Wednesday, 15 July 2026

मेरी सेक्सी स्कूल टीचर आंटी की चुदाई

 यह कहानी कुछ महीने पहले की है। मैं ताज़ा ताज़ा बी.एड. का कोर्स खत्म करके कॉलेज से निकली ही थी और मैंने पत्राचार से एम.ए शुरू किया था। मैं अच्छे घर की लड़की हूँ। घर में पैसे की कोई कमी नहीं है। लेकिन फिर भी शुरू से ही इंडिपेंडेंट कोर्ट होने की वजह से मैं अपना पैसा खुद कमाना चाहती थी। बी.एड. का रिजल्ट आने से पहले ही मेरे पिताजी के एक दोस्त के स्कूल में पढ़ने लग गई। यह स्कूल 19वीं क्लास तक था और मैं कम क्वालिफाइड होने पर भी 18वीं क्लास तक इंग्लिश पढ़ती थी। इसकी वजह दो थी। एक तो मैं शुरू से ही इंग्लिश मीडियम में पढ़ती थी और दूसरा जैसे कि मैंने आपको बताया कि मेरे स्कूल का प्रॉपर्टी मेरे पिताजी का अच्छा दोस्त था। और इसी वजह से स्कूल में सब मुझे अच्छे से जानते थे और मैं स्टूडेंट्स की जाम कर पिटाई कर सकती थी।


मैं बहुत ही स्ट्रिक्ट टीचर थी और स्कूल के सबसे ज्यादा बड़े हुए लड़कों को भी जाम कर थप्पड़ लगाती थी। सब स्टूडेंट्स मुझसे डरते थे। हम सब टीचर्स और स्टूडेंट्स स्कूल बसों में ही अपने अपने घर जाते थे। हमारे स्कूल की बसें हमेशा खचाखच भरी होती थीं लेकिन हम टीचर्स को हमेशा बैठने की जगह मिल जाती थी और हमारे स्टूडेंट्स खरे होकर कर जाते थे। सब कुछ ठीक चल रहा था। पर एक दिन छुट्टी के बाद घर जाते वक़्त मैंने देखा कि 11 क्लास की एक लड़की अपने आँखों में आँसू छुपते हुए बस से उतरी और उसकी सहेली ने उसके कान में कहा, “तू घबरा मत कल हम इंग्लिश वाले मम्मी से बात करेंगे, वो उन्हें अच्छी सबक सिखाएंगी।”


मुझे बात कुछ समझ में नहीं आई लेकिन मैंने सोचा के कल जब ये मुझसे बात करेगी तब खुद बा खुद पता चल जाएगा। अब मेरे स्कूल की सभी बड़ी लड़कियां मुझे कभी-कभी अकेले में दीदी दीदी बुलाती थीं और मेरे काफी क्लोज थीं और अपनी कई प्रॉब्लम्स अक्सर मेरे साथ ही डिस्कस करती थीं। इसकी वजह थी उनमें से उम्र में ज्यादा बड़ी नहीं थी। मैं 12th क्लास की लड़कियों से सिर्फ 4 साल ही तो बड़ी थी। अब स्कूल के बाद B.A. और B.Ed करने में सिर्फ 4 साल ही तो लगते हैं।


बालके स्कूल के 12th क्लास के 4-5 बदमाश लड़कों से तो मैं सिर्फ 2 साल ही बड़ी थी क्यों कि वो सब तो कम से कम 2-2 किसी ना किसी क्लास में फेल हो चुके थे। तो अगले दिन जब स्कूल पहुंची तो मैं इंतज़ार कर रही थी कि कब वो लड़कियां आकर मुझे अपनी प्रॉब्लम बताएं और मैं उसे सॉल्व कर सकूं। लेकिन एक दिन बीता दो दिन बीते, फिर पूरा हफ़्ता बीत गया पर उन्होंने मेरे लिए कोई बात नहीं की और मैं भी उसे भूल गए। फिर एक दिन अचानक उसी दिन की तरह वो लड़की फिर रोते हुए बस से उतरी और इस बार वो ज़्यादा ही रो रही थी।


बाल्की बाकी टीचर्स भी उसकी सहेलियों से पूछने लगे के इससे क्या हुआ। इस पर उसकी सहेलियों ने कहा, ”मैडम इसका सर बहुत ज़ोर से दर्द कर रहा है।” उन टीचर्स के लिए बात वो दब गई। लेकिन मुझे इस सब पर विश्वास नहीं हुआ। तो मैं अगले दिन खुद उस लड़की और उसकी सहेली को फ्री पीरियड में अपने कमरे में बुलाया और उससे पूछने की प्रॉब्लम क्या है। कौन बोली, “कुछ नहीं मैडम सब ठीक है।” “मुझसे झूठ मत बोलो”, मैंने कहा, “उस दिन भी मैंने तुम्हें इससे तरह बस से रोते हुए उतारते देखा था और तुम्हारी सहेली तुम्हें कह रही थी कि हम कल इंग्लिश वाले मैडम को यह बात बताएंगे और वो उनकी खबर लेंगी।


मुझसे छुपाओ मत और खुल के बताओ की प्रॉब्लम क्या है?” इस पर वो लड़की फट फट कर रोने लगी। तो उसकी सहेली बोली, “मैडम मैं आपको बताती हूँ के प्रॉब्लम क्या है। आप तो जानती हैं कि हमारी बस में कितनी बहर होती है और हमें करे होकर बस में जाना पड़ता है।” “हाँ! हाँ!” मैंने कहा. “तो मैम प्रॉब्लम यह है कि पिछले एक महीने से वो 12th क्लास के मुश्ताक, वो बास्केटबॉल प्लेयर्स! वो फेलियर्स! हमें बस में रोज़ तंग करते हैं. हम लड़कियों का उन्होंने बस पर सफ़र करना मुश्किल कर दिया है. कभी तो वो हमारे लोअर बैक में उंगली डालते हैं तो कभी


