा लंड एक ही झटके में अंदर चला गया। और मैं ज़ोर से चीख उठी आआआआआआह्ह्ह्ह। फिर वो जोर जोर से मुझे छोड़ देते हैं और मैं भी अपने हिप्स उठा उठा के उसे साथ देने लगी। और आआआआआह आह्ह उह्ह्ह्ह वो जोर जोर से छोड़ने लगा। फिर थोड़ी देर बाद उसने मेरी चूत में गरमा गरम लावा छोड़ दिया, फिर सारी रात हम दोनों एक दूसरे के साथ नंगे चिपक गए। इसके बाद उसका जब भी मान होता तो वो मेरे ब्लाउज को हटा के मेरे निप्पल चूसता रहता लेकिन मुझे पूछे बिना मेरी चूत को नहीं छूटता था। एक दिन में नहा रही थीं तो वो भी बाथरूम में आ गया और मुझसे बाथरूम में ही प्यार की भीख मांगने लगा तो मैं उसे मना नहीं कर पाई। फिर उसने सारे कपड़े निकाल दिए या हम शावर साथ लेने लगे। फिर मैं दीवार का सहारा लेके खड़ी रही या उसने मुझे बहुत टाइट हग किया या मेरे होंठों का जूस पीने लगा या उसने मेरी एक टांग को उठा के फिर मुझे छोड़ने लगा। उसने मुझे एक नए अनुभव का सुख दिया। मैं बहुत खुश हो गई हूँ, मैं अज्जू को बहुत चाहती हूँ। और वो भी मुझे बहुत चाहता है। फिर हमने कई बार सेक्स किया। मैं मेरे पति को भी चाहती हूँ, आपको मेरी यह सच्ची कहानी कैसी लगी, वो आप मुझे मेल करके बताइए, मुझे आपके मेल का इंतज़ार रहेगा, मैं ज़रूर जवाब दूँगी।
Monday, 10 August 2026
Sunday, 9 August 2026
अपना देवर
मेरा नाम मनीषा है। मैं शादीशुदा हूँ। शादी के एक साल बाद की एक घटना मैं आज आपको बताती हूँ। मैं अपने पति के साथ रहती थी। घर में हम दो ही रहते थे। वैसे मैं बहुत सेक्सी हूँ लेकिन अपने पति से संतुष्ट थी। वो भी सेक्स में अच्छे हैं। हाँ, सेक्स भी हमेशा एक जैसा हो के रह गया था। एकडम रूटीन और मोनोटोनस लगता था। एक दिन एक पत्र पढ़कर वो बोले, मनीषा, मेरा एक चचेरा भाई जो करीबी के छोटे गाँव में रहता है, उसकी एसएससी की एग्जाम का सेंटर इस शहर में आया है। तो वो पढ़ने के लिए और एग्जाम देने के लिए इसी शहर में आ रहा है। कुछ दिन यहाँ रहे तो एट्राज़ तो नहीं है? मैंने कहा, भला मुझे क्या एट्राज़ होगा। आपका भाई है, तो मेरा तो देवर हुआ ना। देवर के आने से भाभी को क्या एट्राज़ हो सकता है। और वो आ गया। नरेश नाम था उसका। करीब 18 साल का होगा। 5-8 की ऊँचाई और मज़बूत कद था। मोटा नहीं पर कैसा हुआ बदन था। हल्की सी मुछें भी थीं। अब घर में बस्ती हो गई। सुबह का नाश्ता हम सब, मैं पति और नरेश, साथ करते थे। उनके ऑफिस जाने के बाद मैं घर में पहले अकेली हुई कराती थी। अब नरेश भी था। वो दिनभर मन लगाकर पढ़ाई करता था। मैं भी उसे ज्यादा डिस्टर्ब नहीं करती थी, उसे पढ़ाने देती थी। लेकिन लंच और दोपहर की चाय हूँ साथ पीते थे। दोपहर को जब मैं नींद से उठती तो उसके कमरे की और चली जाती और पूछती; पढ़ाई कैसी हो रही है? वो कहता ठीक हो रही है। और मैं पूछती; चाय पियोगे ना? वो कहता है, हाँ। और फिर मैं चाय बनाने चली जाती। चाय पीते समय हम दोनों बात करते थे। लेकिन उस रोज़ जब मैं दोपहर की नींद के जल्दी ही पूरी हो गई। जब मैं उसके कमरे पर गई, तो दरवाज़ा बंद था और कमरे से कुछ आवाज़ आ रही थी। मैं रुक गई और सुनने लगी। आह आह की आवाज़ आ रही थी। मुझे समझ में नहीं आया क्या हो रहा है। मैं दरवाज़ा खटखटाने वाली थी कि ख्याल आया, खिड़की से देख लूं। उस कमरे की एक खिड़की हॉल में पड़ती थी। वह भी बंद थी, पर पूरी लगी नहीं थी। मैंने हल्का सा धक्का दिया और थोड़ी सी खोल दी। कमरे का नज़ारा देखा तो बस, देखती ही रह गई। नरेश अपने सारे कपड़े उतारकर बिल्कुल नंगा खड़ा था। उसका लंड पूरा ताना हुआ था। वो लंड हाथ में लिए हुआ था और ज़ोर ज़ोर से उसे खेल रहा था। मेरी आँखें झपकना भूल गई, सीने की धड़कन बढ़ गई। मेरे सामने एक 18 साल का जवान लड़का अपने हाथ में ताना हुआ लंड लेकर हस्तमैथुन कर रहा था। मैंने मर्दों के हस्तमैथुन के बारे में सुन रखा था, लेकिन आज मैं उसे अपनी आँखों से देख रही