प्यारे पाठकों, कहानियाँ पढ़ने वाले सबको भीगी चूत और खड़े लंड का प्यार। मैं कृपा, उम्र 20 साल और बदन का रंग एक-दम गोरा। मेरी हाइट कुछ 5’5″ की है और वज़न 55kg का होगा। पर बदन पूरा भरा हुआ है। मेरा फिगर 36-30-34 का है।
ये मेरी पहली कहानी है। तो उम्मीद करती हूँ आप सबका प्यार भर-भर के मिलेगा मुझे। मेरी पहली कहानी ही मेरे एक दोस्त और उसकी सौतेली माँ की है। बहुत चुदाई भरी कहानी है, आप सब एन्जॉय करना। अब शुरू करते हैं कहानी के आगे का पार्ट।
जब करीब रात के 2 बजे मेरी नींद खुली, तो मेरा एक हाथ माँ के पेट पर था, और एक तंग माँ के कूल्हे पर थी। इस वजह से मेरा लंड उठान मारने लगा था।
फिर मैंने अपनी आँखें बंद करके सोने का नाटक करते हुए माँ के दूध पर हाथ रख दिया। फिर मैक्सी के ऊपर से ही धीरे से उनके दूध को दबाने लगा।
मेरे ये करने पर जब माँ ने कोई हरकत नहीं दिखाई, तो मैंने भी माँ की चुचियाँ और ज़ोर-ज़ोर से दबाने लगा।
पर मेरे इतने ज़ोर से दबाने की वजह से माँ की नींद खुल गई। इससे मुझे बहुत डर लगा। उन्होंने मेरी तरफ देखा और मेरे हाथ और पैर अपने ऊपर से हटा दिए और सो गई। पर मैंने भी फिर से कुछ टाइम अपने हाथ से माँ के कूल्हे को सहलाने लगा। इस बार भी माँ ने मेरा हाथ पकड़ा और खुद से अलग कर दिया और सो गई।
लेकिन अब मैं कहाँ सोने वाला था। इसलिए मैंने अपना लंड बहुत हिलाया और पूरा पानी निकाल कर माँ के पैरों पर मैक्सी के ऊपर निकाल कर सो गया।
जब मैं सुबह उठा तो बहुत डर रहा था कि रात की बात के कारण माँ मुझ पर गुस्सा होकर पापा से सब ना कह दे। लेकिन माँ ने कुछ नहीं किया।
मैं तैयार होकर यूनिवर्सिटी के लिए निकल गया। अब मैं माँ को छोड़ना चाहता था। सारा दिन उसी के बारे में सोचता रहा। दोपहर में फिर मैं यूनिवर्सिटी से निकलकर मंदिर में पापा के पास पहुँच गया उनसे मिलने। वहाँ मैंने पापा के साथ खाना खाया और थोड़ा आराम भी किया।
फिर पापा ने मुझे कुछ पैसे दिए और कुछ मिठाई दी घर लेकर जाने के लिए। वो सब कुछ लेकर मैं 4 बजे वहाँ से निकल गया।
घर जाते हुए मैंने अपनी बाइक एक मेडिकल दुकान पर रोकी, और वहाँ से मैंने चॉकलेट फ्लेवर वाले कंडोम का पैकेट, जापानी तेल, वियाग्रा की टैबलेट का पैकेट और गर्भ निरोधक टैबलेट ये सब खरीदे।
ये सब चीज़ें लेकर मैं घर पहुँच गया। मैंने पैसे और मिठाई वाला बैग माँ को दे दिया। फिर मेडिकल दुकान से लिया हुआ सारा सामान छुपा कर रख दिया।
फिर शाम को मैं अपने दोस्त के साथ बाहर चला गया। हम लोग गाँव में रहते हैं, तो वहाँ शाम में सब लड़के मिल कर कुछ न कुछ खेल खेलते हैं।
बारिश के मौसम में खेतों में पानी भर जाता है। तब हमें कबड्डी खेलने में बहुत मज़ा आता है। जब खूब खेलकर हम गंदे हो जाते हैं तो नदी में जाकर नहा लेते हैं।
उस दिन भी हमने ये ही सब किया और शाम के 7 बजे मैं फिर अपने घर आ गया। घर आकर मैंने कपड़े बदले और वही शॉर्ट्स और बनियान पहन लिए।
माँ ने हम दोनों के लिए खाना बनाया और खाना खाकर मैं पढ़ने बैठ गया। माँ ने भी अपने काम करने के बाद वही उनकी मैक्सी पहनी और बिस्तर पर ले गई।
रात के करीब 12 बजे मैंने अपनी किताबें रखीं और चुपके से उठकर माँ को देखने लगा कि वो सोई थी या नहीं? माँ सो चुकी थी। फिर मैंने दबे पैर जाकर कंडोम और वियाग्रा वाला पैकेट उठाकर अपने तकिये के नीचे रख दिया।