हमारे ब्रेस्ट पर चुन्नी काटते हैं. कल तो उन्होंने हद ही कर दी. कल उन चारों ने हमें कस कर पीछे से पकड़ लिया और ज़ोर से हमारे ब्रेस्ट मसल दिए,” वो बोली. “क्या उनकी यह हिम्मत. मैं आज ही उनकी शिकायत प्रिंसिपल से करती हूँ, और उनकी खुद खूब पिटाऊंगी. और यह सब तुमने पहले क्यों नहीं बताया। और बाकी लड़कियों ने इसकी शिकायत क्यों नहीं की?” मैं बोली। “नहीं नहीं मैडम, आप प्लीज यह बात किसी से ना कहिएगा वरना सब हम पर हसेंगे और हमारी स्कूल में बदनामी होगी और मजाक बनेगा। आप चाहें तो उनकी पिटाई कर दीजिए पर यह बात आप उनसे भी ना कहिएगा कि हमने बताई है वरना वो हमें और तंग करेंगे या फिर बदनाम करेंगे। अभी तो यह बात सिर्फ हमने, आपको या फिर उन लड़कों को पता है जो हमारे आस-पास बस में खरे होते हैं”, वह बोली। “ठीक है, मैं देख लूंगी,” मैंने कहा। उस दिन क्लास में जाते ही मैंने उन चरणों को खड़ा कर लिया और बिना कुछ बताए उनकी जाम कर थप्पड़ परेड की। इतना मारा कि मेरे हाथ दुखने लगे और उनके गैलन पर मेरे थप्पड़ों की वजह से नील पड़ गए। जब ​​क्लास ने पूछा के मैडम आप इन्हें क्यों मर रही हैं तो मैंने कहा, “इन्हें बस में सफर करना सिखा रही हूं।” और वो चारो सिर झुका कर खड़े हो गए। कुछ दिन तक सब ठीक रहा, लेकिन एक दिन फिर वो लड़कियां मेरे पास आईं और रोने लगीं। मैंने उनसे पूछा, “अब क्या हुआ, अब तुम किस बात पर रो रही हो? क्या वो तुम्हें अभी भी तंग करते हैं।” इस पर वो मुझसे बोलीं, “मैडम आपने जब उनकी पिटाई की थी तो कुछ दिन तक सब ठीक रहा लेकिन पिछले दो दिन से वो फिर से हम तंग कर रहे हैं।” “लगता है अब प्रिंसिपल से बात करनी ही पड़ेगी,” मैं बोली। “प्लीज़ मैडम आप प्रिंसिपल से कुछ मत कहिएगा। ये बात अगर फेल हो गई तो हमारा मज़ाक उड़ेगा।


हमारा स्कूल आना मुश्किल हो जाएगा,” वो गिरगिराएं। “तो ठीक है, आज मैं तुम लोगों के साथ बस में खड़ी रहूंगी। अगर उन्होंने कुछ किया तो मैं उनकी वहीं पिटाई करूंगी और उन्हें स्कूल से निकाल दूंगी,” मैंने गुस्से से भर कर कहा। उस दिन मैंने फिर उन चरणों की खूब पिटाई की और छुट्टी के बाद बस में लड़कियों के साथ पीछे खड़ी हो गई। जब मेरे साथी टीचरों ने पूछा तो मैंने कहा कि मैं स्टूडेंट्स के साथ मिक्सअप होने की कोशिश कर रही हूं ता कि यह मुझसे इतना ज्यादा ना डरें। उस दिन सब ठीक रहा। मैं उनके साथ 3-4 दिन बस में खारे होकर सफर कर रही हूं। वो 4 बदमाश हमारे पीछे ही खड़े रहते थे लेकिन उनमें से किसी की हिम्मत नहीं हुई कि कुछ कर सकें। तो कुछ दिन बाद मैं फिर आगे बैठने लगी। उगले ही दिन वो लड़कियां फिर मेरे पास वही शिकायत लेकर आ गई। तो मैं फिर उस दिन पीछे खड़ी होकर सफर करने लगी। दो-एक दिन तक सब ठीक था फिर एक दिन अचानक मुझे ऐसा लगा जैसे किसी ने कोई चीज मेरे पीछे मेरे बटक्स (यानी चूतड़ों) के बीच गुस्सा दिला दी हो।


मैं एक दम कैंप गए। मेरी सारी बॉडी ठंडी पड़ गई और मेरे शरीर के लॉयन खरे हो गए। मैं सारी उम्र गर्ल्स स्कूल और गर्ल्स कॉलेज में ही पढ़ती हूं। मेरे पिताजी मुझे खुद स्कूल/कॉलेज ड्रॉप करके जाते थे और खुद पिकअप करते थे। किसी लड़के को मैंने कभी आँख भर नहीं देखा था। किसी लड़के का मुझे स्पर्श करना तो दूर की बात थी। हलन के मैं गोरी चिट्टी तीखे नैनों वाली एक सुंदर, पतली लड़की थी। मेरी सहेलियाँ अक्सर मुझे कहती थीं कि मैं किसी किस्मत वाले को ही मिलूँगी और जिससे मिलूँगी वो 1 साल तो पहले बेडरूम से ही नहीं निकलेगा, काम करना तो दूर की बात है। पर उस पल मुझे बिजली का झटका लगा। पहली बार मैंने किसी चीज़ को अपने शरीर के एक नाज़ुक हिस्से के अंदर शरारत करते महसूस किया था। मेरे पैर हल्के हो गए और एक पल के लिए मेरे होश उड़ गए, चेहरे का रंग एक दम फीका पड़ गया, गला सूख गया। मैं लड़का कर गिरने लगी, पर फिर बस की सीट पर लगी सपोर्ट को पकड़कर अपने आप को संभालो। मेरे हाथ कैंप रहे थे। लड़कियों ने पूछा, “मैडम आप ठीक तो हैं?” “हाँ मैं ठीक हूँ,” मैंने कहा। लेकिन मेरे चेहरे के उतरे रंग को देख कर