थी। ओह, क्या सीन था!!! पूरी जवानी में आया हुआ, कसरती बदन वाला नव-युवक मेरे सामने नंगा खड़ा था। उसका खुला सीना ही किसी लड़की को व्याकुल बनाने के लिए काफी था। यहाँ तो उसकी शुद्ध जांघे भी नज़र के सामने थी। क्या मांसल जांघें हैं !! वाह !! और उसके बीच में पूर ज़ोर से उठा उसका लंड !!!!! हे भगवान !!! मेरे सीने की धड़कने तेज़ हो गई। मेरे संस्कार कह रहे थे, मुझे तुरंत वहाँ से हट जाना चाहिए। लेकिन मान नहीं मानता था। मैं रुक ही गई और वो दिलकश नज़ारा देखती रही। खिड़की थोड़ी ही खुली थी, इसके लिए उसका ध्यान नहीं था। वो तो अपने काम में मगन था और लगा हुआ था। उसका चेहरा भी देखने जैसा बना हुआ था। सेक्स की तड़प स्पष्ट रूप से छलक रही थी। उसका लंड और मोटा और कड़क होते जा रहा था। थोड़ी देर में उसके लंड से पानी छूट गया और वो ढीला हो गया। मैं वहां से चली गई तो मुझे ख्याल आया, मेरी पैंटी भी गीली हो चुकी थी। मैंने जा के बदल ली। वो नज़ारा मेरे दिमाग से उतरता ही नहीं था। रात को पतिदेव के साथ सोने गई तब भी दिमाग में यही मंदरा रहा था। उस रात मैं बहुत गरम हो गई और पति के ऊपर हो गई। मैं उसके ऊपर किसी भी चीज की तरह सवार हो गया। बाद में उनसे भी बहुत चुदवाया। वो भी बोल उठे, आज तुझे क्या हुआ है ? कोई ब्लू फिल्म तो नहीं देखी ? मैं क्या बोलूं ??? इस से बड़ी ब्लू फिल्म क्या देखती है ??? मैंने कह दिया, नहीं, यह तो आप कल से 10 दिन की टूर पर जाने वाले हैं ना, इसके लिए। वो हंस पड़े। दूसरे दिन भोर में ही वो टूर पर निकल गए। मेरा जी तो अब नरेश में अटका हुआ था। मेरा बदन उससे चुदवाने के लिए बड़ा तड़प रहा था। लेकिन उसे कहू भी कैसे? उसमें खतरा था। वो सुशील लड़का था। मुझे ठुकरा देगा और मेरी इज्जत पर खतरा हो जाएगा। तो मैंने सोचा, ऐसा कुछ करना होगा जिससे वो ही मुझे चोदने के लिए तरस जाए। मैंने धीरज से काम लेना उचित समझा। मैं स्नान करके निकाली तो मेरे दिमाग में योजना बन चुकी थी। मैंने अपने कपड़े में परिवर्तन शुरू किया। एक लो कट वाली मेरी पुरानी शादी के समय की ब्लाउज निकाली। उस समय की अपेक्षा, अब मेरे बूब्स बड़े हो चुके थे। (रोज पतिदेव द्वारा मसाले जो जाते थे!) जैसे तैसे करके बूब्स को दबा कर मैंने वो ब्लाउज पहन लिया। लो कट थी तो मेरा क्लीवेज पूरा दिखता था और बूब्स दबाके डालने से वो भी उबर कर बाहर दिख रहे थे। सारी भी इस तरह पहनती थी कि ये सारा खुला ही रहे, आँचल के पीछे ना छिप जाए। मैना आने में अपने आपको देखा और संतुष्ट हुई। नाश्ते की तैयारी की। डाइनिंग टेबल पर सब चीज़ प्लानिंग से रखी। नरेश को बुला लिया नाश्ते के लिए। वो आ के बाथा लेकिन उसका ध्यान नहीं गया। वो तो अपनी पढ़ाई के ख्यालों में ही था। मैंने सब आइटम थोड़ी ही दी थी। उतना तो ज़ट से खा गया और और माँग लिया। अब मैं मन ही मन मुस्कुराई अपने प्लान पर और उठ खड़ी हुई। उस परोसन के लिए उसकी नज़दीकी गई। मैं उसके दाईं ओर थी और सारी चीज़ें उसके बाईं ओर थी। तो मैं वही खड़े होकर आगे झुक कर चीज़ें उठाने लगी। स्वाभाविक है, मेरे बूब्स उसके मुँह के एकदम नज़दीक आ गए। अब उसकी नज़र उन पर पड़ी, और वो देखते ही रह गया। उभरे हुए गोरे गोरे बूब्स…और लो कट से दिखता पूरा क्लीवेज…उसकी नज़र चिपकी ही रह गई। मैं ऐसे व्यवहार कर रही थी जैसे मुझे पता ही नहीं। मैंने एक लंबी साँस भरी और हल्के से छोड़ी। छाती भर आई तो बूब्स की मूवमेंट भी हुई। उसे ध्यान ही नहीं रहा कि मैंने उसकी प्लेट परोस दी है। मैंने उसे कहाँ, देवरजी, नाश्ता कीजिए ना? वो चौंका और नज़र हटा के खाने लगा। लेकिन मेरी नज़र उस पर लगी हुई थी। वो बार-बार मेरे स्टैन को देख रहा था। मैं अपने प्लान में सफल रही। मैंने उसके शरीर में बीज बो दिया था। दूसरे दिन से मैं रोज़ अपने कपड़े में एक कदम आगे जाने लगी। दूसरे दिन मैंने ऐसा ही लो कट मगर स्लीवलेस ब्लाउज पहन लिया। अब उसे