Tuesday, 18 August 2026

माँ का साथ

 मेरा नाम पप्पू है, यानी घर में सब मुझे पप्पू ही कहते हैं। यह कहानी मेरी और मेरी पत्नी की है, तीसरा इंसान कोई और नहीं बल्कि मेरी माँ है। खैर, मैं अपनी कहानी शुरू करता हूँ।

सबसे पहले मैं आपको अपने बारे में बता दूँ, मैं बचपन से ही सेक्स का बहुत भूखा रहा हूँ। मेरी हाइट 5 फीट 10 इंच है, मेरा शरीर मीडियम बना हुआ है। मैं सांवला हूँ और साधारण दिखता हूँ। हमारे घर में सिर्फ़ चार लोग हैं, माँ, पापा, मौसी और मैं। मौसी की शादी एक साल पहले हुई थी।

जब मेरे मम्मी-पापा की शादी हुई थी, तब मेरी माँ सिर्फ़ 16 साल की थीं। अब वो 39-40 साल की होंगी। मैं 21 साल का हूँ, मेरी माँ का नाम रमा है, वो बहुत गोरी हैं, उनका फिगर इस उम्र की मराठी औरत के हिसाब से नॉर्मल है, वो न ज़्यादा मोटी हैं और न ज़्यादा पतली, वो बहुत आकर्षक हैं, मुझे उनकी गांड सबसे ज़्यादा पसंद है। वो भरी हुई है, पीछे देखने पर लगता है कि प्यार हमेशा उनकी गांड पर ही बना रहे। मैं 2 साल से अपनी माँ को चोदने की कोशिश कर रहा था लेकिन मैं ऐसा नहीं कर पाया... हमारे परिवार की हालत खराब थी, मैं पूरे परिवार की उम्मीद था क्योंकि मैं बहुत होशियार था, इंजीनियरिंग में मेरा नंबर आ गया था। लेकिन दूसरे साल के बाद मैं बहुत बिगड़ गया। खैर.....2 महीने पहले मैंने अपनी माँ को पहली बार चोदा था.....उसकी कहानी मैं आपको बताता हूँ....

हमारे घर के हॉल में एक बेड है...मैं उस पर सोता था..अंदर एक बेडरूम है...उस पर पापा सोते थे...मेरे पापा MIDC में काम करते थे तो उनकी शिफ्ट बदलती रहती थी...जब वो काम से वापस आते तो बहुत थके होते थे और वहीं सो जाते थे...हॉल में मेरी माँ बेड से चिपक कर उस पर कंबल ओढ़ कर सोती थी...जब वो सोती थी तो मैं उनके शरीर को देखता रहता था...अनजाने में मैं उन्हें कई बार ऐसे छू लेता था जैसे मुझे शॉक लगा हो..ये सब बहुत पहले शुरू हुआ था पर पिछले 3-4 महीने से मेरी हिम्मत बढ़ रही थी...मैं रात को उन्हें अपनी तरफ पीठ करके सोता था और धीरे-धीरे उनके पास जाकर सो जाता था...क्योंकि मुझे उनकी गांड बहुत पसंद है तो मैं उनकी गांड को छूता था...मैं धीरे-धीरे कुछ सेकंड के लिए उनकी गांड पर अपना प्यार रखता और फिर उठ कर अपने पास चला जाता था जगह..शायद अगर वो जाग भी जाती तो मुझे बिस्तर पर गहरी नींद में सोते हुए देखती.....

एक दिन मैंने हमेशा की तरह अपना हाथ उसकी गांड पर रख दिया....मैंने अपना हाथ थोड़ी देर ऐसे ही रखा...फिर मैं धीरे-धीरे अपने हाथ से उसकी बड़ी गांड दबाने लगा...उसकी तरफ से कोई हरकत नहीं हुई...उस दिन वो शायद बहुत गहरी नींद में रही होगी। फिर मैंने उसे गले लगाया और ऐसे सोया कि मेरा लिंग मेरी नाइट पैंट के ऊपर से ही उसकी गांड में ठीक से फिट हो जाए...बहुत अच्छा लग रहा था...मेरा लिंग बहुत कड़ा हो गया था..उसकी गद्दे जैसी मुलायम गांड के स्पर्श से मेरे लिए अपने प्यार को कंट्रोल करना मुश्किल हो रहा था..मैंने अपना लिंग थोड़ी देर ऐसे ही रखा और उससे चिपक कर सो गया...वो अभी जागी नहीं थी, फिर मैंने अपना लिंग उसकी गांड में थोड़ा सा दबाया और ठीक से सेट किया और ऊपर से शॉट मारने जैसा करने लगा,...कुछ ही सेकंड में मेरा दम घुट गया..क्योंकि मैं पहली बार किसी औरत के शरीर का मज़ा ले रहा था..मैं अपनी मुट्ठियों से बहुत खुश था जिसे मैं सालों से चोद रहा था, लेकिन इतनी सेक्सी माँ के सामने, तुरंत सो गया. खैर.... उसके बाद वो थोड़ा हिली.. शायद उसे मेरा झटका महसूस हुआ... मैं तुरंत उसके ऊपर से हट गया और बिस्तर पर जाकर सो गया.. उस दिन के बाद मैं हर दिन ऐसे ही उसके शरीर का मज़ा लेने लगा... सुबह मैं फिर से नॉर्मल बर्ताव करता था... पर एक दिन मेरे पापा गाँव गए हुए थे... घर पर सिर्फ़ मैं और मम्मी ही थे.... उस रात मैं अपने लैपटॉप पर मूवी देख रहा था... रात के 10:30 बजे होंगे... मम्मी ने कहा कि तुम अंदर वाले कमरे में सो जाओ.. मैं बाद में हॉल में सो जाता हूँ पर मैंने कहा नहीं मैं हॉल में सोता हूँ और हम हमेशा की तरह हॉल में ही सो गए... उस रात मैंने 1:30 बजे तक मूवी देखी और फिर हमेशा की तरह मम्मी को देखा... बहुत सेक्सी लग रहा था... मेरा लवर सलामी देने लगा फिर लाइट बंद करके फिर से उसके शरीर का मज़ा लेने लगा.. उस रात बिना टाइमपास किए मैंने सीधे अपना हाथ उसकी गांड पर रखा और चेक किया कि वो जागी तो नहीं है..... फिर मैंने अपना डंडा निकाला और उसकी गांड पर रख दिया... मुझे स्वर्गिक सुख मिल रहा था... पर चूँकि आज घर में कोई नहीं था तो मैं पता नहीं क्यों, पर मैं अगला कदम कुछ करना चाहता था...फिर मैंने तय किया कि आज जितना हो सके माँ के साथ मज़ा लूँगा...देखता हूँ क्या होता है...मैंने अपना लिंग उसकी गांड में हिलाना शुरू किया...मैं यह बहुत देर तक कर रहा था..मेरी स्पीड रोज़ से ज़्यादा थी और मैं आज रोज़ की तरह ध्यान से नहीं कर रहा था...काफ़ी देर बाद मुझे उसकी हरकत महसूस हुई...मैं अपनी जगह पर जाकर सो गया..पर शायद उसे आज अपनी गांड में कुछ गड़बड़ लगी, इसलिए वह अचानक उठी और इधर-उधर देखने लगी...ज़रूर उसने मुझे सोते हुए देख लिया होगा...वह थोड़ी देर ऐसे ही बैठी रही और फिर बाथरूम चली गई...बाथरूम से आने के बाद वह वापस आकर सो गई...इधर मैं आज खुश नहीं था...आज मेरी इच्छा काफ़ी नहीं थी...मैंने थोड़ी देर उसके सोने का इंतज़ार किया और फिर से अपना लिंग बाहर निकाला और उसके स्तनों को देखने लगा...इस बार वह मेरी तरफ़ मुँह करके सो रही थी..मैं उसके पलटने का इंतज़ार कर रहा था पर वह काफ़ी देर से ऐसे ही सो रही थी...मैं 