मेरे साथी टीचर्स ने जब यही सवाल मुझसे पूछा तो मैंने कहाँ के शायद मुझे बुखार हो रहा है। उस दिन रात को देर तक मुझे नींद नहीं आई। सारी रात मुझे मेरे छुट्टियों के बीच वो चीज़ सरकती महसूस होती रही। मैं अगले 2 दिन स्कूल नहीं गई। बीमार होने का बहाना कर दिया। जिस दिन मैं स्कूल गई भी उस दिन मैं आगे अपनी सीट पर जाकर चुप चाप बैठ गई। तो वो लड़कियां उतरे से चेहरे के साथ मेरी तरफ देखती रही। और जब वो दोनों बस से उतरी तो दोनों की आँखें भरी हुई थीं। मुझे टीचर्स ने भी पूछा, “आज अपने स्टूडेंट्स के साथ खरे नहीं होना क्या? क्या बात है? सब ठीक है?” “सब ठीक है, बस थोड़ी वीकनेस लग रही है,” मैंने बहाना किया। अगले दिन वो लड़कियां फिर मेरे पास आईं और मुझसे बोली, “मैम आपको क्या हुआ? मैडम जब से अपने हमारे साथ खरे होना बंद किया है उन लोगों ने हमें फिर तंग करना शुरू कर दिया। जब आप हमारे साथ खड़ी होती थीं तब सब ठीक था। मैडम आप प्लीज़ हमारे साथ पीछे खड़ी हो जाया कीजिए! प्लीज़!” मैंने कहा, “अच्छा ठीक है!” और वो चली गई।


लेकिन मैं सारा दिन टेंशन में रही और उस दिन का इंतज़ार याद करती रही। शाम को किसी तरह हिम्मत जुटाकर मैं पीछे जाकर खड़े हो गए। छोटा सा सफर आराम से कट गया और मैं नशे से हो गई लेकिन मेरा स्टॉप आने से 2 मिनट पहले ही किसी ने फिर पीछे से मेरे चुट्टनों में हाथ दे दिया और इस दफा अच्छी तरह एक झटके में मेरे चुट्टनों के बीच बीच नीचे से परेशान हुए ऊपर तक ले गया। मैं एक दम से पीछे पलटी तो सभी लड़के इधर-उधर देख रहे थे और मुझे पता भी नहीं चला कि ये किसने किया है। मेरे साथ खड़ी लड़कियों ने पूछा, “मैडम सब ठीक है?” “हाँ!” मैंने जवाब दिया। उस रात मैं गुस्से से भरी सो भी ना पाई। अगले दिन क्लास में जाते ही मैंने उन चारों की खूब पिटाई की और इस दफा मैंने क्लास के पूछने पर कहाँ के इन लोगों ने कितने दिनों से मुझे कम नहीं दिखाया। उस शाम बस में चढ़ते ही जब लड़कियों ने मुझे पीछे बुलाया तो मैं कॉन्फिडेंस के साथ उन लड़कों को घूरती हुई पीछे जाकर खड़ी हो गई। अब इतनी बुरी तरह पिटाई होने के बाद भला वो क्यों नहीं सुधरेंगे। पर बस चलने के थोड़ी देर बाद ही किसी ने मेरे चुट्टों में फिर हाथ दिया। जब मैंने पीछे मुड़कर देखा तो इस बार चारों ने मेरी आँखों में देखा और मुस्कराए।


मैं आगे देखने लगी। कुछ पल बाद उन्होंने फिर मेरे चुट्टों में हाथ दिया तो इस दफा में थोड़ी सड़क कर आगे हो गए। उन्होंने फिर हाथ दिया तो मैं थोड़ी और आगे सड़क गई। ऐसा 4-5 बार हुआ। सारी रात मुझे मेरे चुट्टनों में उनके हाथ ही मेहसूस होते रहे। अगले दिन मैंने फिर उनकी पिटाई कर दी और बहन बनाई कि इन्हें अभी भी मुझे कम नहीं दिखाया। शाम को बस में इस बार उन्होंने मुझे छुआ भी नहीं। मैं बहुत खुश थी। सब ठीक चलने लगा। लेकिन कुछ दिन बाद फिर एक दिन बस में उन्होंने मेरी गांड में हाथ डाला तो मैं थोड़ी आगे सरकी। लड़कियों के पूछने पर के क्या हुआ मैंने कहाँ के कुछ नहीं। लेकिन अब मुझे गुस्सा आ गया था।


मैंने ठान ली के अब की बार मैं आगे नहीं सरकुंगी और देखती हूँ इनमें कितनी हिम्मत है। आखिर कब तक ये ऐसे ही उंगली देते रहेंगे। इस बार जब मेरे चूतड़ में किसी ने हाथ दिया तो मैंने वहां से नहीं हिली। उसने 2-3 बार फिर हाथ दिया तो भी मैं नहीं हिली। तो इस पर उसने हाथ मेरे चुत्तरों पर टीका कर ही रख लिया और मैंने भी अपने चुत्तरों के बीच उसे दबा लिया। 2 मिनट तक ना वो हिला ना मैं। जब मैंने पीछे देखा तो उनमें से सबसे ज्यादा बड़ा लड़का मेरे पीछे खड़ा था। मेरे पीछे मरने पर भी उसने हाथ नहीं हटाया, बलके उसे सरकता हुआ, मेरी टांगों के बीच नीचे, मेरी योनि तक ले गया और उसे स्पर्श किया। मेरे एक बार फिर रोंगटे खड़े हो गए और मेरा रंग उड़ गया। मेरे पेट में बाल सा पड़ा और ऐसा लगा।


