यह बात आज से एक साल पहले की है मेरे पड़ोस में एक लड़की रहती है जिसे मैं दीदी कहती थी और भी मुझे प्यार छोटे भाई कह कर बुलाती थी उसका नाम कुमारी था वैसे तो हमारी यहाँ बहू हलचल रहती है लेकिन एक दिन हमारे यहाँ के सब लोग किसी की शादी में गए थे तो घर में और पड़ोस में दीदी अकेले थे बारिश का मौसम था मैंने दीदी से कहा थोड़ी चाय बनाओगी तो हमारी रसोई में आ गई और चाय बनाने लगी में दीदी के पीछे खड़ा हो गया और उनको पीछे से पकड़ लिया दीदी को कुछ महसूस नहीं हुआ कि मैं क्या करना चाहता हूँ दीदी और मैंने चाय पी फिर हम बताएँ लगे तापी बहुत ज़ोर से बारिस शोरो हो गई बाहर दीदी ने कपड़े सुखाने के लिए डाले थे दीदी उनको उठाने चली गई बारिस की वजह से सूखे कपड़े गिले हो और दीदी भी भीग गई मैंने दीदी के हाथ से कपड़े ले लिए या उनको तौलिया दिया और कहा अपना बदन पूछ लो दीदी मेरे कमरे में आ गई और अपना बदन पूछने लगी भीगे हुए कपड़े में दीदी का बदन बहुत अच्छा लग रहा था मैंने दीदी को कहा कि कपड़े बदल लो तो दीदी ने कहा मेरे सारे कपड़े भीग गए हैं और मेरे कमरे से मेरे कपड़े ले आओ और साथ ही यह भी कहा कि उनके अंडरगारमेंट्स भी ले आओ यह सुनते ही मुझमें जोश आ गया, मैं दीदी के कपड़े लेके आया और दीदी की ब्रा या पेंटी भी ले आया, मैंने जनभोज कर दीदी से पूछा, दीदी ये ब्रा किस काम आती है, दीदी ने मेरे गाल पर हाथ फेरा और कहाँ नीचे आज तुझे अभी बताती हूँ, या दीदी ने मैंने गेट बंद कर दिया, या मेरे सामने अपने कपड़े उतारने लगी, दीदी ने अपने सारे कपड़े उतार दिए, दीदी मेरे सामने ब्रा या पेंटी में खाली थी, मुझसे भी नहीं रहा, या मैंने दीदी की ब्रा या पेंटी खींच के फाड़ दी, दीदी ने कुछ नहीं कहा, या मेरे कपड़े भी उतार दिए, उस वक़्त दीदी और मैं एकदम नंगे खारे थे, या मेरा लंड दीदी की चूत को देख कर एकदम
खरा हो गया था दीदी ने जब मेरे लंड को देखा तो बोली भैया ये तो मेरी चूत का भरता दाना देगा मैं तुमसे चूत नहीं मरवाऊंगी लेकिन वो सिर्फ देखावा कर रही थी मैंने दीदी को एक धक्का देकर बेड पे गर दिया और उनकी टांगे खोल के उनके बीच बैठ गया मेरा लंड दीदी की चूत पे ठुकरा मर रहा था थे दीदी ने मुझे कहा पहले तुम मेरी चूत के साथ प्यार करो फिर लंड नीचे डालने में दीदी की चूत पे किस करने लगा दीदी को बहुत मज़ा आ रहा था और धीरे धीरे सिसकियां ले रही थी फिर मैं दीदी के मुंह के पास गया और अपना लंड दीदी के मुंह में डाला दीदी मेरे लंड को बहुत अच्छी तरह से चूस रही थी थोड़ी देर चुम्मा चाटी के बाद मैं कुर्सी पे बैठ गया और दीदी को कहा अब आपको इस लंड के ऊपर बैठना है दीदी मान गई और अलमारी से तेल लेके दीदी ने मेरे लंड और अपनी चूत पे ढेर सारा तेल लगाया फिर दीदी मेरे लंड पे बैठने लगी दीदी की चूत इतनी टाइट थी कि मेरे लंड तो नीचे नहीं जा रही थी लेकिन जैसे तैसे मैंने अपने लंड का ऊपर नीचे घोस्या दीदी चिल्ला उठी क्योंकि उनकी चूत बहुत टाइट थी और मेरे लंड 3 इंच छोटा वो झेल नहीं पा रही थी वो उठना चाहती लेकिन मैंने उन्हें पकड़ लिया और अपना लंड घोसने गला दीदी की आँखों से आँसू भी आ गए थे बहुत दर्द हो रहा था दीदी को लेकिन मैंने दीदी की चूत में अपना लंड धीरे-धीरे अंदर बाहर करना शोरो किया और उनकी चूत को मसला फिर दीदी को थोड़ी सी राहत मिली और मैंने अपना लंड दीदी की चूत में अंदर तक पहुँचा दिया फिर तो दीदी को बहुत मज़ा आने लगा अब तो दीदी भी पूरा साथ दे रही लंड अंदर बाहर हो रहा था या बाहर बारिश हो रही थी मेरा तो सपना सच हो गया थे कि इतनी ही बार मैंने दीदी को सपनों में छोड़ा था या आज सच में उनकी चूत मर रहा था 20 या 25 धक्कों के बाद और दीदी एक साथ डिस्चार्ज हो गाय मैंने अपनी वीर्य दीदी की चूत में गिराया। दीदी तो मान नहीं रही बोल रही थी अपना वीर्य नीचे मत गिरना लेकिन मैंने कहा दीदी अगर चोट में वीर्य नहीं गिराया तो मज़ा आया और आएगा बड़ी मुश्किल से दीदी को मनाया और अपना सारा वीर्य दीदी की चोट में गिराया लेकिन जब मेरा वीर्य दीदी की चोट में गिर रहा था तो दीदी के मुँह से चीख निकल रही लेकिन मैं तो उनकी चोट मर कर खो रहा था। दीदी जाने लगी तो मैंने दीदी को पकड़ लिया और कहा दीदी आप बहुत अच्छी हैं मेरा कितना ख्याल रखती हैं मेरे कहने पे आप मेरे से चोट मरवाने के लिए तैयार हो गई मैं आपको कभी नहीं भूल पाऊंगा और वो चली गई और एक साल तक हम दोनों ने कई बार सेक्स किया दीदी को बहुत मज़ा आता था पर अब उनकी शादी हो गई है और मेरा लंड एक चूत सूख रहा चूत जो हो मेरी दीदी की चूत जैसी टाइट और बाल रहित।






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