मेरी गोरी बहन भी देखने को मिलती थी। तीसरे दिन मैंने एकदम पारदर्शी ब्लाउज पहन लिया, जिससे मेरी काली ब्रा साफ दिखाई देती थी। अब वो रोज़ चोरी छुपी मेरे स्टेन को देखता था। चौथे दिन मैंने ब्रा पहन ही छोड़ दिया। ब्लाउज तो परदर्शक स्लीवलेस और लो कट था ही। उस रात को मैंने ब्लाउज को साइड से भी शेप दे कर ऐसा बना दिया कि क्लीवेज के अलावा बूब्स की साइड्स के भी दर्शन होने लगे। पांचवें दिन उसे पहनना। अब जब मैं उसे परोसती थी, तो दूसरी और रखी हुई आइटम्स उठाने के लिए इतनी झुकती थी कि उसकी गर्म सांस मेरे स्टेन को छूटी थी। कभी कभी तो उसका चाहा मेरे बूब्स को छू जाए, इतना झुक लेती थी। अब उसकी आँखों में तरस नाज़े आती थी। मैं जानती थी कि मैं कामयाब हो रही हूँ। छठे दिन मैंने साड़ी भी एकदम नीचे पहन ली। मैं अच्छी तरह से तैयार भी हुई। रोज़ की तरह वो मेरे उभरे हुए दोनों स्तनों को देखता रहा। मैं उन्हें लंबी सांस लेकर ऊपर नीचे कराती रही। मैंने ब्लाउज का हुक ढीला कर रखा था, जो थोड़ी सांस लेने के बाद टूट गया। मेरे दबे हुए स्तन उछल कर सामने आ गए। मैंने शरमाने का धोंग किया और अपने कमरे में जा के हुक को ठीक तरह से लगाकर वापस आ गई। उसकी हालत तो देखने जैसी हो गई थी। उसी दिन दोपहर को मैं हॉल में ही सो गई। एक नवलकथा की किताब मैंने ला के रखी थी जो देवर भाभी के नाजायज़ संबंध पर थी। उसमें जहाँ दोनों के सेक्स संबंध का खुल्ला ब्यौरा था, वहाँ तक पेज खोलकर उल्टी कर के रख दी। जैसे मैं वहाँ तक पढ़ते हुए, सो गई हूँ। सोने का धोंग करते मैं लेती थी। सारे घुटनों तक सिरका के रखी थी। रोज़ की चाय का समय हुआ, लेकिन मैं जान बुझा कर नहीं उठी। थोड़ी देर इंतज़ार करके, नरेश चाय के लिए बताने बाहर आया। उसने आके देखा कि मैं सोई हुई हूँ। वह करीबी आया और किताब उठाई। जैसे पढ़ने लगा, वह कमाई होने लगा। उस किताब में देवर भाभी के बीच सेक्स का ही खुला खुला ब्यौरा था। उसकी वासना भड़क उठी। उठाने में मैंने करवट बदलने का बहाना किया। बदलते बदलते मैंने मेरा बयान (बाएं) पैर भी घुटनों से ऊंचा किया। साड़ी जो घुटनों तक थी, अब कमर तक गिर पड़ी। मेरी गोरी जांघ (जांघ) अब पूरी तरह दिख रही थी। मैंने हल्की सी आँख खोली। तो देखा कि उसका लंड एकदम खड़ा हो गया था। उसने चड्डी (शॉर्ट्स) पहन रखी थी। एक हाथ में किताब पकड़ा हुआ था। दूसरा हाथ अब उसने अपनी चड्डी में नीचे से डाल दिया और खड़े लंड को मज़बूती से पकड़ लिया। थोड़ी देर पढ़ता रहा और मेरी जांघ और बूब्स की और देखता रहा। फिर मैंने देखा कि उसने अपना दूसरा हाथ बाहर निकाल के मेरी और बढ़ाया। मैं खुश हो गई और आँखें बांधकर इंतज़ार करने लगी। लेकिन कुछ नहीं हुआ। फिर आँखें खोली तो वो वहाँ नहीं था। उसकी हिम्मत नहीं बनी। वो कमरे पर चला गया था। हाँ, किताब आवश्यकता ले गया था। मैं उठी और उसके कमरे की और गई। वो दरवाजा बंद करके फिर हस्त मैथुन कर रहा था। आज तो घोड़े जैसा लंड किया हुआ था। मुझे बहुत अफसोस हो रहा था। जिसे मेरी चूत में होना चाहिए था, वो लंड उसके हाथों में था। लेकिन मुझे भी तो खुला नहीं होना था। मजबूरी में उसे देखती रही। थोड़ी देर में उसके लंड से फव्वारा उड़ा और वो शांत हुआ। उस रात मैंने सातवे दिन का प्लान बना लिया। उसके दिल में वासना तो मैं जगह ही चुकी थी। अब तो हिम्मत करवाना ही बाकी था। सातवे दिन सुबह मैंने अपने कमरे का फ्यूज निकाल दिया। और गीजर खराब है कहाँ के उसके अटैच्ड बाथरूम में नहाने का प्लान बना लिया। मैं कपड़े ले के अंदर चली गई। थोड़ी देर नहाके बाहर निकली, तो बदन पर सिर्फ तौलिया लपेटा था। ऊपर मेरी निप्पल से शुरू करके चूत तक तौलिये से बदन ढका था। निप्पल से ऊपर के स्तन का भाग और चूत के नीचे की टंगे सब खुली थी। सिर के बाल गिले थे और मेरे गोरे बदन पर पानी सरक रहा था। मैं काफी सेक्सी लग रही होगी। गरमी बहुत थी तो वो सिर्फ चड्डी