Friday, 28 August 2026

आंटी से दोस्ती कर की

 एक दिन में और खदीजा घर में अकेले थे क्योंकि पापा अपने बैंक के हेडऑफिस कराची गए हुए थे जबके हमारी नोकरानी तीन दिन की छुट्टी पर थी। मैं मन बाप का इकलौता बैठा था और भाई बहन न होने की वजह से अक्सर अपने आपको तन्हा महसूस करता था। मेरी अम्मी तब ही इंतकाल कर गई थीं तब जब में 3 साल का था। पापा ने दूसरी शादी नहीं की और हम दोनों अकेले ही रहते थे। वो बैंक में एक आला सुबह पर फैज थे मगर ज्यादा दूर अपने काम में मसरूफ रहते थे। मेरी फुपियों में फूपी खदीजा का नंबर दूसरा था और वो लाहौर में रहती थीं। दो तीन महीने बाद वो पिंडी हमारे घर आई थीं और दो तीन दिन रही थीं। 


अब की बार मेरी अकेली होने की वजह से दाद ने उन्हें लाहौर से पिंडी बुला लिया था। मन के बचपन में इंतकाल की वजह से फूपी खदीजा मुझसे कहती थीं, बुहत करीब थीं और इंतिहाई मुहब्बत का सलूक करती थीं लेकिन मैं उन पर बुहत बचपन से ही गरम था और इस कुर्बात का फायदा उठाना चाहता था। वो खानदान की उन औरतों में से थीं जिन को मैं बालिग होने से भी पहले से पसंद करता था। मुझमें उस वक़्त इल्म नहीं था के इंक..टी क्या चीज़ होती है ये अच्छी है या बुरी मगर ये ज़रूर मालूम था के फूपी खदीजा को दिखाकर मेरा लंड खर्रा हो गया था जाया करता था और मैंने उन के मैमन और गांड को चुप चुप कर दिखा करता था। फिर जब मैं बालिग हुआ तो सब से पहले फूपी खदीजा और खानदान की दूसरी औरतों को ही चोदने के बारे में सोचा करता था। आज मेरी शादी खहिश थी क्या फूपी खदीजा की फुदी मारने के बारे में जो प्लान बार अरसे से में बनाया हुआ था उस पर अमल कर गुजरूं। मोका भी बेहतरीन था क्योंके अगले तीन दिन वो और मैं घर में बिल्कुल अकेले थे। अगर मैं इस दफा उनको छोड़ने में नाकाम रहता तो शायद ऐसा सुनहरा मोका मुझे फिर मुश्किल से ही मिलता।

फूपी खदीजा थीं भी शानदार औरत। उनकी उम्र 43/44 साल थी और उनके 2 बच्चे थे। वो इंतिहाई भरपूर जिसकी खूबसूरती की मालिक थीं। लंबी चोरी दूध की तरह सफाई और निहायत ही सेहतमंद है। उनके मम्मी कुछ ज़रूरत से ज़्यादा मोटे थे जिन्हें वो हमेशा मुख्तारिफ़ क़िस्म के बर्रे बर्रे ब्रेज़ियर में बंद कर के रखती थीं। मैं आज तक कभी उनके मम्मी ब्रेज़ियर से बाहर नहीं दिखायी थीं यहाँ तक कि वो रात को भी ब्रेज़ियर पहन कर सोती थीं। शायद इस वजह से भी फूपी ख़दीजा के मम्मी इस क़दर मोटे थे। उनकी गांड भी बुहत ज़्यादा मोटी और चोरी थी और जब वो चलती तो उनके इंतिहाई मज़बूत और भारी चूतड़ एक दूसरे के साथ रगड़र खाते रहते। उनकी कमर पतली तो नहीं थी मगर भारी चूतड़ों और बुहत ज़्यादा उभरे हुए मैमन के मुकाबले में काफ़ी छोटी नज़र आती थी। सोने पर सुहागा ये कि उनका पैठ बाहर निकला नहीं था और दो बच्चों की पैदाइश के बाद भी साइड से नज़र नहीं आता था। पैठ न होने से उनकी गांड और मैम और भी नुमायां नज़र आती थी। 

उनके बाल बहुत लंबे और खूबसूरत थे जो उनके चूतड़ों तक आते थे और जिन्हें वो ब्यूटी पार्लर से बर्रा अच्छा डाई करवाती थीं। रात के खाने के बाद अपने कमरे में आ गई और फूपी खदीजा अपने कमरे में सोने चली गईं। वो इस बात से बेखबर थीं के में न खाने के वक़्त उनके कोक में नींद की एक गोली मिली थी कि वो गहरी नींद सो जाएं क्योंकि ये मेरा प्लान के लिए बहुत ज़रूरी था। उन्हें कोक ज़रा करवा भी लगा लेकिन बाहर हाल वो उससे पी गईं। रात तकरीबां दो बजे में खामोशी से उनके कमरे में दाखिल हुआ। मेरे पास मशाल थी जो मैंने नाय जला कर फूपी खदीजा के बिस्तर पर डाली। वो करवावत लिए बेखबर गहरी नींद सो रही थीं और उनके खुले हुए गरमागरम बाण से उनके मोटे मम्मे और साफ ब्रेज़ियर का कुछ हिस्सा दिखाई दे रहा था। लगता था क्या उनके सेहतमंद मम्मे जैसे ब्रेज़ियर और कमीज फाड़ कर बाहर निकालने वाले ही हैं। मुझसे रहा नहीं गया और मैंने नाय आहिस्ता से उनके एक मम्मे को हाथ लगाया। अंगीठी की वजह से मेरा हाथ उनके पैसों तक तो नहीं पहुँच सका मगर यह ज़रूर महसूस हुआ कि अंगीठी के नीचे बुहत भारी भरकम मम्मे मौज़ूद हैं। मैं उनकी कमीज़ के ग़रीबन में उंगली डाल कर उससे ज़रा नीचे किया तो उनके दोनों मोटे मोटे मम्मे एक दूसरे से ज़ुर्रे हुए नज़र आई। फ़ूपी ख़दीजा 