मैं उसके होंठ देख रहा था...बहुत अच्छा लग रहा था..उसका खूबसूरत चेहरा देखकर, मुझे लगा कि किसी दिन मेरी माँ मेरी पत्नी बनेगी...मैं कंट्रोल खो रहा था..मैंने अपनी उंगली से उसके होंठ छुए...लेकिन फिर मेरा मन किया कि उसे किस कर लूँ...फिर सोचते हुए, मैंने अपना मुँह उसके मुँह के पास ले जाकर अपने होंठ उसके होंठों पर रख दिए..उसकी तरफ से कोई रिस्पॉन्स नहीं आया..फिर मैंने उसे किस करना शुरू कर दिया...कुछ सेकंड हुए होंगे जब उसने अपनी आँखें खोलीं और मुझे ज़ोर से एक तरफ़ धकेल दिया..."पप्पू, तुम्हें शर्म नहीं आती...तुम्हें क्या हो गया है...माँ के साथ ऐसी हरकतें करने का.." वह रोने लगी...मुझे समाज में कुछ नहीं पता था या क्या करना है...वह कह रही थी कि मेरे साथ ऐसा कैसे हो सकता है...वह बहुत रो रही थी...मैं उसके पास गया और कहा "माँ, मैं क्या कहूँ...आप बहुत खूबसूरत दिखती हैं और मुझे आपके अलावा कोई पसंद नहीं है...मैं खुद पर बहुत कंट्रोल करता हूँ लेकिन हर रात आपको देखकर भी मुझे कुछ महसूस होता है..और आप जानती हैं कि मैं कितना बूढ़ा हो गया हूँ..माँ, मुझे बहुत बुरा लगता है लेकिन मैं क्या करूँ...आप मुझे अट्रैक्ट करती हैं...बताओ मुझे क्या करना चाहिए "माँ थोड़ी देर ऐसे ही बैठी रहीं..फिर बोलीं,"पप्पू सच बताओ, मुझे बहुत पहले से पता था कि तुम रात में मेरे साथ ऐसा करते थे..तुम्हें क्या लगता था कि मैं सो रही हूँ..नहीं..लेकिन तुम कहते थे कि इस उम्र में आज बंद हो जाएगा, कल बंद हो जाएगा...बाद में ये सब बढ़ता गया तो मैंने तुमसे बात करने का सोचा लेकिन मुझे सही टाइम नहीं मिल पा रहा था...और आज आखिरकार मेरा सब्र जवाब दे गया....एक बार बताओ कि तुम मेरे साथ क्या करना चाहते हो...आज घर पर कोई नहीं है, जो करना है करो लेकिन मैं फिर से ऐसा बिहेव नहीं करना चाहती.." यह सुनकर मैं चौंक गई....मैंने सोचा और कहा माँ मैं बस एक बार तुम्हारे साथ पति-पत्नी की तरह रहना चाहती हूँ..." "पप्पू..तुम इतने बिगड़ कैसे गए...तुम्हें ये कहते हुए थोड़ी शर्म नहीं आई" "तुमने कहा तो मैंने कहा...माँ बस एक बार प्लीज़...प्लीज़.....मुझे करने दो" "पप्पू क्या तुम मुझे पूरा पागल कह रहे हो रंडी?"

"हाँ"

"यह कैसे हो सकता है, तुम मेरे बेटे हो..और मुझे लगा कि तुम बस मेरे शरीर पर हाथ फेरना चाहोगे और एक औरत के शरीर का थोड़ा मज़ा लेना चाहोगे इसलिए मैंने कहा कि...."

"माँ मुझे बस एक बार पूरा मज़ा लेने दो...अगर मेरी इच्छा पूरी हो गई तो मैं दोबारा ऐसा नहीं करूँगा प्लीज़"

"पप्पू मैं तुम्हारे लिए खुली रहूँगी लेकिन ऊपर से जो चाहो करो मैं तुम्हें चोदने नहीं दूँगी.."

"माँ..ठीक है..यहाँ बिस्तर पर आओ...लेकिन जो भी करो पूरे दिल से करो..भूल जाओ मैं तुम्हारा बेटा हूँ। मुझे तुमसे अच्छा रिस्पॉन्स चाहिए"

"ठीक है लेकिन सिर्फ़ ऊपर से... प्रॉमिस करो और ऐसा कभी किसी और के साथ नहीं करोगे.."

"ठीक है.. प्रॉमिस ... अब तुम यहाँ आओ..."

मॉम उठीं और बेड पर आ गईं.. मैं उनके और पास गया और उन्हें अपनी बाहों में लेकर सो गया... मैंने उनकी गर्दन को किस करना शुरू कर दिया... मैं उनके ऊपर सो गया और पागलों की तरह उनकी गर्दन और गालों को किस कर रहा था... मैंने उनसे कहा "मॉम मैं तुम्हें लिप किस करना चाहता हूँ.. करूँ?.." उन्होंने हाँ कहा और मैंने अपने होंठ उनके होंठों पर रख दिए लेकिन वो अपने होंठ नहीं खोल रही थीं.. फिर मैंने उनसे कहा.."मॉम मैंने तुमसे रिस्पॉन्स देने के लिए कहा था.."

फिर उन्होंने अपने होंठ खोले और मैं उन्हें पूरे दिल से किस कर रहा था... वो बहुत अच्छा रिस्पॉन्स दे रही थीं... कुछ देर बाद उन्होंने अपने हाथ मेरे चारों ओर रख दिए.. मैं अभी भी अपना मुँह उनके मुँह में डालकर उन्हें किस कर रहा था... वो भी खतरनाक रिस्पॉन्स दे रही थीं.. हम दोनों हॉलीवुड मूवी की तरह किस कर रहे थे... फिर मैं उनके ऊपर से उठा और अपनी टी-शर्ट उतारी और उनसे कहा "मॉम अपनी साड़ी और ब्लाउज मत छोड़ो..." वह उठी और अपना ब्लाउज उतारने लगी..उस समय उसने कहा "आप बहुत अच्छी तरह से किस कर रहे हैं। तुमने ये सब कहाँ से सीखा.."

"मॉम, देखो...मैंने और क्या सीखा?"

उन्होंने अपना ब्लाउज़ पहले ही उतार दिया था, उन्होंने ब्रा नहीं पहनी थी...मैंने उन्हें पास लिया और अपना मुँह फिर से उनके मुँह में डाल दिया...मैंने उनके बॉल्स को रगड़ना शुरू कर दिया...मैंने उन्हें अपने मुँह में लेकर चूसना शुरू कर दिया...अब वो कराह रही थीं...यह देखकर कि वो एक्साइटेड हैं, मैं उन्हें बार-बार किस कर रहा था, बीच-बीच में मैं उनके बॉल्स को रगड़ रहा था...मैं उन्हें पागलों की तरह किस कर रहा था...उनकी कराहें बढ़ती जा रही थीं...मैंने नीचे जाकर उनकी साड़ी खोल दी...मैंने उनकी स्कर्ट भी खोलकर खींच दी...अब मेरी माँ मेरे सामने थीं...सिर्फ निकर में...वो एक परी जैसी लग रही थीं...उनके बड़े-बड़े ब्रेस्ट...उनका नंगा शरीर देखकर मुझे कुछ समझ नहीं आया...."मॉम, आप बहुत, बहुत सेक्सी हैं...आपकी खूबसूरती देखकर मैं पागल हो गया हूँ..."

फिर वो उठीं...उन्होंने अपनी निकर उतारी और मुझे अपनी पुसी दिखाई और कहा, देखो...तुम यहीं से इस दुनिया से निकली हो।" मैंने उसकी चूत को देखा और तुरंत उसकी चूत को चूमना शुरू कर दिया, वो और ज़्यादा आवाज़ करने लगी...मैं उसे और भी ज़्यादा उत्तेजित कर रहा था...वो मेरा मुँह अपनी चूत में दबा रही थी...फिर मैं फिर से ऊपर गया और उसके बॉल्स को अपने मुँह में लेने लगा...फिर मैंने कहा..."अपनी पैंट उतारो...मुझे भी तुम्हारा बेकार लंड चाहिए..."

मैंने तुरंत अपनी पैंट उतारी और अपना लंड उसके सामने किया, उसने मेरा लंड देखा और उसे अपने हाथ में लिया और रगड़ने लगी...मेरा लंड ऐसे ही सख्त हो रहा था...तुम्हारा लंड कितना बड़ा और मोटा है...जब मैं जवानी में इसे देखती थी...तो ऐसा था..."

वो मेरा लंड रगड़ रही थी और मैंने उसे उसके मुँह पर रखा और फिर से चूमने लगा...मैं अपना लंड उसकी चूत के करीब लाया और धीरे से डालने की कोशिश की...उसने कहा "नहीं पप्पू..इसे मत डालो.."

"प्लीज़ माँ...बस एक बार..." तो मैंने फिर से उसे लिप किस करना शुरू कर दिया...मैंने अपना लंड उसकी चूत पर रखा और इससे पहले कि वो कुछ कह पाती, मैंने उसकी चूत में डाल दिया..वो धीरे से चिल्लाई...क्योंकि उसकी चूत पूरी तरह गीली थी, वीर्य...सीधे अंदर चला गया...उसकी मेरी गरम चूत अब मज़े से भर चुकी थी... पिछले दो सालों का मेरा सपना आज सच हो रहा था... मैं अपनी माँ को चोद रहा था... मैंने ज़ोर-ज़ोर से शॉट मारना शुरू कर दिया... उसकी सिसकारियाँ बढ़ती जा रही थीं..."धीरे कर... दर्द हो रहा है... पप्पू धीरे कर...."

लेकिन मैं रुक नहीं रहा था, मेरा कड़ा लंड अभी भी चल रहा था.. वो धीरे-धीरे चिल्ला रही थी... वो कह रही थी.. "तेरा बहुत बड़ा है... मेरा फट जाएगा... धीरे कर..."

लेकिन मैं बस उसे मज़ा देने की कोशिश कर रहा था... मैं उसे ज़ोर-ज़ोर से रगड़ रहा था... 3-4 मिनट बाद उसकी आवाज़ बदल गई... अब उसे मज़ा आ रहा था..."अंदर डाल दे... आज जो मज़ा करना है कर ले..."

"पप्पू... ज़ोर-ज़ोर से कर... मुझे चालू कर दे.."