पहन के पंखे के नीचे खड़ा था। मुझे देखा तो बस देखता ही रह गया। इतना नंगा मुझे उसने आज ही देखा। मैं उधर ही खड़ी रही। वो भी सारी शर्म छोड़ कर मुझे देख रहा था। मैंने उसकी बिस्तर पर वो किताब पढ़ी देखी, तो पूछ लिया; कैसी लगी ये कहानी? उसने कहा, बड़ी रोचक है… पर ऐसा तो कहानियों में ही होता है ना। मैंने कहा, कहानियाँ भी तो समाज से मिलती हैं ना… और महेश ने हिम्मत की तो हंसा को पाया। (महेश और हंसा उस किताब में देवर भाभी के नाम थे)। आखिर शुरू तो मर्द को ही करनी पड़ती है। हंसा की भी वही इच्छा थी, पर महेश ने शुरू किया तो उसने साथ दिया ना। वो बात को समझा…और करीबी आया। मैं समझ गई, अब मेरा काम हो गया। करीबी आके उसने अपने दोनों हाथ उठाए और मेरे फैले हुए गिले बालों में पसरते हुए हाथों को दोनों कान पर रखा। और मेरा चाहरा ऊँचा किया। मैं भी वासना भरी नज़र से उसको देख रही। वो जुआ और मेरे होठों पर अपने होंठ रख दिए। मैं रोमंचित हो उठी। मैंने उसे अपने होठों को चुराने दिया। कोई विरोध नहीं किया। उसकी हिम्मत बढ़ी और मुझे करीब खींचा। मैं भी उसके करीबी सरकी, लेकिन सरकने से पहले एक हाथ से सफाई से तौलिया खोल डाला। खुलते ही तौलिया गिर पड़ा। अब मैं पूरी नंगी थी और वो सिर्फ चड्डी पहने हुए थे। मैं करीबी जाकर उसको चिपक गई। उसने किस थोड़ी तेज़ की, लेकिन नया था तो बराबर आता नहीं था। इस लिए अब मैंने भी काम शुरू किया। अपने होंठ और जीभ से उसे जवाब दिया। वो सीखने में तेज़ था। तुरंत समझ लिया और दोनों एक लंबी अच्छी किस में खो गए। होंठ से होंठ और जीभ से जीभ मिल गए। हम रस पान करते रहे। मैंने अपनी बांहें उसके गले में डाल दी थी। उसकी बहन मेरी पीठ पर फिर रही थी। मैंने उसे कहा, दोनों हाथों को सिर्फ यूँ ही मत फिराओ, उनसे मुझे तुम्हारी और दबाओ। उसने ज़ोर बढ़ाया। अब मेरे स्टेन और निपल्स उसके सीने से चिपक गए। उसे भी मज़ा आया और उसने ज़ोर बढ़ा दिया। मैं दब जाने लगी। उसे भी आनंद आने लगा। मैं बोल उठी, मुझे क्रश कर दो नरेश, मुझे क्रश कर दो। उसने एकदम ज़ोर बढ़ा दिया…. आह.. क्रश ही कर दिया मुझे। मेरे स्तन तो उसके सीने से दबके मानो चौपट ही हो गए। निप्पल भी अब पिंच कर रही थी। लेकिन बड़ा मज़ा आ रहा था….. आहाहाआआ…. वैसे भी मुझे ये बहुत पसंद है। किसी मर्द की बाहों में क्रश हो के चूर चूर होने का नशा तो कोई औरत ही समझ सके। वो मुझे पिसता रहा, और होंठ चूसता रहा। फिर थोड़ी पकड़ ढीली करके वो होठों को छोड़ के नीचे उतारने लगा। मेरी ठुड्डी पर, फिर गर्दन पर, फिर कंधों पर किस करने लगा। अब उसे कुछ सिखाने की ज़रूरत नहीं थी। उसके अंदर का मर्द जाग उठा था और वो अपना काम जानता था। वो नीचे उतारा और मेरे बेटों को किस करना शुरू किया। वो सहलाता था, दबाता था, मसलता था, खेलता था, चूसता था, निपल्स को मरोड़ता था, और अंत में एक निप्पल मुँह में ले के ज़ोर से चूसने लगा और दूसरे स्टेन को बुरी तरह से मसलने लगा…आउच…मुझे दर्द होने लगा और मैंने दर्द की सिसकारियां भी मारी। लेकिन वो अब कहाँ कुछ सुनाने वाला था। रुको तो भी रुके नहीं। बड़ी बेरहमी से उसने मेरे दोनों बूब्स मसल डालें… आहाहाहाहाआआआआ… मेरे अंग अंग में आग लग गई।!!!!!! बदन गरम हो उठा और उसे चाहने लगा। अब वो किस करते हुए और नीचे उतारने लगा, पर हाथ तो बूब्स पर ही टीका रखे थे। मेरी कमर पर किस करते हुए, जांघों को छूटे हुए, वो मेरी चूत के पास जा पहुंचा। वहां जा के थोड़ा उल्ज़ा और रुका। उसके लिए ये नई चीज़ थी। मैंने प्यार से उसके सर पर हाथ फिराया, अपनी टांगे फैलाई और उसके सर को पकड़कर उसके होंठ को मेरी चूत पर जा ठहाराया। वो किस करने लगा… थोड़ी देर किस की तो मैंने इशारा किया और हम दोनों बिस्तर पर चले गए। अब मैं टांगे पूरी फैला सकी। वो फिर चूत पर गया। मैंने उसे कहा, जीभ से काम लो, होंठ से नहीं। इतना इशारा काफी था। वो शुरू हो गया। मेरी चूत चाटने लगा। मैंने अपने हाथ से मेरे पुसी लिप्स थोड़े फैले के उसकी जीभ अंदर डलवाई। वो सीख गया और उसने मेरे हाथ हटाए और बगडोर फिर संभाल ली। अब वो चूत के अंदर बड़ी सफाई से चाटे जा रहा था। मैं तो पहले ही गरम हो चुकी थी, अब पूरी तरह हो गई। मेरा बदन अब उसके लिए तड़पता था। मुझे उसका लंड चाहिए था, चूत के अंदर। …एक करंट सा उठ रहा था बदन में..