उसके बाद मैंने कमरे की लाइट बंद कर दी। फिर रजाई में घुसकर माँ से चिपक गया। जैसे ही मैं माँ से चिपका, तो माँ की गांड मेरे लंड से टच हो गई। उसके कारण मेरा लंड खड़ा होने लग गया।
करीब आधे घंटे बाद मैंने अपनी शॉर्ट्स और बनियान उतार दी। फिर कंडोम का पैकेट खोलकर एक कंडोम अपने खड़े लंड पर चढ़ा दिया अच्छे से। माँ तभी सीधे होकर लेती हुई थी। तो मैंने आहिस्ता-आहिस्ता उनकी मैक्सी ऊपर खिसका दी।
मुझे माँ की चूत दिखाने लगी थी। उनकी चूत पर इतने बड़े-बड़े बाल थे कि मुझे चूत का छेद दिखा ही नहीं। यह सब होने की वजह से मेरा मूड चला गया। फिर मैंने बस अपने लंड को हिलाकर शांत कर दिया, और पानी निकला हुआ कंडोम निकालकर साइड में रख दिया। पर तभी क्यों पता नहीं मैंने माँ का हाथ पकड़ा और अपने लंड पर रख कर सो गया। जब सुबह मेरी आँखें खुली तब मैंने देखा माँ मेरी तरफ पीठ करके सोई हुई थी। उनकी मैक्सी अभी भी उनके पेट तक उठी हुई थी, जिससे उनकी गोरी गोल-गोल गांड मुझे साफ दिखा रही थी।
जितनी माँ की चूत जंगल में खोई हुई थी, उतनी ही उनकी गांड गुलाबी और गोल दिखा रही थी। माँ की गांड देख मेरा लंड फिर से उछाल मारने लगा था। मैं फिर से लंड को लेके हिलाने लगा। अबकी बार मैंने लंड का पानी माँ की गांड पर निकाल कर डाल दिया। उसके बाद फिर से सोने का नाटक करने लगा।
कुछ देर बाद जब माँ उठी और उन्होंने खुला लंड और उनकी गांड पे पानी देखा तो बहुत शॉक हो गई थी। वो तो सोचने लगी थी कि मैंने उनकी नींद में गांड मार ली।
माँ ने जल्दी से उनकी गांड पे पानी साफ किया, और मेरे पास आने लगी। मैं उस वक़्त बहुत डर गया था। मुझे लग रहा था अब तो मैं गया। पर तभी मैं शांति से बिना हिले ले रहा था, और एक-दम थोड़ी सी आँखें खोल कर माँ को देख रहा था।
माँ मेरे पास आई और उसने मेरे लंड पर नज़र डाली। फिर बिना छुए मुझ पर कंबल डाल कर चली गई। मुझे मन में बहुत डर लग रहा था और यही सोच रहा था कि अगर माँ ने गुस्से में पापा को यह सारी बात बता दी तो?
जब माँ किचन में अपना काम करने लगी। तब कुछ देर बाद उठकर मैं नहाकर नाश्ता करने बाहर आ गया। जब मैंने नाश्ता कर लिया, तब माँ मेरे पास आई और मुझे एक थप्पड़ मार दिया और बोली-
माँ: तुमने कल मेरे साथ जो भी किया, अब अगली बार से ऐसे कुछ नहीं होना चाहिए।
प्रेम: सॉरी माँ, आज के बाद ऐसा कुछ नहीं करूँगा।
नष्ट करके फिर मैं यूनिवर्सिटी चला गया और वहाँ से लौट कर आया तो बाहर दोस्तों के साथ खेलने चला गया। खेल कर लौट कर आने के बाद मैंने खाना खाया और पढ़ाई करने बैठ गया। फिर बाद में सो गया।
आधी रात में मुझे लगा कि कोई मेरे कपड़े उतार रहा था। मैंने उस रात भी शॉर्ट्स और बनियान ही पहन रखा था।
जैसे ही मैंने आँखें खोल कर देखा, तो कोई नहीं दिखा। पर मेरे शॉर्ट्स उतरे थे। फिर मैंने सोचा कि हो न हो ये माँ ने ही किया था। पर आज सुबह जो भी हुआ उससे मुझे डर भी लग रहा था।
लेकिन फिर मैंने सोचा अब जो भी होगा देखा जाएगा। मैंने अपने सारे कपड़े उतार दिए और एक चादर ओढ़ कर सो गया। कुछ देर बाद माँ ने मेरे ऊपर से चादर हटा दी और वो मेरे नंगे लंड को सहलाने लगी। लेकिन मैं एक-दम शांत रह कर सोने का नाटक करता रहा।
फिर माँ ने मुझे अपनी तरफ घुमा कर, मेरा लंड हाथ में लेके हिलाने लगी। अब मैं भी उनका इरादा समझ चुका था। तो मैं उठ गया और उनके पास खींच कर उन्हें किस करने लग गया।
आगे की कहानी पढ़िए अगले पार्ट में। मुझसे बात करने के लिए मेल करिए मेरी आईडी पर






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