10 मिनट बाद वो झड़ गई लेकिन मैं अभी भी चालू था... कौन जाने लेकिन आज मेरा स्टैमिना बहुत ज़्यादा था... भले ही वो शांत हो गई, मैं ज़ोर-ज़ोर से शॉट मारता रहा... कुछ सेकंड बाद मेरा बट गलाल... मैंने अपना रस उसकी चूत में छोड़ दिया और उसके ऊपर गिर गया.. हम दोनों थक चुके थे... इस पूरे समय वो भी अपनी गांड हिला रही थी ज़ोर-ज़ोर से..इस वजह से वो भी बहुत थक गई थी...मैं कुछ देर ऐसे ही उसके ऊपर लेटा रहा...फिर मैं एक तरफ़ मुड़ा और उसके शरीर पर हाथ रखकर उसे अपने पास खींचकर कहा "थैंक्स मॉम....आप बहुत अच्छी हैं...आप जैसी सेक्सी और खूबसूरत हैं....आई लव यू मॉम.."

"मैं भी तुमसे प्यार करता हूँ बेटा, तुम्हारे पापा ने मुझे कई सालों से ऐसी खुशी नहीं दी थी..मुझे भी बहुत मज़ा आया..तुम्हारे प्यार में जादू है..तुम अपनी बीवी को बहुत खुश करोगे.."

"मॉम, क्या तुम्हें सच में खुशी हुई?"

"हाँ सर..." .........उसने मेरा लवर हाथ में लिया और कहा.."मैं इसमें हूँ"

"मॉम, अगर तुम सच में मेरे लवर को इतना पसंद करती हो, तो उसे तुम्हें दोबारा चोदने का मौका कब मिलेगा?"

"जब भी तुम कहो!"

"अब तुम क्या सोचती हो?" "बेशक तुम्हारी रानी भी तुम्हारे लिए तैयार है......"

उसके बाद मैंने उसे रात में फिर से तीन बार चोदा.....

उस दिन के बाद हम रोज़ सेक्स करते हैं जब भी हमें टाइम मिलता है...वह अब मुझे अपना पति मानती है...आजकल जब घर पर सिर्फ़ वह और मैं होते हैं, तो वह मंगलसूत्र नहीं पहनती...वह कहती है अब तुम मेरे पति हो..जल्दी मुझसे शादी कर लो..."

हम दोनों बहुत खुश हैं....माँ सेक्स से और उसके साथ पत्नी की तरह रहने से खुश नहीं है...

खैर...हमारी कहानी में आगे क्या होता है, यह अगले पार्ट में होगा....


(यह कहानी सभी मराठी माँओं के लिए है...मैंने माँ और बेटे के सेक्स के बारे में बहुत सर्च किया है लेकिन इंटरनेट पर बहुत कम कहानियाँ हैं, इसलिए मैंने सोचा कि मुझे कहानी पोस्ट करनी चाहिए....यह मेरी असली कहानी है....90% सच्ची और 10% बदली हुई..लेकिन ऐसा इसलिए है क्योंकि मुझे लिखने का कोई एक्सपीरियंस नहीं है। कमेंट्स और सजेशन वेलकम हैं।

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Monday, 17 August 2026

तहानलेल्या यौवन ची कथा

 नमस्कार मित्रांनो, मी माझी सेक्स स्टोरी घेऊन आलो आहे. आजची गोष्ट माझ्याबद्दल आणि माझ्या वहिनी सिमरनबद्दल आहे. चला तर मग सुरुवात करूया.


मित्रांनो, माझं नाव अमन आहे. मी २६ वर्षांचा आहे आणि माझा एक छोटा व्यवसाय आहे. माझी उंची ५ फूट ११ इंच आहे आणि माझे लिंग ७ इंच लांब आहे. मी माझ्या कॉलेजच्या दिवसांमध्ये अनेक मुलींसोबत सेक्स केला होता, पण माझा व्यवसाय सुरू केल्यापासून मला दुसऱ्या कशासाठीच वेळ मिळाला नाही. या गोष्टीत, मी तुम्हाला सांगेन की मी माझ्या वहिनीला तिच्यासोबत सेक्स करून कसे संतुष्ट केले. चला तर मग सुरुवात करूया.


माझ्या कुटुंबात माझे आई-वडील, मी आणि माझा मोठा भाऊ होतो. गेल्या वर्षी, जेव्हा माझ्या मोठ्या भावाच्या लग्नाची चर्चा सुरू होती, तेव्हा आम्ही सर्वजण एक मुलगी बघायला गेलो. तिथे मी पूजाला पाहिले, जिच्यासोबत मी एकदा वेश्येसारखा सेक्स केला होता. मग मला कळले की आम्ही जी मुलगी बघत होतो ती पूजाची मोठी बहीण होती. तिचे नाव सिमरन होते.


माझ्या भावाला सिमरन आवडली आणि लग्न ठरले. सिमरन खूप सुंदर होती. तिची उंची ५ फूट ६ इंच होती, ती गोरी होती आणि तिची शरीरयष्टी आकर्षक होती. काही दिवसांतच माझ्या भावाने सिमरनशी लग्न केले आणि ती माझी वहिनी झाली.


आता, मला काळजी वाटत होती की माझ्या वहिनीला पूजासोबतच्या माझ्या अफेअरबद्दल कळेल. मग, जेव्हा मी तिच्याशी बोलायला लागलो, तेव्हा माझ्या लक्षात आलं की तिला याबद्दल काहीच कल्पना नव्हती. यामुळे मला खूप बरं वाटलं.


वेळ निघून गेली, आणि सहा महिने उलटले. सिमरन वहिनी आणखी सेक्सी झाली होती. ती घरी लेगिंग्ज आणि सूट घालायची, ज्यामुळे तिची फिगर स्पष्ट दिसायची. पण मी तिच्याबद्दल कधीच वाईट विचार केला नाही, कारण ती माझी वहिनी होती. पण मग एक दिवस, सगळं काही बदललं.


एक दिवस, संपूर्ण कुटुंबाला एका कार्यक्रमाला जायचं होतं. त्या दिवशी माझी एका क्लायंटसोबत मीटिंग होती, म्हणून मी जायला नकार दिला. जेव्हा सगळे तयार होऊन निघायला लागले, तेव्हा भैया अचानक म्हणाला की सिमरन वहिनीची तब्येत बरी नाही आणि ती येणार नाही.


मग भैया आई-वडिलांना घेऊन निघून गेला. मी बाहेर असताना वहिनीची काळजी घ्यायला त्याने त्यांना सांगितलं. वहिनीने औषध घेतलं आणि आराम केला, तर मी ऑफिसला गेलो. संध्याकाळी, मी मोकळा झालो आणि घरी परत आलो.


माझ्याकडे घराची दुसरी चावी होती, म्हणून मी स्वतःच दार उघडून आत आलो. मग मी वहिनीची विचारपूस करण्यासाठी थेट तिच्या खोलीत गेलो. बाहेर पोहोचल्यावर मी दारावर टकटक केली. आतून वहिनीचा आवाज आला:


वहिनी: आत ये, अमन. दार उघडं आहे.


मी दार उघडून आत गेलो. आत शिरताच मी थक्क झालो. सिमरन वहिनी लाल रंगाची ब्रा आणि पँटी घालून पलंगावर पडून माझ्याकडे एकटक पाहत होती. मी पटकन माझा चेहरा दुसरीकडे वळवला आणि म्हणालो:


मी: सॉरी वहिनी, मला वाटलं तुम्ही मला आत यायला सांगितलंत.


वहिनी: तू बरोबर ऐकलंस, अमन. मीच तुला आत यायला सांगितलं होतं.


याने मला आणखीच आश्चर्य वाटलं आणि मी म्हणालो:


मी: पण वहिनी, तुम्हाला हे आवडतं?


वहिनी पलंगावरून उठून माझ्या जवळ आली. तिची मादक आकृती पाहून माझ्या हृदयाची धडधड वाढली आणि तिच्या शरीराच्या सुगंधाने मी धुंद झालो. मग वहिनी म्हणाली:


वहिनी: मी पूजाकडून तुझं खूप कौतुक ऐकलं. ती म्हणाली की तू तिला खूप आनंद दिलास. अमन, मलाही थोडी मजा दे.


मी (आश्चर्यचकित होऊन): तुम्हाला पूजा आणि माझ्याबद्दल माहिती आहे का?


वहिनी: हो.


मी: पण वहिनी, तुम्ही माझ्या वहिनी आहात. मी तुमच्यासोबत हे सगळं करू शकत नाही.


वहिनी: का? मी सेक्सी नाही का?


मी: नाही, तो मुद्दा नाहीये. पण हे माझ्या भावाची फसवणूक होईल.


वहिनी: आणि तुझ्या भावाने माझ्याशी केलेल्या विश्वासघाताचं काय?


मी: कसला विश्वासघात? 

वहिनी: या सगळ्या महिन्यांत त्याने मला एकदाही संतुष्ट केले नाही. ही सुद्धा फसवणूकच आहे. आता एकतर तू मला संतुष्ट कर नाहीतर मी तुझ्या भावाला घटस्फोट देईन.


हे ऐकून मला वाटले की जर आपला घटस्फोट झाला, तर माझा भाऊ पूर्णपणे खचून जाईल. आणि मला तर नेहमीच सेक्सची भूक लागलेली असते. म्हणून मी वहिनीला संतुष्ट करायचे ठरवले. मग मी पटकन माझा हात वहिनीच्या उघड्या कमरेवर ठेवला, तिला माझ्याकडे ओढले आणि माझे ओठ तिच्या ओठांवर दाबले.