जैसे मेरे पेट के अंदर कोई नल खुल गया हो। अब मैं जंचुकी हूँ के उस पल में पहली बार झाड़ी थी। और झरने के बाद मुझे अचानक ही बहुत अच्छा सा लगा और मेरा रंग फिर ठीक हो गया। उस रात मैं बार-बार बस का सीन याद कर सोचती रही। मैंने पहली बार अपने सारे कपड़े उतार कर अपनी योनि को स्पर्श किया। जब मैं सोई तो सपने में मुझे वही बस में उस लड़के बार बार मेरी योनि को चूना ही दिखाया और मैं सोते हुए भी दो बार झड़ गई। पर टीचर हूँ इस लिए रुआब रखना भी ज़रूरी है। इस लिए पहली बार न चाहते हुए मैंने उनकी पिटाई की और मुझे मन में बहुत अफ़सोस हुआ। उस दिन जब बस में गए तो उन्होंने मुझे नहीं छुआ। 3-4 दिन तक उन्होंने मुझे नहीं छुआ। पर पता नहीं क्यों अब पहली बार मैं चाहती थी कि वो मुझे छूएं। एक दिन बहुत बारिश पड़ रही थी तो स्कूल में बच्चा कम आए थे तो स्कूल में जल्दी छुट्टी हो गई। उस दिन बस में भीर नहीं थी। मैं और लड़कियां आसानी से कहीं भी खा सकती थीं लेकिन पता नहीं क्यों हम तीनों पीछे उन लड़कों के पास जाकर खड़ी हो गई।


शायद मैं चाहती थी कि वो मुझे छूएं। पहली बार मुझे गुस्सा आया था कि एक लड़के के स्पर्श में क्या जादू होता है। पर भीर न होने की वजह से वो हम से थोड़े पीछे खाए थे। पर बस चलने के थोड़ी देर बाद ही वो हमारे करीबी आ गए। मैं लड़कियों से बातें करने में बिज़ी थी इस लिए हमें पता नहीं चला। अचानक मुझे गुस्सा आया कि कोई लड़का एक दम मेरे साथ चिपक कर खड़ा हो गया हो। मैंने पीछे देखा तो वो बोला, “मैडम आप ज़्यादा पीछे आ गई हैं थोड़ी आगे सड़क सकती हैं।” उस पल मेरा ध्यान गया कि दर असल मैं और लड़कियां ही आपस में बातें करते हुए पीछे उन लड़कों तक सड़क गई थी, मैं और लड़कियां एक दूसरे की तरफ देखकर शाम से मानो पानी पानी हो गई। तब मुझे एहसास हुआ कि मुझे और इन लड़कियों को इन लड़कों से उंगली करवाना अच्छा लगता है। हम थोड़ा सा आगे सरकिन तो इस बार वो लड़के भी आगे सरके और एक लड़के ने हल्के से मेरी गांड में हाथ दे दिया। मैं भी इस बार थोड़े पीछे सरक गई तो उस का हाथ अच्छी तरह मेरी गांड में घुस जाए। मैंने अपने चुत्तरों को थोड़ा खोला फिर बंद किया। तो इस बार वो लड़का मेरे चूतड़ों में हाथ फेरने लगा। फिर उसने कान में कहा, “मैडम अगले स्टॉप पर पीछे की सीट खाली हो रही है, आप मेरे और मेरे दोस्त के बीच मैं बैठ जान। बाकी दोनों लड़के और लड़कियां आगे खाली हो जाएंगी ता के किसी टीचर को आगे से पता ना चले।” मैं कुछ नहीं बोली। मैंने देखा के बाकी दोनों लड़कियां असल में मजे से दूसरे दो लड़कों का हाथ अपनी गांड में ले रही थी। वो मेरी तरफ देखकर मुस्कुराने लगी। तब मेरे पीछे वाले लड़के ने मेरे कान में कहा, “यह दोनों तो पिछले दो साल से हम से चुद रही मैडम आप इनकी शिकायत ना की जिए। इनका काम अब पूरा हो गया अब इन्हें अगले संडे मजे से छोड़ेंगे। आज आपका नंबर है।” मैं कुछ ना बोली और चुप रही। अगले स्टॉप पर पीछे वाली सीट खाली हुई तो मेरे पीछे वाला लड़का दुल्हन की तरफ बैठ गया, मैं चुप चाप बीच में बैठ गई दूसरा लड़का मेरे बन्हिन तरफ बैठ गया। बाकी दोनों लड़के और लड़कियां हमारे आगे खड़ी हो गई।


बस चलने लगी तो मानो मेरे बगल वाले लड़कों को जैसे खुली चूत मिल गई हो मेरे साथ खेलने की, मेरे खजाने लूटने की। दंहिनी तरफ वाले लड़के ने एक बाजू मेरे सर के पीछे सीट पर पास दी और दूसरे हाथ को मेरी नरम और बारिश की ठंड में मेरे जिस्म की गर्मी की वजह से गर्म दंहिनी जंग पर रख दिया और उसे सहलाने लगा। बनीनी और वाला लड़का अपने मेरे तरफ वाले हाथ से मेरी बनीनी जंग को सहलाने लगा। मेरी साँसें एक दम से तेज़ और गरम हो गई और मेरा सर हल्का हल्का मेहसूस होने लगा। पहली बार किसी लड़के का स्पर्श मेरी जांघों पर हुआ था। मैंने आँखें बंद कर लीं। दोनों लड़कों ने अपने हाथ मेरी जांघों पर ऊपर की तरफ सरकाए और मेरी कमीज के नीचे से सरकते हुए मेरे पेट के तरफ बढ़ा दिए। मैंने अपनी आँखें बंद कर लीं। तभी एक लड़के ने