मैंने एक कड़क अंगड़ाई ली और उसका मुँह वहाँ से हटाया। उसे अब मेरी बारी है। और मैं जो अब तक लेती थी, उठ बैठी और उसकी चड्डी उतारी। और वाह…..उसका पूरे कद का लंड स्प्रिंग की माफिक बाहर उछल आया……मैंने उसे जड़ों के पास से किस करना शुरू किया, फिर चारों और से किस किया। फिर उसके सिर के पास पहुंचती है। तब दोनों हथेलियों के बीच उसके लंड को ले के उसे रगड़ डाला, जैसे हम लस्सी बनाते समय घूमते हैं। इसका लंड एकदम जल्दी से तैयार हो जाता है……और मुझे भी तो अब चुदाने की जल्दी लगी हुई थी। (नहीं तो मैं आराम से उसका लंड चूसती रहती है) उसका लंड और बड़ा हो गया। मैंने ऊपर की चमड़ी हटाई और उसके गुलाबी सिर को मुँह में ले लिया। थोड़ी देर चूसा और देखा कि इसे कोई ब्लोजॉब की जरूरत नहीं है, तो उस नीचे चूत की और ढकेल दिया। मैं वापस लेट गई। उसे मेरे ऊपर खींच लिया। मैंने पैर चौड़े किए और उसका लंड मेरी चूत पर रख दिया। उसने एक धक्का मारा और लंड अंदर चला गया। आह!!!! इसी के लिए तो यह सारा खेल था… उसने चोदना शुरू किया। लंड काफी बड़ा और गरम था। मैं अंदर कुछ अलग ही महसूस कर रही थी… दर्द भी हो रहा था और मज़ा भी आ रहा था। उसकी स्पीड बढ़ी। मैं चिल्लाने लगी, नरेश आज बुरी तरह चोद मुझे, फाड़ डाल इस रंडी चूत को। छोड़ नरेश छोड़। मेरे मुँह से ऐसे शब्द सुन के वो तज़्ज़ूब हो गया, पर फिर मुस्कुराया और बोला, गभराओ मत, आज नहीं छोड़ूंगा, एक हफ़्ते से मेरी नींद हराम कर रखी है, आज तो चूत फाड़ कर ही रहूंगा। और फिर वो चोदता रहा, चोदता रहा, और चोदता ही रहा। बड़े ज़ोर से चोदा। दो नों को बड़ा मज़ा आया और चुदाई के बाद थक के लेट गए। उसके बाद तो तीन दिन और थे हमारे पास। और अब तो पटाने की बात नहीं थी। हमने सारा समय साथ ही गुजारा। न जाने कितनी बार उसने मुझे छोड़ा। खत्म
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Saturday, 8 August 2026
बहन ने मुठ मारी
नमस्ते.. मैं इस पेज को रोज़ बनाता हूँ और महसूस करता हूँ कि ज़्यादा लोग सच नहीं लिखते.. मज़ा तब है जब आप अपनी सच्ची बात लिखते हैं.. यही वह चीज़ है जो मुमकिन है मगर क्या चीज़ न मुमकिन भी लगती है.. किसी भी तरह, मैं अपनी बात पे वापस आता हूँ.!!
ये बात आज से कुछ महीने पहले की है.. मैं पहले ये बता दूं के मैं और मेरी ब्री बहन जो मुझसे 3 साल ब्री है बचपन से ही काफी फ्रैंक थे.. हम काफी लाते भी थे और एक साथ खेलते भी थे.. मुझे याद है जब मैं स्कूल में था एक दिन उस ने मुझे बिस्तर में मुंह मारते देख लिया था.. मगर हमने ने कभी और कोई ऐसी हरकत नहीं की.. हां हम एक दूसरे को काफी पसंद करते हैं… कॉलेज तक हम काफी फ्रैंक थे मैंने क्या बार अपनी बहन ते बूब्स तो खेल खेल में टच भी किया था मगर ना उस ने इस बात का एहसास होने दिया ना मैंने…!! अब उस की शादी हो चुकी है.. मगर हमारा दोनों का वो लाने का स्टाइल अभी भी वैसा ही है.. वो जब भी हमारे पास आती है तो हम काफी मस्ती करते हैं.. बात उस दिन की है जब हम सब एक रिलेटिव की शादी में मिले.. सारा दिन खूब एन्जॉय किया.. गाना और डांस चलता रहा.. काफी दिन के बाद हमने ने ऐसे मजा किया.. कहीं.. रात को सोने का टाइम हुआ तो जैसे अक्सर ऐसे मक्के पे होता है.. सबके बिस्तर नीचे फरास्फ पीडब्लू ही लगे थे.. इतने लोगों को तो बेड देना मुश्किल था तो हमने भी एक कमरे में नीचे ही बिस्तर लगा रखे थे.. सब थके हुए थे और जैसे किसी को जगह मिली सब फटाफट सोने को अपने बिस्तर में घुसे..!!