वहिनीचे ओठ किती सुंदर, रसरशीत होते आणि तिची कंबरही किती सुंदर होती. तिचे ओठ चोखत असताना, मी माझे हात तिच्या कमरेवरून तिच्या नितंबांपर्यंत नेले. वहिनीची त्वचा किती मऊ होती. तिला झवत असताना, मी तिची पॅन्टी खाली ओढून काढली.


वहिनीची स्वच्छ दाढी केलेली योनी माझ्या डोळ्यांसमोर होती. तिची फिकट तपकिरी योनी पाहून, मी तिला हळूवारपणे कुरवाळले. यामुळे वहिनीच्या तोंडातून एक किंकाळी बाहेर पडली. तिची योनी अगदी कुमारीकेसारखी घट्ट होती. ते पाहून मला समजले की वहिनी समाधानी का नव्हती.


मग मी गुडघ्यावर बसलो आणि वहिनीची योनी चाटू लागलो, आणि वहिनी माझं वीर्य तिच्या योनीत दाबू लागली. तिच्या योनीतून खूप द्रव गळत होता, ज्यावरून ती किती भरलेली होती हे दिसत होतं.


थोड्याच वेळात, तिने वीर्य बाहेर टाकलं, आणि मी ते सगळं पिऊन टाकलं. मग मी वहिनीला पलंगावर ढकललं आणि माझे कपडे काढू लागलो. तिनेही तिची ब्रा काढली. नग्न झाल्यावर, मी तिच्यावर चढलो आणि तिचे स्तन चोखू लागलो.


माझं लिंग तिच्या योनीला लागत होतं, जे वहिनी तिची गांड वर उचलून आत घेण्याचा प्रयत्न करत होती. मग वहिनीने खाली वाकून माझं लिंग तिच्या योनीच्या तोंडाशी ठेवलं, आणि मी लगेच ते आत ढकललं, अर्धा भाग आत घातला.


वहिनी किंचाळली आणि तिने तिची नखं माझ्या दंडात रुतवली. पण दुसऱ्यांदा जोर लावून, मी माझं लिंग पूर्णपणे आत ढकललं. ती वेदनेने विव्हळू लागली, पण मी ते आतच ठेवलं आणि तिला चोखत राहिलो.


मग, जेव्हा तिला थोडं बरं वाटू लागलं, तेव्हा मी तिला झवायला सुरुवात केली. वहिनीच्या योनीतील भरपूर द्रवाने लिंग लवकरच पूर्णपणे ओले झाले आणि ते सहजपणे आत-बाहेर होऊ लागले. आता वहिनी 'आह आह' म्हणत मजा घेत होती आणि मला तिला आणखी जोरात झवायला सांगत होती.


मी त्याच स्थितीत अर्धा तास वहिनीला झवले. यादरम्यान, तिचे ३ वेळा स्खलन झाले होते. मग मी माझे लिंग तिच्या योनीतून बाहेर काढले आणि हाताने ते हलवू लागलो. वहिनीने पटकन तोंड उघडले आणि माझ्यासमोर आली, आणि मी माझे वीर्य तिच्या तोंडावर ओतले.


अशा प्रकारे आमच्या नात्याची सुरुवात झाली, जे अजूनही सुरू आहे. जर तुम्हाला ही सेक्स स्टोरी आवडली असेल, तर कृपया तुमचा अभिप्राय द्या.

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सौतेली माँ की चुदाई-2

 प्यारे पाठकों, कहानियाँ पढ़ने वाले सबको भीगी चूत और खड़े लंड का प्यार। मैं कृपा, उम्र 20 साल और बदन का रंग एक-दम गोरा। मेरी हाइट कुछ 5’5″ की है और वज़न 55kg का होगा। पर बदन पूरा भरा हुआ है। मेरा फिगर 36-30-34 का है।


ये मेरी पहली कहानी है। तो उम्मीद करती हूँ आप सबका प्यार भर-भर के मिलेगा मुझे। मेरी पहली कहानी ही मेरे एक दोस्त और उसकी सौतेली माँ की है। बहुत चुदाई भरी कहानी है, आप सब एन्जॉय करना। अब शुरू करते हैं कहानी के आगे का पार्ट।


जब करीब रात के 2 बजे मेरी नींद खुली, तो मेरा एक हाथ माँ के पेट पर था, और एक तंग माँ के कूल्हे पर थी। इस वजह से मेरा लंड उठान मारने लगा था।


फिर मैंने अपनी आँखें बंद करके सोने का नाटक करते हुए माँ के दूध पर हाथ रख दिया। फिर मैक्सी के ऊपर से ही धीरे से उनके दूध को दबाने लगा।


मेरे ये करने पर जब माँ ने कोई हरकत नहीं दिखाई, तो मैंने भी माँ की चुचियाँ और ज़ोर-ज़ोर से दबाने लगा।


पर मेरे इतने ज़ोर से दबाने की वजह से माँ की नींद खुल गई। इससे मुझे बहुत डर लगा। उन्होंने मेरी तरफ देखा और मेरे हाथ और पैर अपने ऊपर से हटा दिए और सो गई। पर मैंने भी फिर से कुछ टाइम अपने हाथ से माँ के कूल्हे को सहलाने लगा। इस बार भी माँ ने मेरा हाथ पकड़ा और खुद से अलग कर दिया और सो गई।


लेकिन अब मैं कहाँ सोने वाला था। इसलिए मैंने अपना लंड बहुत हिलाया और पूरा पानी निकाल कर माँ के पैरों पर मैक्सी के ऊपर निकाल कर सो गया।


जब मैं सुबह उठा तो बहुत डर रहा था कि रात की बात के कारण माँ मुझ पर गुस्सा होकर पापा से सब ना कह दे। लेकिन माँ ने कुछ नहीं किया।


मैं तैयार होकर यूनिवर्सिटी के लिए निकल गया। अब मैं माँ को छोड़ना चाहता था। सारा दिन उसी के बारे में सोचता रहा। दोपहर में फिर मैं यूनिवर्सिटी से निकलकर मंदिर में पापा के पास पहुँच गया उनसे मिलने। वहाँ मैंने पापा के साथ खाना खाया और थोड़ा आराम भी किया।


फिर पापा ने मुझे कुछ पैसे दिए और कुछ मिठाई दी घर लेकर जाने के लिए। वो सब कुछ लेकर मैं 4 बजे वहाँ से निकल गया।


घर जाते हुए मैंने अपनी बाइक एक मेडिकल दुकान पर रोकी, और वहाँ से मैंने चॉकलेट फ्लेवर वाले कंडोम का पैकेट, जापानी तेल, वियाग्रा की टैबलेट का पैकेट और गर्भ निरोधक टैबलेट ये सब खरीदे।


ये सब चीज़ें लेकर मैं घर पहुँच गया। मैंने पैसे और मिठाई वाला बैग माँ को दे दिया। फिर मेडिकल दुकान से लिया हुआ सारा सामान छुपा कर रख दिया।


फिर शाम को मैं अपने दोस्त के साथ बाहर चला गया। हम लोग गाँव में रहते हैं, तो वहाँ शाम में सब लड़के मिल कर कुछ न कुछ खेल खेलते हैं।


बारिश के मौसम में खेतों में पानी भर जाता है। तब हमें कबड्डी खेलने में बहुत मज़ा आता है। जब खूब खेलकर हम गंदे हो जाते हैं तो नदी में जाकर नहा लेते हैं।


उस दिन भी हमने ये ही सब किया और शाम के 7 बजे मैं फिर अपने घर आ गया। घर आकर मैंने कपड़े बदले और वही शॉर्ट्स और बनियान पहन लिए।

माँ ने हम दोनों के लिए खाना बनाया और खाना खाकर मैं पढ़ने बैठ गया। माँ ने भी अपने काम करने के बाद वही उनकी मैक्सी पहनी और बिस्तर पर ले गई।


रात के करीब 12 बजे मैंने अपनी किताबें रखीं और चुपके से उठकर माँ को देखने लगा कि वो सोई थी या नहीं? माँ सो चुकी थी। फिर मैंने दबे पैर जाकर कंडोम और वियाग्रा वाला पैकेट उठाकर अपने तकिये के नीचे रख दिया।


उसके बाद मैंने कमरे की लाइट बंद कर दी। फिर रजाई में घुसकर माँ से चिपक गया। जैसे ही मैं माँ से चिपका, तो माँ की गांड मेरे लंड से टच हो गई। उसके कारण मेरा लंड खड़ा होने लग गया।


करीब आधे घंटे बाद मैंने अपनी शॉर्ट्स और बनियान उतार दी। फिर कंडोम का पैकेट खोलकर एक कंडोम अपने खड़े लंड पर चढ़ा दिया अच्छे से। माँ तभी सीधे होकर लेती हुई थी। तो मैंने आहिस्ता-आहिस्ता उनकी मैक्सी ऊपर खिसका दी।