अपने हाथों को मेरी जांघों के बीच मेरी योनि की तरफ सरकाने की कोशिश की तो मेरे मुँह से हल्की सी सिसकी छूट गई और मैंने अपनी दोनों टांगों को ज़ोर से इकठा कर लिया और अपने हाथों से दोनों लड़कों के हाथों को पकड़ लिया और मेरे मुँह से ज़ोर से एक सांस निकली। इस पर मेरे दाढ़ी वाले तरफ वाले लड़के ने अपने होठों को मेरे होठों पर रख कर ज़ोर से से लिया और मेरे होठों को चूसने लगा। मेरी तो मानो जान ही निकल गई हो। मेरे होश उड़ गए। मेरा सिर बिल्कुल हल्का हो गया, मेरे शरीर के लोइयां खड़े हो गए और वो मेरे होठों को चूसता रहा। यह मेरी ज़िंदगी का पहला चुम्बन था। उसने मेरे सर के पीछे वाले अपने हाथ से मेरे सर को पकड़ कर हमारे होठों को कस कर देखा। और उसी पल मेरी दाढ़ी वाले तरफ वाले लड़के ने अपने दूसरे हाथ से मेरी चाटी पकड़ ली और उसे मसलने लगा।


मेरी सांस फूलने लगी और मैंने अपने दोनों हाथों से उसके हाथ को पकड़ कर रोकने लगी तो दोनों लड़कों ने मेरी जांघों वाले हाथों से हल्का सा ज़ोर लगाकर मेरी टांगों को खोल दिया और दाढ़ी वाले लड़के ने तपाक से अपने हाथ मेरी पजामी के ऊपर से मेरी योनि पे रख दिया और उसे ऊपर से ही सहलाने लगा। मेरे पेट में अकड़न पैदा हुई और फिर एक ज़ोर का झटका लगा और मेरे पेट में फुवारे फूटने लगे। मैं झड़ चुकी थी। इस पर उस लड़के ने मेरे होंठ चूसना बंद कर दिया और मेरी सांस भी ठीक हो गई। फिर दूसरा लड़का मुझे किस करने लगा, तो पहले वाला बोला, “वाह भाई मज़ा आ गया आज तो अंग्रेजी वाली को अच्छे से चूसा है और अब अच्छे से छोड़ेंगे भी। साली मरी बहुत ज़ोर से है। आज उतने ही ज़ोर से हम इसकी मरेंगे।” और फिर वो बारी बारी मुझे चूमने लगे। थोड़ी देर बाद जो लड़के हमारे सामने खड़े दूसरी लड़कियों की गांड में उंगली कर रहे थे उन्होंने कहा, “चलो बहुत हुआ अब हमें भी तो थोड़ा मैडम का मज़ा लेने दो। चलो तुम इधर आ कर इन लड़कियों की मम्मी को थोड़ा मसल दो। “आज ठंड में ये भी बहुत गरम है।” फिर उन चारों ने जगह बदल ली। अब दूसरे दोनों लड़के मुझे किस करने और मेरी चूत और योनि को सहलाने लगे। फिर उनमें से एक ने मेरी पजामी का नाला खोलना शुरू किया तो मैंने अपने दोनों हाथों से नाला पकड़ लिया तो दोनों लड़कों ने मेरी चुनरी के नीचे से मेरी कमीज के गले में से हाथ डालकर मेरी एक एक ब्रेस्ट पकड़ ली और उन्हें मसलने लगे। मैं पूरी मदहोश हो चुकी थी और मैंने अपने हाथ दोनों के एक एक जांघ पर रख दिए और उनके किस के बदले में उन्हें किस करने लगी। बड़े अजीब पर मज़ेदार चुम्बन थे। हर बार जब वो मुझे छूते तो अपनी जीभ मेरे मुँह में डाल देते। चारों लड़कों ने शायद पोलो मिंट बहुत खाया था इस लिए उन्हें किस करते हुए मुझे मीठा मीठा लग रहा था। तभी मोका पाकर उनमें से एक ने मेरी पजामी का नाला खोल दिया और मेरी पजामी और पैंटी को एक साथ नीचे खींचने लगा। पता नहीं मुझे क्या हुआ मैंने भी अपनी गांड सीट से ऊपर उठा दी और उन्होंने मेरी पजामी और पैंटी मेरे घुटनों तक खींच दी।


फिर उसने अपनी उंगली को अपने मुँह में डाल कर गेला किया और मेरी चूत के हल्का सा अंदर ऊपर ऊपर घूमने लगा। हाय माँ! मैं तो पागल सी हो गई मेरे मुँह से तेज़ तेज़ साँसें निकलने लगी। और में उसी पल फिर झड़ गई। मेरे झड़ते ही उसने मेरी पैंटी और पजामी को ऊपर कर दिया और मेरा नाला दुबारा बाँध दिया। फिर वो बोला, “मैडम आप घर फ़ोन कर दीजिए कि आप अपनी सहेली के घर जा रही हो और हमारे स्टॉप पर ही उतर जान। वहाँ पर हमारी काले शीशे वाली वैन खड़ी है पार्किंग में। हम हमारे खेत चलते हैं। फिर शाम को हल्का सा अँधेरा होते ही आपके मोहल्ले के पास छोड़ देंगे।” मैंने कुछ नहीं कहा और चुप चाप अपने पर्स से मोबाइल निकाल कर मेरे घरवालों को SMS कर दिया। जब उनका स्टॉप आया तो मैं वो उतर गई। मेरे साथी टीचर ने पूछा, “अरे तुम कहाँ छुपी बैठी थी और तुम यहाँ क्यों उतर रही हो?”मैंने कहा, “जी मैं यहाँ अपनी एक सहेली के घर जा रही हूँ, वो कुछ दिन पहले ही हॉस्टल से वापस आई है। आज किस्मत से छुट्टी हो गई तो मैंने सोचा उसे मिल लूँ।” और मेरा थोड़ा सर दर्द कर रहा है, इस लिए पीछे की सीट पर लेट कर थोड़ा सो गई थी।” अरे आज कल की लड़कियां कुछ खाती पीती तो हैं नहीं, फिर थोड़ा मौसम बिगड़ते ही बीमार हो जाती है। अभी कुछ दिन पहले भी यह बीमार हो गई थी। तेरी माँ से बोलूंगी कि तेरी लड़की को कुछ अच्छा खिला कर, कैसे सुख के मरी जा रही है!” उनमें से सबसे बड़ी टीचर जो मेरे दादाजी को जानती थी वो बोली। “जे आंटी ज़रूर बता देना। पर मैं इतनी भी कमज़ोर नहीं हूँ। आप मुझे कभी अपनी क्लास के मुश्ताकों की पिटाई करते देखना, फिर पता चलेगा आपको,” मैं हँसते हुए बोली और बस से उतर गई। से उतरकर मैं पीछे की तरफ चल पड़ी और एक साइड वाली गली में मुड़ गई और एक तन्हा स्पॉट पर जाकर खड़ी हो गई। कुछ ही पल में एक काले शीशों वाली वैन आ कर मेरे सामने रुकी और उसका दूसरी सीट वाला दरवाज़ा पीछे सरका। उससे मेरा स्टूडेंट बोला, “अंदर आ जाओ मैडम।” अंदर दो लड़कों के बीच में एक जगह खाली थी और दो लड़के गाड़ी में आगे बैठे थे। जैसे ही मैं गाड़ी के अंदर घुस कर बैठने लगी, दूर वाले लड़के ने मुझे कमर से पकड़कर ज़ोर से अपनी गोद में खींच लिया।