मेरे सामने कभी दोपट्टा नहीं लिया करतीं थीं और इस लिए मुझे कम आज कम कमीज के ऊपर से उन के मां दिखने का मौका मिल जाता था मगर आज पहली दफा में न उनके मां का कुछ हिस्सा नंगा दिखा था। मैं नई बैरी अहस्तगी से एल्फी की छोटी ट्यूब से उनके बाएं मां के बिल्कुल नीचे ब्रेज़ियर के साथ कमीज पर आठ दस कतरे टपका दिया। फिर मैं नई इसी तरह उनके बाएं चोट के ऊपर भी 15 कतरे एल्फी डाल दी। एल्फी चीजें जोर देने के काम आती हैं और फोरन ही सख्त हो जाती हैं। अब एल्फी खुश्क होकर फूपी खदीजा के बदन से उनकी कमीज को चिपका दैती और छूंके जिस्म के ऊपर से इसे हटाना आसान नहीं होता इस लिए उन्हें मेरी मदद लेनी परती। फिर बुहत चांस था के मैं ना सिर्फ उन्हें नंगा दिखा देता बलके मुमकिन था के मुझे उनकी चोट लेनी का मौका भी मिल जाता। मैं अपने कमरे में आया और सो गया। सुबह 9 बजे के करीब मुझे फूपी खदीजा की आवाज़ सुनाई दी। ‘अमजद दिखाओ ये किया हो गया है।’ वो मुझे उठाये हुए कह रही थीं। ‘किआ हुआ फूपी में नई अनजान बनते हुए पूछा।


मेरी कमीज और सलवार जिस्म से चिपक गई है मैं नई हटाने की कोशिश की तो बुहत दर्द होने लगा। ज़्यादा ज़ोर से खैंचने पर ज़ख्मी न हो जाऊं’ उन्हें नई परेशानी से कहा।


मैं फोरन उठ कर उनके करीब आ गया और जहाँ एल्फी लगी थी वहाँ नज़रैन जमा दीन। फूपी खदीजा के बाएं मम्मे के नीचे एल्फी न खुश्क होकर 3/4 इंच का दाग सा बना दिया था और उनकी कमीज उनके जिस्म के साथ बैरी सख्ति से चिपकी हुई थी। उनके ब्रेज़ियर का निचला हिस्सा भी उनके जिस्म के साथ चिपका नज़र आ रहा था। मैं नई एल्फी वाली जगह पर उंगली फिरी तो वो बुहत खुरदरी और सख़्त महसूस हुई। फिर मैं नई उनके छूतरों को दिखा तो वहाँ इस से भी बैरी जगह पर एल्फी खुश्क हो चुकी थी और उनकी सलवार उनके छूतर के साथ चिपकी हुई थी।


फूपी आप के जिस्म के साथ कोई चिपकन वाली चीज़ लग गई है। बुहत सख्त है खैंचने से खून निकल आया होगा आप परेशानी न हो सोचते हैं क्या किया करें।’ मैंने कहा और उनके मोटे और बाहर निकले हुए मैमन की तरफ दिखाया।

फूपी खदीजा की समझ में नहीं आ रहा था क्या किया करें। ‘अब यह कैसे हटेगी’ उन्हें नहीं पूछा।

‘फूपी आप यहाँ बैठीं में इस पर पानी लगाकर दिखाता हूँ शायद उतर जाई। ‘मैंने नई तजवीज दी। ‘हाँ यह ठीक है तुम रुको में पानी ले कर आती हूँ।’ उन्हें नहीं जवाब दिया। वो घूम कर पानी ले गईं। मैं नहीं जानती कि उनके हिलते हुए मोटे चूतर दिखाए और मेरे मुँह में पानी भर आया। मैं सोचने लगी कि उन के मोटे चूतर कितने सफाई और मज़ादार हो गए और अगर उनकी गांड मारी जाए तो किस क़िस्म का पागल कर दबाने वाला मज़ा आएगा। मुझे ख्याल आया कि फूपा सलीम जो बुहत डबल पटले से आदमी था वो भला इतनी शानदार और सेहतमंद औरत की चूत कैसे मरते होंगे। फूपी खदीजा तो तब ही ठंडी हो सकती थीं जब कोई मज़बूत और जवान लूँ उनकी चूत के अंदर जाकर उन्हें अच्छी तरह से छोड़ता।

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