मुझे माँ की चूत दिखाने लगी थी। उनकी चूत पर इतने बड़े-बड़े बाल थे कि मुझे चूत का छेद दिखा ही नहीं। यह सब होने की वजह से मेरा मूड चला गया। फिर मैंने बस अपने लंड को हिलाकर शांत कर दिया, और पानी निकला हुआ कंडोम निकालकर साइड में रख दिया। पर तभी क्यों पता नहीं मैंने माँ का हाथ पकड़ा और अपने लंड पर रख कर सो गया। जब सुबह मेरी आँखें खुली तब मैंने देखा माँ मेरी तरफ पीठ करके सोई हुई थी। उनकी मैक्सी अभी भी उनके पेट तक उठी हुई थी, जिससे उनकी गोरी गोल-गोल गांड मुझे साफ दिखा रही थी।


जितनी माँ की चूत जंगल में खोई हुई थी, उतनी ही उनकी गांड गुलाबी और गोल दिखा रही थी। माँ की गांड देख मेरा लंड फिर से उछाल मारने लगा था। मैं फिर से लंड को लेके हिलाने लगा। अबकी बार मैंने लंड का पानी माँ की गांड पर निकाल कर डाल दिया। उसके बाद फिर से सोने का नाटक करने लगा।


कुछ देर बाद जब माँ उठी और उन्होंने खुला लंड और उनकी गांड पे पानी देखा तो बहुत शॉक हो गई थी। वो तो सोचने लगी थी कि मैंने उनकी नींद में गांड मार ली।


माँ ने जल्दी से उनकी गांड पे पानी साफ किया, और मेरे पास आने लगी। मैं उस वक़्त बहुत डर गया था। मुझे लग रहा था अब तो मैं गया। पर तभी मैं शांति से बिना हिले ले रहा था, और एक-दम थोड़ी सी आँखें खोल कर माँ को देख रहा था।


माँ मेरे पास आई और उसने मेरे लंड पर नज़र डाली। फिर बिना छुए मुझ पर कंबल डाल कर चली गई। मुझे मन में बहुत डर लग रहा था और यही सोच रहा था कि अगर माँ ने गुस्से में पापा को यह सारी बात बता दी तो?


जब माँ किचन में अपना काम करने लगी। तब कुछ देर बाद उठकर मैं नहाकर नाश्ता करने बाहर आ गया। जब मैंने नाश्ता कर लिया, तब माँ मेरे पास आई और मुझे एक थप्पड़ मार दिया और बोली-


माँ: तुमने कल मेरे साथ जो भी किया, अब अगली बार से ऐसे कुछ नहीं होना चाहिए।


प्रेम: सॉरी माँ, आज के बाद ऐसा कुछ नहीं करूँगा।


नष्ट करके फिर मैं यूनिवर्सिटी चला गया और वहाँ से लौट कर आया तो बाहर दोस्तों के साथ खेलने चला गया। खेल कर लौट कर आने के बाद मैंने खाना खाया और पढ़ाई करने बैठ गया। फिर बाद में सो गया।


आधी रात में मुझे लगा कि कोई मेरे कपड़े उतार रहा था। मैंने उस रात भी शॉर्ट्स और बनियान ही पहन रखा था।

जैसे ही मैंने आँखें खोल कर देखा, तो कोई नहीं दिखा। पर मेरे शॉर्ट्स उतरे थे। फिर मैंने सोचा कि हो न हो ये माँ ने ही किया था। पर आज सुबह जो भी हुआ उससे मुझे डर भी लग रहा था।


लेकिन फिर मैंने सोचा अब जो भी होगा देखा जाएगा। मैंने अपने सारे कपड़े उतार दिए और एक चादर ओढ़ कर सो गया। कुछ देर बाद माँ ने मेरे ऊपर से चादर हटा दी और वो मेरे नंगे लंड को सहलाने लगी। लेकिन मैं एक-दम शांत रह कर सोने का नाटक करता रहा।


फिर माँ ने मुझे अपनी तरफ घुमा कर, मेरा लंड हाथ में लेके हिलाने लगी। अब मैं भी उनका इरादा समझ चुका था। तो मैं उठ गया और उनके पास खींच कर उन्हें किस करने लग गया।