दूसरे ने वन का दरवाज़ा बंद किया और वन चल पड़ी। मैं जिस लड़के की गोद में बैठे थी उसने अपना एक हाथ मेरे बाजू में से निकाल कर मेरी छाती पर रख दिया और उसे ज़ोर से रगड़ने लगा और दूसरा हाथ उसने मेरी जांघों के बीच मेरी चूत पर रख दिया और उसे प्यार से मसलने लगा। दूसरे लड़के ने मेरे पेंसिल हील वाली जूती वाले पैरों को पकड़ा और मेरी टांगों को अपनी तरफ खींच लिया। अब मेरी टांगें उसके अगल बगल थीं और वो मेरी टांगों के बीच। “साली रंडी! कुट्टी! क्लास में बहुत मरी है ना आज तेरी गांड ना फाड़ दी तो हम एक बाप का ना कहना।” यह कहते ही उसने मेरे होठों को अपने होठों से सी लिया और मेरे निचले होठों को काटने लगा। दूसरे वाले मेरे कपड़ों को और मेरी चूत को ज़ोर से मसलने लगा और उसने ज़ोर से अपने दांत मेरे सूट में बाहर निकल रहे थोड़े से कंधे वाले भाग पर गाड़ दिए। मेरे मुँह से गाल और सिसकी एक साथ निकली। उस एक पल में मुझे दर्द और मज़े का एक साथ ऐसा एहसास हुआ कि मेरे पेट में बाल सा पड़ा और मैं उसी शान झड़ गई। इतने में उस लड़के का खेत जो ज्यादा दूर नहीं था वो आ गया। उनके खेत में पानी की मोटर के साथ एक ही कमरा था। उसके बाहर 3-4 मजदूर बैठे थे। आगे वाले लड़के ने गाड़ी से उतारते ही कहा, “ओए! आज तुम सब की छुट्टी है तुम सब घर जाओ अभी।” “जी बाबूजी!” ऐसा बोलकर वो सब जाने के लिए उठे। इतने में गाड़ी के पीछे वाली सीट का दरवाज़ा खोलकर एक लड़का मुझे गोद में उठाए बाहर निकला। “अरे ये तो वो आपके स्कूल वाली मैदूम है ना! वो बड़ी कोठी वाले सेठ जी की लौंडी? इसको छोड़ने लगे हो बाबा। भाई अपने तो हमारा दिल खुश कर दिया! ऐसी मक्खन जैसी चिकनी गोरी कहाँ मिलेगी और वो भी अपनी ही मस्तानी! जियो बाबू जियो! और खूब जम कर चोदना! रंडी बना देना आज साली को! और तू घबरा मत मस्तानी हम किसी से नहीं कहेंगे कि तू इस मोटर पर किससे चूड़ी है!”


एक मजदूर बोला। “अच्छा अच्छा अब तुम जल्दी जाओ यहाँ से,” एक लड़का बोला। “जाते हैं बाऊजी पर एक तकलीफ हो जाएगी आपको। मोटर पर जो चारपाई है ना वो टूट गई थी इस लिए बनने के लिए गए हुए हैं। आपको इसके अंदर कमरे में जो सूखे चारे का ढेर पड़ा है उसी पर छोड़ना पड़ेगा।” वो मजदूर जाता जाता बोला। उस एक पल में मेरे को एहसास हुआ कि आज मैं कितनी बिगड़ गई हूँ और मुझे अपने पर शर्म आने लगी, लेकिन 4-4 लड़कों से एक ही साथ, खेत में सूखे चारे पर छुड़ाने के बारे में सोच कर मेरी कामुकता बढ़ गई। तब तक वो लड़का मुझे गोद से नीचे उतर चुका था। मैं खुद ही अपने आप उस मोटर के साथ बने कमरे के दरवाज़े में घुस गए और पीछे मुड़कर देखा तो चारो लड़के मेरी तरफ देखकर हस पड़े। “बड़ी जल्दी है भाई