मेरी बहन की फैमिली भी सो गई.. मैं भी एक कोने में पहले बिस्तर में घुस गया.. थोड़ी देर बाद मेरी बहन अपना बिस्तर ढूंढती थी, लेकिन कोई बिस्तर खाली नहीं था.. उस ने मेरे साथ वाले बिस्तर पे जिस में मेरी एक आंटी सो रही होती थी, थोड़ी जगह बनाई और लेट गए.. सर्दी का मौसम था.. सब सुकून के सो रहे थे.. कमरे की लाइट भी बंद थी… कुछ देर बाद कई करवा ली तो मेरी बहन मेरी तरफ पीठ करके लेती हुई थी.. मगर उस की पीठ मेरे ठीक पास थी.. मैंने महसूस किया कि शायद मैं उसकी पीठ को छू रहा हूँ, मगर उस ने कोई हरकत नहीं कि.. मेरा मूड बन गया.. मैंने हिम्मत की और थोरा और नजदीक लेट गया.. अब मेरा लंड भी खरा हो गया था और मेरी बहन अच्छे से उसे अपने पीछे लगा मेहसूस कर रही थी मगर अभी भी वो ऐसे लेती थी कि उसे कुछ मालूम नहीं.. मैंने मौके का फायदा उठाया और धीरे से अपना एक हाथ उस की रजाई में से उस की कमर पे रख दिया.. उसने हल्की सी करवा ली और सीधी हो कि लेट गए.. मैं एक्साइट हो रहा था.. कमरे में अंधेरा था सब सो रहे थे.. मेरा मूड बन रहा था.. मैंने अपना हार उस की कमर से नीचे ला के उस के पेट के ऊपर रखा तो उस ने मेरा हाथ पकड़कर लिया और मैं समझ गया कि अब इससे ज़्यादा मुझे कुछ नहीं करने देगी… फिर भी मैंने उसका हाथ पकड़कर लिया और धीरे से उसने अपने लंड पे टच कर दिया.. उस ने जैसा कोई ऐतराज़ नहीं किया.. मेरा लंड पूरा तरह खरा हो गया था.. मैंने जल्दी से अपनी बहन का हाथ अपने अंडरवियर के नीचे डाल दिया.. उसने मेरा लंड छुआ और उसे अपने हाथ में ले कि हिलाने लगे… हम चुप चाप लेते हुए थे मगर उस का हाथ मेरे लंड को मसलता जा रहा था.. ओह इतना सॉफ्ट टच था.. वो जानती थी कि मर्द के लंड को कैसे मसलना है… मैं जैसा किसी नशे में था.. उस ने अब पूरे ज़ोर से मेरी मुठ मारना शुरू कर दिया था.. शायद उस का एक हाथ अपनी चूत को भी छू रहा था मगर मैंने उसे नहीं छुआ.. मेरा लंड मेरी बहन के हाथ में था और वो मेरी प्यास बुझाने के लिए अपना काम करती जा रही थी… जैसे ही मुझे लगा कि मैं डिस्चार्ज होने वाला हूँ.. मैंने अपना लंड पूरे से बाहर निकाल दिया.. वो भी समझ गए… उस ने ज़ोर से मुठ मारना चालू रखा और.. एक ही झटके में मेरा डिस्चार्ज निकल गया.. वो अब भी मेरे लंड को हिलाए जा रही थी.. उस के हाथ में भी मेरा बेचैनी लगा होगा मगर उस ने रजाई के कवर सो हाथ साफ किया और मेरा लंड भी साफ कर के करवा ले सो गए.. यह मेरा पहला ताजुर्बान था कि किसी औरत ने मेरी मुठ मारी हो वो भी मेरी बहन ने… इसके बाद हमने 2-3 बार मिले मगर इस बात का जिक्र नहीं किया.. मेरी तमन्ना है कि मैं किसी दिन अपनी बहन को राजी कर लूं और उस की जी भर के चुदाई करो.. जब ऐसा होगा तो अपनी कहानी जरूर लिखूंगा..!!
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Friday, 7 August 2026
मेरी स्टूडेंट की मुझ से चुदाई
हे दोस्तों जो कहानी में आप लोगों को सुना रहा हूँ वो मेरी एक स्टूडेंट की है और पूरी हकीकत है ……. अगर कोई लड़की या आंटी एमजे एसवाई रबता करना चाहती है तो एमजेईमेल कर सकती है दोस्तों अब मैं कहानी की तरफ आता हूँ जो पूरी हकीकत है वाई 2009 की बात है जब मैनक कॉलेज में कंप्यूटर लैब में रहता था वार्मियन की चॉइस में अक्सर स्टूडेंटफ्री होते हैं और वो कंप्यूटर शॉर्ट कोर्स कराती हैं। हर साल की तरह इस साल कुछ लड़के और लड़कियों ने एडमिशन नहीं लिया। एक लड़की जिसका नाम हुमैराथा था, वह बहुत खूबसूरत थी। उसकी उम्र 20 और उसका कद 5 फीट तकरार होगा। उसके बूब्स का साइज 34 था। मैं आपको अपना बी थोरा सा परिचय करवा दूं मारा कद 5.7″और स्मार्ट हूं लून साइज तकरीबन 7″ इंच है और उम्र 25 है.य लड़की जब बी मैं परहा रहा होता अक्सर एमजे एसवाई बहुत सवाल करती और जब मैं उस तरफ दख कर जवाब देता तो मुस्करा कर मेरी तरफ देखती वो अक्सर छुट्टी होने के बाद लब में बैठती.वो मैं बहुत लाइन डेटी थी अह्सटिया अह्सिता मैं बी उस में इंटरेस्ट लेने लगा. जैसा कप को पता होगा कि शॉर्ट कोर्स में एक दिन लैब और एक दिन लेक्चर होता है जिस दिन लैब होती है वो जान बोझ करके मुझे अपने पास बुलाती है और मुझे समझाती है कि मैं बी जान बोझ करके अपना जिस्म को उस के साथ टच करने लगा थोरे हे दिनों के बाद उसे ना मजे से मनाएगा मैं ना दिना …..फिर किया था उसे ना घर जाते हे माँ कल की और कहाँ कि सर मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा बता दूँ मैं ना उसे फने पा हे समझा दिया …..