आगे की कहानी पढ़िए अगले पार्ट में। मुझसे बात करने के लिए मेल करिए मेरी आईडी पर

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Saturday, 15 August 2026

ओ सामने वाले फ्लैट में रहती थी

 हाय रीडर्स, मैं अरुण। पहले भी अपनी मेरी 2 कहानी पढ़ी और पसंद की इसके लिए थैंक्स। आज मैं आप सबसे एक रिक्वेस्ट करना चाहूंगा। आप सब ये कहानी पढ़िए पोर्न साइट सर्फ कीजिए लेकिन इसके बाद आप इसको आपके जीवन में इसका गलत इस्तेमाल न करें। टीचिंग प्रोफेशन में अगर आप हों तो प्लीज़ आपके फीमेल स्टूडेंट्स के साथ तो कभी सेक्स की खबर न रखें हम उस देश में रहते हैं जहाँ गुरु को भगवान से भी बड़ा दर्जा दिया गया है। और अगर आप कुछ और काम करते हैं तो जो आपके साथ ऐसे रिलेशनशिप में इंटरेस्टेड न हो उसके साथ जबरदस्ती रेप या बार बार इस बात के लिए टॉर्चर कर के गलत न करे। सेक्स अच्छा एंटरटेनमेंट है पर जब ये प्यार से हो तो ही अच्छा है। अब मैं आपको नई कहानी बताने जा रहा हूँ। ये बात जब मैं कॉलेज में पढ़ता था तब की है। हमारी एग्जाम चल रही थी मैं और मेरा ग्रुप इस एग्जाम दे रहे थे। हमारे ग्रुप में 6 लड़कियां और 8 लड़के थे। पर उन 6 लड़कियों में भी 2 ग्रुप थे 1 ग्रुप में रेखा, ज्योति और निमिषा थे और दूसरा ग्रुप था जिगिशा, दिव्या और अर्चना। मैं जिस सोसाइटी में रहता था वो फ्लैट सिस्टम था 1 फ्लैट में 12 घर थे। ज्योति मेरे सामने वाले फ्लैट में रहती थी और जिगीषा मेरे फ्लैट में रहती थी। जिगीषा एक दम गोरी चींटी भरी हुई शरीर वाली लड़की थी मैंने जब उसे 9th क्लास में पढ़ता था तब देखा था और तभी से वो मुझे पसंद थी। मैंने कई बार उसे ये बताने की कोशिश करता रहा पर डर के मारे कि वो मुझसे बात करना बंद न कर दे इस लिए मैं उसे बोल नहीं पाया। ऐसे ही चल रहा था और हम आज s.ybcom की एग्जाम तका आ गए थे। उस दिन पहला पेपर खत्म करके हम घर आ गए थे तभी हमारी एक पड़ोसी ने कहाँ जिगु दीदी आपको बुला रही है। मैं अपना पेपर लेकर उसके घर पहुँचा मैंने देखा उसके घर में उस दिन उसके पापा मम्मी और जिगिशा थे। उसने कहा चलो मेरे कमरे में जेकर पेपर सोल करते हैं मैं कहाँ ठीक है और हम उसके कमरे में चले गए। जेकर मैं बिस्तर पर बैठा उसने भी अपना पेपर निकाला और मेरे सामने बैठ गई। उस दिन उसने टी-शर्ट और स्कर्ट पहना था। हम पेपर सोल करने लगे पेपर सोल करते करते मेरी नज़र उसकी टी-शर्ट के अंदर दिख रहे उसके बूब्स पर पड़ी मैंने नोटिस किया वो जंबुजर मुझे दिखा रही हो। उसने अंदर सफेद रंग की ब्रा पहनी थी, उसमें से उसके 36 साइज के बूब्स बाहर आ रहे थे मेरा लंड वही टाइट हो गया था। थोड़ी देर बाद उसके पापा आए और वो मेरे बाजू में चेयर लेकर बैठे। पर मैं उनसे नज़र बचाके कभी कभी जिगू के बूब्स देख लिया करता था। सायद उन्होंने ये नोटिस कर लिया हो ऐसे जिगू को ठीक से बैठने को इशारा किया। तब से जिगु ने अपनी टी-शर्ट ऊपर से पकड़कर बैठी जा से मुझे कुछ दिखायी ना दे। उस दिन मैं पेपर देकर चला आया। पर मेरे दिमाग में पहले से ही जिगु तो थी ही औरा बी जब मैंने ये नज़ारा देखा मेरा मान बेकाबू हो गया था। दूसरे दिन जब मैं पेपर देने अपनी बाइक पर जा रहा था तब मैंने बस स्टॉप पर देखा कि ज्योति, रेखा और निमिषा खड़े थे। मैंने पास जाकर कहाँ चलो अगर किसी को आना हो तो। तब ज्योति कुछ नहीं बोली पर निमिषा और रेखा ज्योति को मेरे साथ बाइक पर जाने के लिए फोर्स करने लगे मैंने सोचा ये दोनों इसे ही क्यों फोर्स कर रहे हैं। इस दौरान ज्योति मेरे पीछे बैठ गई और हम कॉलेज के लिए चलने लगे बाइक पर वो थोड़ी दूरी से बैठी थी पर कभी मैं ब्रेक लगाता या खड़ा आ जाता तो ज्योति की छाती यानी कि बूब्स मेरी पीठ से टकरा जाते थे और वो मेरा कंधा पकड़कर बैलेंस कर लेती हम कॉलेज पहुंचाएं। पेपर देने के बाद जब हम एक चाय की दुकान पर सब मिले मैंने रेखा और निमिषा को साइड पर ले जेकर पूछा कि तुम दोनों ने ज्योति को ही क्यों फोर्स किया मेरे साथ बाइक पर आने को तभी नितेश जो रेखा से प्यार करता था वो वहा आया और मुझसे कहा कि क्यों भाई मेरी गर्लफ्रेंड को साइड पर ले जेकर खड़ा है ऐसा मजाक किया नितेश मेरा खास दोस्त था इस लिए मैंने नितेश को कहा कि वो रेखा को कहे कि ये बात क्लियर करे तब वो बोला मुझे तो क्लियर पता है कि ज्योति तुम्हें पसंद करती है। मैंने ज्योति को कहा चलो घर चले तो वो बोली कि वो बस में जाएगी तभी निमिषा और रेखा उस पर बरस पड़े और कहा बाइक पर आई है तो बाइक पर ही जा। और वो मेरे साथ आने को तैयार हो गई हम लोग बाइक पर निकले और सीधा मैं बाइक लेकर शहर से बाहर एक रेस्टोरेंट में ले गया। वो बोली ये कहाँ ले आए तुम मुझे ? मैंने मुझे कहाँ से कुछ बात करनी है इस लिए। हम लोग आराम करो। मैंने एक कोने के टेबल पर बैठे कोल्ड कॉफी का ऑर्डर दिया और मैंने कहा ज्योति आई लाइक यू एंड आई लव यू क्या तुम मुझे अपना जीवनसाथी बनाओगी। तब उसने शर्मा केर हा कहा। मैंने हिंदी फिल्मों की तरह खड़े होकर टेबल चाकू से अंगूठा काटकर खून से उसकी माँग भर दी तब वो एकदम शॉक्ड हो गई और कहाँ ये क्या किया तुमने मैंने कहा आज से तुम पूरी तरह से मेरी हो। कॉफी बनाकर हम वहाँ से निकल पड़े घर के लिए अब वो बाइक पर मेरी वाइफ हो ऐसे बैठी चिपक केर। और मेरे कान में आई लव यू कहाँ। हम घर पहुँचो। मेरे घर में जाते ही मेरी मम्मी ने कहा जिगू तुम्हें पेपर सोल करने बुला रही है। मैं वहा गया देखा कल की तरह ही 3नो घर में ही थे। हम जिगू के कमरे में गए आज उसने डबल नाइटी पहनी थी अंदर जाते ही उसने दरवाजा बंद कर दिया में बेड पर बैठा। उसने नाइटी का अपर का निकाल दिया, पेपर निकाला और मेरे सामने बैठ गई। कल की तरह आज फिर उसने अपने अंग दिखाने शुरू कर दिए। मैं देखता गया और पेपर सोल करते गए तभी थोड़ी देर बाद उसकी मम्मी ने दरवाजा खटखटाया, तब जिगु ने नाइटी अपर का पहन लिया और दरवाजा खोला। और हम फिर से पेपर सोल लाने लगे थोड़ी देर बाद मैं वहां से चला आया। फिर 4 पेपर बाकी थे दिन गुजर गए। एग्जाम पूरी हो गई। हम सब ने सोचा फिल्म देखने जाने का। हम सब मर्डर फिल्म देखने गए उसमें मैं ज्योति, नितेश रेखा निमिषा देवेन नितिन हम इतनी फिल्म देखने गए। पहेली सीट पर ज्योति बैठी उसके बाद मैं मेरे बाद नितेश, फिर रेखा, फिर निमिषा, देवेन और नितिन। फिल्म शुरू हो गई। थिएटर में अंधेरा था। तब मैंने अपना हाथ ज्योति के कंधे पर रखा। किसिंग सीन, सेक्स सीन आया, मैं उत्तेजित हो गया, मेरा हाथ सड़क पर ज्योति के बूब्स पर चला गया, उसने विरोध नहीं किया, मज़ा करने लगी। मैंने अपनी हाथ ज्योति की टी-शर्ट के अंदर डाल दिया और उसके बूब्स दबाने लगा। उसने मेरा दूसरा हाथ पकड़ के अपनी चूत पर रख दिया जो गीली हो गई थी। थोड़ी देर बाद इंटरवल हुआ तो हम नॉर्मल हो गए, नितेश ने मुझे कहाँ चल सबके लिए कुछ स्नैक्स लेकर आते हैं। हम दोनों बाहर आ गए। उसने कहाँ कैसा रहा ? मैंने कहाँ मज़ा आ गया पहेली बार किसी लड़की को ऐसे मैंने मज़ा किया है उसने मुझे कहाँ किस किया ? मैंने कहा नहीं तू बाजू में था इसके लिए नहीं किया। उसने कहा तू बाजू में था तो तुझे पता चला कि मैंने रेखा के होंठ इतने चूस लिए कि होंठ सूज गए। हम समोसा लेकर अंदर आए तब मैंने रेखा के होंठों को देखा थोड़े सूजे हुए थे वो समझ गई मैंने उसे आँख मारी। फिल्म फिर से शुरू हो गई अँधेरा होते ही मैंने ज्योति को कहाँ मैं किस करना चाहता हूँ। तो उसने कहा सब तुम्हारा है मैंने सब तुम्हें सोप दिया तो इसके लिए क्यों पूछ रहे हो मेरे होंठ तुम्हारे लिए ही है इतना कहकर उसने अपने होंठ मेरे होंठों पर रख दिए हम जमकेर किस करने लगे। फिल्म पूरी हुई हम घर आ गए। मैं जिगू के घर गया मैंने देखा उसके पापा मम्मी बाहर जा रहे थे मैंने उनसे जिगू के बारे में पूछा तो कहाँ वो तरक्की पर है। मैं भी तरक्की पर गया। जिगू तरक्की पर बाहर की और चेहरा करके खड़ी थी मैंने पीछे से जेकर जिगू को कमर से पकड़ा और दबा लिया। वो गभरा गई मेरी और घूमती मुझे देखकर वो रिलैक्स हो गई। अभी तक मैंने उसे छोड़ा नहीं था मेरे हाथ अब उसकी गांड पर थे लेकिन वो कुछ नहीं बोल रही थी। उसके दो हाथ मेरे कंधे पर थे। मैंने कहाँ फिल्म देखने क्यों नहीं आई तुम तो कहाँ पापा मम्मी दीदी के घर जा रहे थे इसके लिए पैकिंग करनी थी इसलिए। अब हम दोनों चुप थे एक दूसरे को देख रहे थे। मैंने अपने होठों उसके होठों की हालत ले गया उसने कोई रिएक्शन नहीं दिया मैंने अपने होठों उसके होठों पर रख दिए उसने भी मुझे अपने दोनों हाथों से दबाचके किस करने लगी लगभग 10 मिनट। तक हम दोनों एक दूसरे के होठ चूसते रहे इस दौरान जिघभी चूसी। फिर हम अलग हुए। वो फिर से बाहर की तरफ मुँह करके अपने हाथ की तराई की दीवार पर रखकर झुकी रही मैंने पीछे से अपने हाथ उसकी कमर में डाले मेरा लंड उसकी गांड पर था जो एकदम टाइट हो गया था। वो सीधी खड़ी हो गई मैंने अपने हाथ उसके बूब्स पर रख कर दबाने लगा। वो बोली बिना प्रपोज़ किए ही ये सब करने लगे तुम्हें पता था कि मैं ये सब तुम्हें करने दूँगी? मैंने जब हाँ कहा तो उसने मुझे पूछा कैसे पता था तब मैंने बताया कि जब तुम पेपर सोल करने मुझे बुलाकर अपने स्तन दिखाती थी तब मुझे पता चला कि उम मुझे कुछ भी करने से रोकोगी नहीं तुम मुझे पसंद करती हो। तब उसने कहा जितना समझा था उतने बुध तुम नहीं ऐसा कहकर अपने होठों को फिर से मेरे होठों पर रख किस करने लगी मैं उसके बॉल दबा रहा था जब मैंने अपना एक हाथ उसके स्कर्ट में डाल के उसकी चूत पकड़नी चाही तो उसने कहा यहाँ नहीं मेरे घर चलो वहा मुझे पूरी नंगी करके एन्जॉय करना मैंने कहा ठीक है मैं घर पर बोल्ड होता हूँ कि आज मैं अपने दोस्त के घर सोने जा रहा हूँ मैं दरवाजा खुला रखना मैं 10 मिनट में आता हूँ कहे केर मैं अपने घर गया मैंने मम्मी को बोल दिया कि मैं अपने दोस्त के घर सोने जा रहा हूँ। और सीधा दांत के घर चला गया। मैंने मुख्य द्वार बंद कर दिया। जब बेडरूम में गया तो देखा जिगू एक सफेद चादर औंधे के बिस्तर पर सो रही थी उसने जो कपड़े रास्ते पर पहने थे वो जमीन पर पड़े थे मैं समझा गया वो चादर के अंदर नंगी है। मैंने भी अपने सारे कपड़े निकाल कर नंगा हो गया जिगू मेरा लंड देख के बोली “वाह, लिया लंड है तुम्हारा मैंने पहली बार सच्चा लंड देखा है” मैं उसके बाजू में जाकर लेट गया और उसके होठों को चूसने लगा। हम दोनो किस एन्जॉय कर रहे थे धीरे से मैं उसकी गार्डन से हो केर उसके बूब्स पर आ गया चादर हटा दी और उसके बूब्स चूसने लगा 36” के एकदम टाइट बॉल दबा रहा था चूस रहा था पिघल ओ भी बाहर हो केर आआआ अरुण प्लीज चूसो इसे दबाओ मसल डालो इसे। मैं उसकी बेली बटन को अपनी जीभ से चूस रहा था। वो सिसकारियां लेकर ऊपर नीचे हो रही थी मेरे सर पर हाथ था उसका और कह रही थी अरुण खेलो मुझसे आज रात मैं पूरी की पूरी तुम्हारी हूँ मुझे आज लड़की से औरत बना दो इस कली को फूल बना दो अरुण प्लीज थोड़ा दौड़ दो उसके साथ ऐसे खेल ने के बाद उसने मुझे दबाके बाजू में लिटा दिया और मेरे ऊपर आ गई और मेरे शरीर के अंगों को छूने लगी अब मैं आँखें बांध के सिसकारियां ले रहा था फिर मैंने उसके सर को धक्का देकर मेरे लंड को चूसने को कहा उसने मेरा पूरा लंड अपनी जीभ से चाटा बाद में पूरा लंड अपने मुँह में ले लिया|और अंदर बाहर करने लगी 15-20 तक ऐसा करने के बाद मैं झड़ गया था मैंने उसे कहा कि जिगू डार्लिंग मैं झड़ने वाला हूँ मेरा वीर्य निकल जाएगा तुम इसे बाहर निकाल दो तो उसने नहीं माना और अंदर बाहर करना चालू रखा मैं झड़ गया आआह जिगू पिचकारी उसके मुँह में छूट गई मैंने उसका सर मेरे लंड पर दबा दिया और पूरा वीर्य उसके मुँह में छोड़ा। रिलैक्स होकर मैंने उसका सर छोड़ा वो मेरे सामने मेरा लंड पकड़कर बैठी थी और मुस्कुरा रही थी। मैंने फिर से उसके बूब्स को चूसने लगा। थोड़ी देर उसके boobs से belly button को चूसने के बाद में उसकी chut chut लगाने लगा वो bekabu हो गई। बोलने लगी अरुण प्लीज मत जलो मुझे जल्दी इस आग को बुझाओ प्लीज अरुण मैं अब नहीं रहूंगी शक्ति प्लीज छोड़ो मुझे डाल दो अपना लंड मेरी चूत में प्लीज अरुण तोड़ दो मेरा सील अरुण प्लीज मत और जलाओ अरुण छोड़ो मुझे प्लीज उसकी चूत रस छोड़ रही थी मैंने वो रस चाट लिया दारू से भी ज्यादा नशा था उसके बाद मैंने अपना लंड उसके दो बॉल के बीच में रख दिया दोनों बूब्स को दबाकर उसे छोड़ने लगा मेरा लंड एकदम टाइट हो गया था मैं अब उसके दो पैरों के बीच में आ गया लंड उसकी चूत पर रख दिया वो सिहर उठी मैंने अपने होठों उसके होठों पर रख दिए और जोर से धक्का दिया लंड का टॉप अंदर चला गया। वो चिकनी लेकिन उसकी चीख अंदर ही दब गई। मैंने थोड़ी देर रुक के दूसरा धक्का दिया आधा लंड उसकी चूत में गया मैंने देखा उसकी आँखों में पानी आ गया था मैंने उसकी और देखा उसने मुझे कहा प्लीज मेरा दर्द मत देखो मेरी जवानी की प्यास देखो मुझे अपना बना लो अरुण प्लीज डाल दो पूरा लंड अंदर। मैंने और एक धक्का दिया पूरा लंड अंदर चला गया थोड़ी देर मैं ऐसे ही रख रहा फिर मैंने धीरे धीरे लंड अंदर बाहर करना शुरू किया। वो भी अपनी गांड उछाल कर मेरा साथ देने लगी 3 मिनट के बाद वो पहेली बार झड़ गई मैंने वो महेश किया अपने लंड पर लेकिन मैंने अपने धक्के देना चालू ही रखा चूत ज्यादा गीली हुई इस लिए लंड आसानी से अंदर बाहर हो रहा था मैंने अपनी स्पीड बढ़ा दी। अब मैं जोर जोर से धक्के देने लगा था इस दौरान वो 2री बार झड़ गई। बोली वो