मैडम को चुदने की आज, तो फिर शुरू हो जाए,” एक ने कहा और सब हस पड़े। "हाँ हाँ जल्दी चलो," दूसरा बोला। "अरे पहले मैडम से तो पूछ लो कि हम से छुड़ाना है के नहीं," तीसरा बोला। "क्यों मैडम हमसे चुदोगी," एक ने सवाल किया। मैंने शर्मा कर सिर नीचे कर दिया और दरवाजे की तरफ खड़ी हो गई, जैसे उनका कमरे में स्वागत कर रही हूँ। "चलो भाई हरी झंडी मिल गई," एक बोला। कमरे में घुस गए और दरवाजा अंदर से बंद कर दिया और एक मैडम सी लाइट वाला बल्ब जला दिया। एक ने आ कर मुझे पीछे से दबा लिया और मेरी गाल और गर्दन को पीछे से चूमने लगा। तो दूसरी उम्र से मेरे बिल्कुल साथ बैठकर खड़ा हो गया। मुझे उसकी पैंट में से कुछ मोटा-मोटा सा अपनी पीठ पर चुभता हुआ मेहसूस हुआ। वैसा ही कुछ मोटा-मोटा मुझे अपनी पीठ पर पीछे वाले से मेहसूस हो रहा था। दूसरे दो लड़के मेरे अगल-बगल खड़े बैठ कर मेरे पेंसिल हील वाले सैंडल खोल रहे थे। सैंडल खुलते ही पहले एक ने मेरा पैर उठा कर एक सैंडल निकाला फिर दूसरे ने दूसरा पैर उठा कर दूसरी सैंडल उतारी। पीछे वाले ने मुझे कंधे से पकड़ कर और आगे वाले ने टांगों से पकड़ कर उठा लिया और सूखी घास पर ला दिया।


अब उम्र वाला मेरे ऊपर लेट गया और मुझे गैलन पर, होठों पर, गर्दन पर सब जगह किस करने लगा। फिर वो अपनी नाक रगड़ता हुआ मेरी गर्दन से मेरी चूत के बीच में से और पैठ पर से होता हुआ मेरी चूत पर नाक रगड़ कर मेरे ऊपर से नीचे उतरा तो दूसरा मेरे ऊपर चढ़ गया और वैसे ही करने लगा। पहले वाला अपने कपड़े उतारने लगा। ऐसे चरणों ने बार-बार किया और आप चरणों मेरे सामने नंगे खड़े थे। मैंने देखा के उन सब की पेशाब व पाइप जिससे हम बहुत बुलाते हैं वो फुल कर बड़ी हो गई थी और काफी कड़ी कड़ी लग रही थी। मैंने छोटे बच्चों को नंगा देखा है और उनकी बहू तो बहुत छोटी और ढीली ढीली होती है। पर इनकी कुछ अलग थी। “देख क्या रही है मैडम ये हैं तेरे स्टूडेंट्स के लौड़े जो अब हमारी सेक्सी सुंदर और हद से ज्यादा स्ट्रिक्ट टीचर जिसने मार मार कर हमारे गाल सुजा दिए उसकी चूत को फाड़ेगी,” उन्हें से एक बोला और ऐसा कहकर मेरे ऊपर लेट गया और मुझे चटनी चुनने और चूमने लगा। उसकी बहू (जिसे वो लौरा कहता था) मेरी चूत को कभी कभी छू रहा था तो मुझे एक बिजली का एहसास होता था। फिर उसने मेरे सूट का पलड़ा ऊपर उठा कर मेरी पजामी का नाला खोला और मेरी पजामी को खींच कर उतार दिया और पीछे फेंक दिया। फिर दूसरे ने मुझे कड़े से पकड़कर बिठा दिया और मेरी दोनों तरफ टांगें खोल कर मेरे पीछे बैठ गया। उसका लौरा मेरी पीठ छू रहा था। उसने मेरी कमीज के पीछे से ज़िप करके मेरी कमर तक सारी की सारी खोल दी और मेरी कमीज उतार कर फैंक दिया। अब दो लड़के मेरे पैरों को चाटने और चूमने लगे और धीरे-धीरे मेरी टांगों को चूमते, चाटते और कटते हुए मेरी चूत की तरफ बढ़ने लगे। एक मेरी तरफ बैठा मेरे बाजू को चूम, चाट और कर रहा था। मेरे पीछे वाला मेरी पीठ को चूम और चाट रहा था। तभी मेरी टांगों वाले लड़कों ने मेरी पैंटी और मेरी पीठ वाले ने ब्रा खोल कर एक साथ उतार दी। अब मैं उनके सामने बिल्कुल नंगी थी।


मुझे बदन पर बाल अच्छे नहीं लगते इस लिए मैं वैक्सिंग करके शरीर के हर उससे बाल उतार देती हूँ। “अरे मैडम साली तू तो मक्खन से भी ज्यादा चिकनी और गोरी है और तेरे गोल गोल बूब्स कितने प्यारे हैं,” एक बोला। “आज साली रंडी का सारा दूध पी जाएंगे और चूत फाड़ दे देंगे। साली क्लास में बहुत मरती और जलील करती है। आज इसकी चूत मरेंगे,” दूसरा बोला। “ओए! गाड़ी मेरी, इसको लड़कियों की हेल्प से फंसाने का प्लान मेरा, यह खेत मेरे बाप का, तो इसकी सील भी पहले मैं ही तोड़ूंगा!” उनमें से सबसे बदमाश और सबसे मोटी बहू/लौर वाला बोला। दूसरे पीछे हट गए तो वो मेरे ऊपर लेट गया। मेरी पीठ पर सूखा चारा रगड़ खा रहा था पर मेरे अंधेर की हवास मुझे इसका एहसास भी होने नहीं दे रही थी। हम दोनों एक दूसरे को किस करने लगे। मैं उससे लिपट गई और वो मुझे चूसने लगा। उसने मेरे बूब्स


चूस, मेरे पेट और नाभि को चाटा, फिर दोनों हाथों से मेरे घुटने पकड़कर मेरी टांगें खोल दीं और मेरी चूत चाटने लगा। मैं भूलभुलैया में पागल हो गई और मेरे मुँह से सिसकियाँ निकलने लगीं। मेरा पैर अकड़ने लगा और मेरे अन्दर एक बार फिर फुवारे फूट पड़े। अब उसने मेरी टांगों को नीचे रखा और मेरी टांगों के बीच आ कर अपने लौड़े को मेरी चूत पे रख दिया। “ओए कंडोम नहीं डालेगा क्या!” एक बोला। “साला कंडोम लाया ही कौन है!” वो बोला। देख अब तेरे को थोड़ा दर्द होगा। सिर्फ कुछ देर के लिए होगा फिर वो ठीक हो जाएगा और तुझे बहुत मज़ा आएगा। मैं देख रहा हूँ तेरी सील नहीं टूटती है। चल तेरे को स्वर्ग की सैर कराता हूँ। चल रंडी साली कुतिया मैडम!” वो मुझे बोला और उसने अपना लौरा मेरी चूत में डालना शुरू किया। पर कुंवारी चूत में लौरा इतनी आसानी से नहीं जाता।