दोसरी दिन उस ना फिर कल की और कुछ पूछने के बाद मुझे कहाँ कि वो मुझे बहुत पसंद है……मैं ना उसे कहाँ कि वो बाज अ जे लकन वो ना मणि ….कुछ दिन बाद उस ना मजे कहा कि सर मारा कंप्यूटर कुछ खराब है गर आ कर थक करडेन मैं ना उस सी हमी भर ली उस सी पता लिया और मॉडल टाउन में उन के घर उस कडी होय टाइम पहुच गया मैं ना जब बेल दी तो उस ना खुद आ कर दरवाजा खोला वोबत प्यारी लग रही थी उस ना फिरोजाई रंग का खुला गली वाल सूट पहनना होत थौर उस के बूब्स उस की गली सी साफ नजर आ रही थी उस ना ब्रा बी नन्हा पहना था. उस घर में उस हफ्ते कुछ नहीं था वो मुझे सीधा अपने बेडरूम में ले गई और मैंने अपने बिस्तर पर बैठा दिया और खुद मेरी ली ड्रिंक लेन चली गई मैं ना उतनी देर में उस का कंप्यूटर ऑन किया तो वो बिल्कुल थक गया था और उस में सेक्सी सीडी डाली हो गई थी मैं ना उसे कुछ भी पहले चेक करके बाथ गया वो स्प्राइट ली और मेरी पास हे बाथ मैं ना उसे डिसीडी खोल के प्ले कर दी तो उस के सेक्सी सीन चलना शुरू हो गए उस ना मज़ाक में, मैं आपको बहुत पसंद करती हूँ और आप सी चुदवाना चाहती हूँ इस ली प्रोग्राम बना के आपको बुलाया है … मेरी कूद उस पर दिल बिमान हो चुका था उस के कहने किडैर थी मैं ना उसी बिस्तर पर लिटा कर किसिंग कर दी उसे ना ब मारा भर साथ दिया मैं ना उस के दोनों हाथ पकड़कर ओपर कुद लेट गया था और उस होठों की मालिश सी किसिंग कर रहा था वो बहुत सेक्सी हो रही थी ….. और आवाजें निकल रही थीं और साथ साथ कह रही थी सर, मैं खूब प्यार कर रही हूँ मैं बहुत प्यासी हूँ ….अब मैं कमीज का ऑपरेशन सी उस के बूब्स दबा रहा था और वो सिसकारियां ले रही थी …. कुछ ही देर में मैंने उस की कमीज उतार दी और दोस्तों उस के हसीन ममेरे भाई-बहन थे मैं उस के निप्पल अपने महीने में ल्यो और चुनना शुरू कर दिया वो भगदड़ हो गई थी और मेरी छाती उतर रही थी फिर उस ना मेरी पैंट बी उतर दी और मेरे 7 इंच के लंड को हाथ में ल्यो कर खिलाने लगी उस के नारन नरम हाथ मज मस्त कर रही थी …उफ़फ्फ़ हम कोई 15 से 20 मिनट इसी तरह किस करते रहिए इस डोरान वोब एक बार चूत चूत थी और मैं कुछ देर हम फिर नहा के ट्रिपल एक्सएक्सएक्स मूवीदखानी लगी वो दोबारा गरम हो गे और मेरी गांड में आ कर नहा गे हम बिल्कुलनानागे थे मैं ना उस के मम्मी अपने होठों को लेकर चुनना शुरू किया तो कुछ हेडैर मैं मेरा हथियार ब तैयार हो चुका था क्यों कि उस का गांड मेरे लंड का ओपर थिमैन ना उस को बिस्तर पर लिटा कर टांगें उठाई और अपने लंड का टोपा उस की सुलगती होइफुदी पर रखा तो उस ना कहा सिर थार जैन य चूत अब बिल्कुल कंवारी है और साथ हेपरी होय ड्रेसिंग मैन सी करीन निकाल कर अपनी फुद्दी पा बी लगाई और मेरा लंड परब में ना उस की एक टांग उठा कर कैंडी पर रखी और अपने लंड को उस की चूत परखा अब मरे लंड का टोपा ही अंदर गया था कि उस की चीख निकल गई लकिन वो फिर रह रही थी सिर मेरी चूत फटर्रर डालिन मैं उस पा झुका और उस के होठों को अपनों तक लिया और आहस्ता आहस्ता अपना पूरा लंड उस की फुद्दी में दैल दी वो दृढ सिचिला रहि थी लकिन मैं ना उस की आवाज़ दबा ली और कुछ देर उसे किस करने का बदहस्ता आहस्ता अनपनी लंड को उस की चूत मैं अबंदर बाहर करना शूरू कर वह अब उस दिन मज़े कर रहा था और वह अपने पूरे दिन साथ रही थी। 10 सितंबर, 2015 को उसने सेक्स करने के बाद अपनी चूत खो दी और मैं उसके बिना पेशाब कर दिया। हम कोई आधी गांठ लगाते रहे और फिर नहाते रहे। उस दिन मैं जल्दी वापस आ गया। उसके बाद अक्सर मैं उसके घर जाता रहा और हम खूब चुदाई करते रहे। आज कल उससे शादी हो चुकी है। लेकिन फिर अक्सर मुझे बहुत याद आती है। दोस्तों, अपनी रे ज़रूर दिन और मुझे तुरंत ईमेल करें।
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Thursday, 6 August 2026
दोस्त की बीबी की मारी
नमस्ते, आप सबको मेरा नमस्कार। मैं आज आप तो मेरी बीवी की कहानी सुनाऊंगा। अनिल और मैं आपस में फास्ट फ्रेंड हैं। उसकी बीबी संगीता इतनी सुंदर तो नहीं है, लेकिन उसकी गांड मोटी है, जब वो चलाती है तो उसकी गांड ऊपर नीचे होती है तो मेरा लैंड ऊपर खड़ा हो जाता है। मुझे वैसे भी गांड मरना ऊंचा लगता है, क्योंकि मेरी बीबी कुसुम गांड नहीं मरवाती, हल्की उसकी गांड का मुकाबला कोई नहीं कर सकता। अनिल को कुछ कम ही रहता है, इस लिए वो ज्यादा फैक्ट्री में ही रहता है।