अरुण मेरे राजा और छोड़ो मुझे और जोर से छोड़ो मुझे फाड़ दो मेरी चूत प्लीज अरुण मैं तुम से भी मांग रही हूँ छोड़ो मुझे प्लीज। मैं उसे छोड़ता गे 20 मिनट के बाद मैं भी झड़नेवाला था इस दौरान जिगू 2 बार और झड़ चुकी थी मैंने जिगू को कहा मैं लंड बाहर निकाल रहा हूँ क्यों की मैं झड़नेवाला हूँ उसने मुझे मना कर दिया आसने कहा मैं तुम्हारे कम की पिचकारी अंडे महेश करना चाहती हूँ अंदर ही छोड़ो। मैंने अंदर ही पानी छोड़ दिया और जिगू के ऊपर ही लेटा गया थोड़ी दे चढ़ा ही रहे उसने कहा धन्यवाद अरुण आईलव यू अरुण मेरी शादी किसी से भी हो लेकिन वादा करो कि मैं हमेशा ऐसे ही प्यार करोगे मैंने कहा जिगू मैं शादी का वादा नहीं करता पर जिंदगी भर तुम्हें ऐसे ही प्यार करूंगा। इतना कहने के बाद मैं फिर से उसके होंठ चूसने शुरू किए फिर से हम गरम होने लगे मैं उसे पेट के बाल लिटा दिया दोनों हाथों से उसके स्तन को दबा रहा था और उसकी पीठ को चाट रहा था एक डीएम मलाई जैसी गोरी उसकी पीठ थी वाह मजा आ गया था। मैंने उसके पैरों को फैला दिया और अपना खड़ा लंड पीछे से उसकी चूत में डाल दिया और धक्के देना शुरू कर दिया फिर से जिगू की चुदाई चालू हो गई वो सिसकारियां लेने लगी आआआह्ह्ह्ह अर्र्र्र्र्रन्नन आआआ ह्ह्ह्ह्ह छोड़ो मुझे प्लीज चोदो 30 मिनट तक चोदने के बाद हम शांत हुए मैंने कहा जिगू प्लीज मैं तुम्हारी गांड में अपना लंड पेलना चाहता हूँ उसने कहा डियर गांड में बहुत दर्द होता है ऐसा मैंने सुना है पर मैं सहन कर लुंगी मारो मेरी गांड आज रात में तुम्हारी रंडी बनकर सेवा करूंगी जैसे चाहो वैसे छोड़ो मुझे मैंने उसे बिस्तर के पास खड़ा कर झुक जाने को कहाँ वो वैसी खड़ी हो गई मैंने अपने लंड पर नारियल तेल लगाया उसकी गांड के छेद पर रखा और ज़ोर से धक्का मारा वो चिल्ला उठी माँआआआआआआआआआआआआआआआआआआह गई मैंने और एक धक्का दिया वो रोने लगी कहाँ रहेम करो अरुण धीरे से डालो प्लीज़ बहुत दर्द हो रहा है मदिया पूरा लंड उसकी गांड में घुसा दिया वो रो रही थी थोड़ी देर कुछ नहीं किया अब वो शांत थी उसने खुद अपनी गांड आगे पीछे करने लगी मैं समझ गया अब वो तैयार है मैंने अब अपना लंड उसकी गांड में अंदर बाहर करने लगा अब उसे भी मजा आने लगा था वो बोल रही थी हाँ अरुण मारो मेरी गांड मारो फाड़ डालो मेरी गांड को अरुण उईईईई माँआआ फाड़ डालो अरुण माआआअर्र्रर गई माँआआ अरुण और जोर से करो और जोर से करो पूरे 15 मिनट उसकी टाइट मलाई जैसी गांड में मेरी और मैं झड़ गया फिर वो बाथरूम में गई फ्रेश होने मैं भी उसके पीछे बाथरूम में गया और उसे कहाँ मेरा लंड भी साफ कर दो उसने मेरा लंड साबुन से धोने के कबाब अपने मुँह में ले लिया मेरा लंड फिर से टाइट हो गया मैंने उसे खड़ा किया बाहर मैं उठाकर उसे ड्राइंग रूम में ले गया जहाँ मैं सोफे पर बैठ गया उसे अपनी चूत में लेकर उसकी चूत में लंड डाल दिया फिर से उसे छोड़ा । पूरी रात ऐसे ही हम छोड़ रहे सुबह 4.00 बजे हम सो गए 8.00 उठे मैंने कहा अगर किसी ने देख लिया तो तो उसने कहा पहले मैं बाहर जाती हूँ जब तुम्हें इशारा करूँ तब तुम बाहर आना उसने दवा खोला बाहर गई थोड़ी देर बाद उसने मुझे इशारा किया मैं धीरे से बाहर निकाल कर मेरे घर चला गया उसके बाद मैंने कई बार जीभ को होटल में लेकर छोड़ा आज उसकी शादी हो गई है फिर भी कभी मैं वहाँ जाकर या जब वह यहाँ आती है तब उसे छोड़ता हूँ मेरी शादी ज्योति से हो गई ज्योति और मैं भी बहुत खुश है और कोई लड़की भाभी और औरत कि मैं अगर सेक्स की भूख मिटाऊं तो मैं अपने आप को भाग्यशाली समझूंगा मेरा मेल आईडी मेल कीजिएगा और किसी के साथ जबरदस्ती मत करना