एक दिन रविवार की रात को हम अनिल के घर मिलने घाय। आपस में भात करते करते बहुत रात हो गई तो संगीता बोली के मैं चाय लेकर आती हूँ। अनिल सूसू करने बाहर चला गया। संगीता ने अनिल को आवाज़ लगाई कि, अनिल अंदर आकर शुगर का डिब्बा उतार दो। अनिल सूसू करने गया, इस लिया मैंने नीचे चलागया और शुगर का डिब्बा उतारने ने लगाया, वैसे संगीता का पांव फिसल गया और वो एकदम से मेरी बाहों में आकर झूल गई, उसकी छूची पर मेरे दोनों हाथ लग गए और उसकी गांड मेरे लंड से टकरा गई। एक अजीब से हरकत से माने उसकी गांड में अपनी उगाली डाल दी । इस पर वो जो बोली, उस पर मुझे विश्वास नहीं हुआ । वो बोली कि अगर उंगली ही डालनी है तो अच्छी तरह से डालो जो मजा तो आई, इतनी में उसने अपनी सारी ऊंची कर दी और अपनी गांड मारे सामने करती । मैंने भी समय गंवाई उसकी गांड में उंगली और चोट में दूसरी उंगली डाल दे। वो चिल्लाई ।
बाहर आकर हम दोनों चुपचप चाय पीने लगे । करीब दो महीने बाद मेरी कुसुम विंटर ब्रेक में कोटा चली गई और मम्मी उनके आशा राम बापू के आश्रम में चली गई। एक दिन अनिल ने कहा कि यार आज रात तो अंडा-करी की सब्जी खाओगे। मेरी संगीता शाम को एक बार सब्जी बना देगी, तू घर की चाबी संगीता का दे जाना। करीब 4 बजे संगीता मेरे घर आ गई। मैं भी 4.15 बजे पर घर आ गया। मुझे देखकर संगीता मुस्कुराई, मैं समझगायकी आज तू दाल में काला है। संगीता बोली कि अनिल का फ़ोन आया था कि आज काम ज़्यादा है, इस लिया को रात को देर से आएगा और महेश से कहना कि वो हमारा तुम खाना खा लेना।
संगीता के बच्चे भी अपनी नानी के घर चेले गए थे। संगीत बोली की महेश मैनाहकर खाना बनाऊंगी, इस लिया मैंने नहाने के लिए आपका बाथरूम काम में ले रही हूँ। वो बाथरूम में नहाने चली गई, मैंने टीवी पर अपना सीडी प्लेयर लगाकर ब्लू फिल्म देखने लुगाया। थोड़ी देर बाद संगीतनहार बाहर आई तो उसने केवल एक पटला गाउन पहन रखा था, वो बोली कि मुझे गर्मी लग रही है, इसने लिया ये पहना है। गाउन में से उसकी चूची के निप्पल साफ देख रही थी और उसकी चूत तो इतनी क्लीन शेव थी जैसे 18 साल की लड़की, उसकी मोटी गांड का तो कहना ही नहीं था। मैंने संगीता से कहा कि भाभी मैं अलग होकर आती हूँ, और मैं बाथरूम में चला गया। मेरा सीडी प्लेयर चल रहा है।
मैं गबनहार बाहर आया तो संगीता मेरा सीडी प्लेयर देख कर अपनी चूत में उंगली कर रही थी। संगीता बोली कि आप किचन में मेरी हेल्प करवाओ, मैं कहाँ की पहली हम दोनों बिल्कुल नंगे होकर किचन में जाएंगे। संगीता ने अपना गाउन उतार दिया और मैंने भी। इतने में मैंने संगीता को अपनी बाहों में पाकर लिया, वो बोली हाँ आप क्या कर रहे हैं। मेनका की जो करना है। मेरे सिर पर तो उसकी गांड का बहुत सवार था। मैंने वही रसोई में संगीतो को गोरा बना दिया और उसकी गांड को चाटने लगा, संगीता ने हाथ से मेरा लैंड को पकड़कर लिया और बोली कि मैं पहले इसका जूस पिऊंगी। मैंने कहा नहीं पहले मैं तेरी गांड मरूंगा वो बोली नहीं गांड फट जाएगी। मैंने उसकी गांड में बोरोलीन की ट्यूब डालकर पिचका दी, सारी की सारी बोरोलीन उसकी गांड में लग गई, और मैंने अपना 6″ का मोटा लैंड उसकी गांड के मुंह पर लगा दिया। मेरा लैंड देखकर संगीता बोली इतना लंबा / मोटा – लैंड। मैंनेजोर से धक्का मारा और 2″ लैंड उसकी गांड में चल गया, वो चिल्लाई wwwwwwaaaaaa wwww आआ दर्द हो रहा है, मैंनेफिर एक धक्का मारा, इस बार 5″ लैंड उसकी गांड में चल गया। वो संगीता गंदी गंदी गाली बकने लगी, बोली माथेर छोड़, बहन के लोर, तेरी माँ की छुट्टी मारू, मुझे छोड़ दे, या मेरी चूत मार। मेरी गांड तो आज फट ही जाएगी। मैं बोल तेरी गांड मार कर तेरी चूत भी मार दूंगी, लेकिन मां के लोरी ज्यादा लुंडखैगी तो तेरी चूत का बुरता बना दूंगा। मैंने इस बार लैंड को वापस बाहर निकाल कर फिर सरसों का तेल लैंड पर लगाकर एक बार फिर उसकी गांड में घुसा दिया, इस बार पूरा का पूरा लैंड संगीता की गांड में चल गया। और संगीता बोली और जोर से डालो मेरी गांड में। वास्तव में अब मजा आ रहा है। माने आगे की और झुक कर उसकी चूत में अपनी दो उगूंगी डाल दी। इस पराक्रम उसकी गांड में लंड और उसकी चूत में डालूंगी उसको छोड़ता रहा।
10 मिनट बाद संगीता बोली, अब मेरी बारी है मैं तुम्हें खुश करूंगी। उसने मुझे कुर्सी पर बैठाकर मारा लंड को अपने मुँह में दाल के लालीपॉप की तरह छूने लगी, इतना मज़ा मुझे आ रहा था कि मत पूछो।
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