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Thursday, 13 August 2026

चाची को सोते हुए छोड़ा

 हाय दोस्तों, मैं इमरान हूँ और मुझे www.Mstory.com बहुत पसंद है। मैं आपको कहानी नहीं सच्चाई सुनाने जा रहा हूँ। मैं 25 साल का हूँ, मैंने आज तक किसी को नहीं छोड़ा, बस बूब्स ज़रूर प्रेस किए हैं। मेरी चाची 32 साल की हैं और मेरे चाचा ने दो शादियाँ की हैं। वो दूसरी वाली के साथ रहते हैं। और ये चाची नानी के यहाँ रहती हैं। मैं अपनी नहीं के यह पढ़ाई के लिए रुका हुआ था। हम सब लोग एक ही कमरे में सोया करते थे। पहले तो मैंने ऐसा कुछ सोचा नहीं था पर जब चाची की गांड और बूब्स को देखता तो अपने आप मेरा लंड 8 इंच का हो जाता। मेरी चाची दिखने में तो बहुत ही सेक्सी हैं। जब वो लाल साडी पहनती है तो एक दम फटाका लगती है. मेरी चाची पतिव्रता है. पर मैंने भी जगह लिया था कि इनकी चूत को अपने लंड का रसपान ज़रूर करूंगा. एक दिन मेरे को नींद नहीं आ रही थी. तो मैं अपने कमरे से उठकर उस कमरे में आ गया जहाँ चाची और नानी सोती हैं. मैं चाची के पास आकर सो गया. 15 मिनट तक तो कुछ नहीं फिर वही शुरू जो सब करते हैं पेट पर हाथ रखना. पर मैंने कुछ एडवांस किया.... मेन टॉवल में ही उनके साथ सो गया था. बस फिर क्या... मैंने अपने पैरों से उनकी सारी ऊपर की और अपनी जंगलों को उनकी गरम जंगलों से चिपका दिया... वो बस सोती रही... तो मैं समझ गया... की बाजी अपने हाथ में ही. मैंने उन्हें अपने करीब खींच लिया. और फिर ऊपर से ही उनकी चूत को ज़ोर से रगड़ने लगा. मज़ा आ गया था. फिर धीरे-धीरे उनकी सारी को ऊपर किया. और फिर धीरे से उनकी चड्डी में हाथ डाला. और ऊपर ही ऊपर उनकी चूत को सहलाने लगा. पर एक गलती हो गई उनके गरम होने से पहले मैं ही गरम हो गया और एक झटके में अपनी उंगली उनकी चूत में डाल दी. वो चिल्ला नहीं पाए क्योंकि बाजू में नानी सो रही थी.... बस दबी हुई आवाज़ में छोड़ो.... छोड़ो.... कह रही थी... उनकी आँखों से आँसू टपकने लगे थे। क्योंकि चाचा ने उन्हें छोड़ना छोड़ दिया था। और उनकी चूत बापस टाइट हो गई थी। हाँ मैं बात बता दूँ। चाचा ने इसलिए दूसरी शादी की क्योंकि इसमें कोई गलती नहीं हुई थी। तो जायाज ही चूत टाइट तो होगी ही... बस वो छोड़ो... छोड़ो... चिल्ला रही थी... जब मैंने उंगली एक दम उनकी गरमा-गरम चूत में डाली तो वो अपना मुंह खोल कर चिल्लाना चाहती थी पर चिल्ला नहीं पाई क्यों नानी बाजू में सो रही थी... फिर मैंने उन्हें कस के पकड़ लिया... अपने होठों से उनके होठों को चूमने लगा। अरे बूब बाद में दबा लेता पर उस वक़्त तो मेरे सर पर चुदाई करने का बहुत सवार था. जब मैंने अपनी बीच की उंगली डाली तो उन्होंने अपनी दोनों उंगलियों से मेरे हाथों को रोकने की कोशिश की. मगर में बहुत जल्दी में था जिससे कोई ट्राई छूट ना जाए... फिर मैंने पूरी ताकत लगाकर दूसरी उंगली भी उनकी चूत में डाल दी... उनकी आँखों से आँसू नुकलने लगे. पर मैंने कोई दया नहीं की. अपने पेरो से उनके दोनों पेरो को अलग किया. और मैं तो अपने लंड को पहले ही निकाल चुका था. तुम सोच रहे होगे नानी जागी नहीं. तो वो बहुत गहरी नींद में सोती है. और ना भी सोए तो मैं क्या करूँ उस टाइम तो बस एक ही जुनून सवार थे अपने गरमा गरम लोडे को चाची की चोट में डालना था. बस फिर क्या सच कहूँ तो मुझे बहुत पसीना आ गया था. वो डर रही थी कि कहीं नानी ना जाग जाए. इसीलिए मेरा प्रतिरोध कर रही थी. वो छोड़ना चाहती थी मगर इस तरह नहीं जिस तरह में उन्हें पहली बार छोड़ रहा था. बस फिर क्या मैंने कान में कहा कि बस एक बार डालूंगा बाकी का काम कल कर लूँगा. बस मेरे लोडे को चोट के दर्शन करा दो. मगर वो नहीं मानी. मैं थोड़े ही मानने वाला था. मैं ऊपर पहले ही चढ़ चुका था. मेरा लौड़ा खुला हुआ था. और उनकी जंगो से टकरा रहा था. सच कहूँ तो मुझसे ज्यादा मेरा लोडा ज्यादा जल्दी में था। उसे तो बस अंदर जाना था चाहे कुछ भी हो जाए। मैंने एक हाथ से लोडा पकड़ा पर उनकी की चड्डी बीच में आ गई। मैंने दूसरे हाथ से अपने लोडे को बस रास्ता दिखाया चड्डी को थोड़ा सा खिसका कर। अपने लोडे को उनकी गरमा गरम चोट पे रखा और एक झटका दिया पर साला फिसल गया, अंदर नहीं गया। पर मैंने दूसरी बार अपने लोडे को चोट से लगाया और हाथ से ही पकड़ कर एक धक्का दिया। जरा सा गया वो बस यह मानो कुछ कर नहीं पा रही थी, जैसे बिन पानी मछली तड़प रही हो। क्योंकि मैंने अपना सूखा लंड ही डाल दिया था मैंने देर नहीं की और दूसरा झटका दिया मेरा आधा लोडा उनकी चोट में समा गया था। वो बस छत की तरफ देख कर रो रही थी। मैंने नीचे हाथ लगाकर देखा तो खून निकल रहा था। मैंने कोई समय गवाए बिना अपनी तौलिया नीचे फसा दिया। और आखिरी झटका दिया। और वो उनकी आखिरी चीख थी। मेरा मतलब सबसे दर्दनिया चीख। बस 10 सेकंड में रुका और फटाफट अंदर बाहर करने लगा वो कहने लगी कि धीरे करो मगर में तो बहुत जल्दी में था गांड फटी जा रही थी कि कहीं नानी जाग गई तो गांड मर जाएगी। मुझे तो बस पानी पड़ी थी। मैं एक बार शुरू हुआ तो 15 मिनट तक छोड़ता रहा और सारा लार्वा (छूत) उनकी चूत में भर दिया। थोड़ी देर तक मैं उनके ऊपर पड़ा रहा। और फिर चुपचप। बाजू में सो गया। वह अभी भी रो रही थी। मैंने कहा बाथरूम में जाकर चूत साफ कर लो। वह चुप चप रोते रोते। बाथरूम में चली गई। मैं भी पीछे-पीछे गया कि कहीं कुछ उल्टा सीधा न कर ले। अपने हाथों से उनकी चूत साफ की। और उन्हें समझाया। कि चाचा तो आपको छोड़ते नहीं हैं। अब मैं ही तुम्हारा ख्याल रखूंगा। और फिर उनकी चूत को किस किया और 5 मिनट तक उनके होठों को। इतनी देर में मेरा लोड़ा फिर खड़ा हो गया। पर मैंने छोड़ा नहीं। बात बिगड़ सकती थी। वो घर में वापस आकर सो गई। अब मेरा प्लान था उनकी गांड मारना। बस...मुंह मार्के में भी वापस सो गया। अब आगे की बात में तब सुनाऊंगा जब आपके मेल मुझे मिलेंगे। नहीं तो नहीं। सिर्फ लड़कियां ही नहीं, लड़के भी मेल कर सकते हैं। पर अगर लड़कियां, भाभियां या फिर आंटी अगर मुझे मेल करेंगी तो मुझे ज्यादा खुशी होगी। तब मैं अपना पूरा इंट्रोडक्शन दूंगा। तो मुझे मेल करें.... इंतजार रहेगा। दोस्तों। हाँ अगर कोई मेरे साथ सेक्स करना चाहता है तो मुझे खुशी होगी वो कोई भी लड़की / मामी / चाची / नानी / दादी / बहन / भाभी / शादीशुदा या अविवाहित। कृपया कृपया कृपया मुघ्य मेल ज़रूर करें, क्या कोई पाकिस्तानी भी है या भारतीय भी।

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