उसने ज़ोर लगाया तो मेरे सील टूटने लगी। मेरे दर्द के मारे चीक निकल गई, उसने अपनी झांटों से मेरे होठों को दिया और फिर और ज़ोर से अपना लौरा मेरी चूत में ढकने लगा। ऐसा लग रहा था जैसे किसी ने गरम गरम लोहे की सलाख मेरी चूत में घुस दी हो मैं सर भी हिला नहीं पा रही थी। मैं उसके बदन के नीचे कुचली पड़ी झांट पता रही थी और वो था कि मेरी चूत फाड़ने पे आमादा था और मेरा चिकने का हक भी छीन रहा था. लेकिन उसका मोटा लौड़ा मेरी एकदम टाइट कुंवारी चूत में घुस ही नहीं पा रहा था. तो उसने मेरे होठों से होठों को हटा दिए, मेरी कमर को अपने दोनों हाथों से पकड़ा और मुझे ज़ोर से अपनी तरफ खींचने लगा. मेरी टांगें झटपट रही थीं और मैं बे-तहाशा चीखने लगी. “और चिल्ला साली रंडी और चिल्ला. तुझे कहा था ना के आज अगर तेरी चूत न फटी तो एक बाप ना कहना. साली क्लास में बहुत मरती है ना!” वो बोला. “प्लीज़ मुझे छोड़ दो. आआआह! प्लीज़ इसे बाहर निकालो!” मैं गिरगिरयी.


चारों हंसने लगी. “अभी बोल रही है छोड़ दो. पर जब दर्द चला गया और मजा आने लगा तो प्यारी मैडम आप ही कहोगी, मुझे छोड़ दो! एक बोला. उसने थोड़ा और ज़ोर लगाया तो उसका सारा सरिया मेरी कुंवारी चूत की सभी दीवारें तोड़ता हुआ मेरी चूत की गहराई तक चला गया. अब थोड़ा दर्द था. वो थोड़ा रुका. फिर उसने जब लौरा बाहर निकालना शुरू किया तो दर्द फिर शुरू हो गया. फिर वो अपने लौरे को अंदर बाहर करने लगा. कब मेरा दर्द खत्म हुआ, कब मेरी चीखें, गरम आँखों में बदल गई और कब मेरी चटपटी रही टांगें खुद बा खुद उसकी कमर पर लिपट गई, मुझे इसका पता भी नहीं चला. वो सच कह रहे थे थोड़े दर्द के बाद मुझे ऐसा मज़ा आने लगा के दिल करता था कि ये खत्म ही ना हो. और कम्बख्त ये खत्म भी कहा हो रहा था. वो मेरे स्कूल का सबसे तकदा बास्केटबॉल प्लेयर कहाँ थकने वाला था.पता नहीं कितनी दफा मेरा पेट अकड़ा, पर जब भी अकड़ा मेरी टांगें उसकी कमर पर कस गई और फिर जब मैं झड़ जाती तो मेरी टांगें भी उसकी कमर पे ढीली हो जाती। पर वो कम्बख्त बड़ी देर बाद झड़ा। और मेरे अंधेर कहीं दूर तक झड़ा। मुझे मेरे अंधेर कहीं गरम फुवारा झूठ ता ही महसूस हुआ। वो मेरे ऊपर गिरा, फिर संभाल मुझे थोड़ा क्या किया फिर मेरे ऊपर से हटा। मैंने देखा के मेरी गांड के नीचे और आस-पास की सूखी सोने रंग की घास अब मेरी चूत के खून से लालो लाल हो चुकी थी। मैं थक चुकी थी। पर अभी तो शुरुआत ही थी। वो उतरा तो दूसरा हटा कट्टा मेरा स्टूडेंट जिसे मैं सबसे ज्यादा नफ़रत करती थी और जिसकी सबसे ज्यादा और खतरनाक पिटाई कर रही थी वो मेरे ऊपर आ कर लेट गया और मेरे गैलन को चूमते हुए बोला, “मेरी प्यारी मैडम अब मेरी बारी है। आज मुझे कुछ पढ़ाएंगी नहीं। ओह सॉरी मैं तो भूल ही गया था। आज तो मैंने आपको सिखाना है कि अपनी प्रिया स्टूडेंट की रंडी कैसे बनती है।” और उसने मेरे होठों को गहरा चूमा। वो मुझे चूम भी रहा था और एक हाथ से मेरी चाटी मसल रहा था और एक हाथ से मेरी कमर से साइड को खिलते हुए मेरी बाजू सहला रहा था। मुझसे रहा न गया और मैं उससे लिपट


गए और उसे किस करने लगी, “आह तुम मेरे सबसे प्यारे स्टूडेंट हो गए हो आज,” पता नहीं कहाँ से मेरे मुँह से निकला। मैंने उसकी चाटी को क्या किया तो उसने मुझे मेरे सर के गुब्बारों से पकड़कर पीछे किंचित और मेरी गर्दन पर क्या किया। मुझे उल्टा करके मेरी पीठ चाटी मेरी गर्दन को पीछे से क्या किया। मेरे कान में भोला, “उसने तुम्हारी कुंवारी चूत फटी, तो अब मैं तुम्हारी कुंवारी गांड मारूंगा।” ऐसा कह कर उसने मुझे मेरी कमर से पकड़ कर मेरे चूतड़ ऊपर उठा लिए। अब मैं अपनी कोहनी और सर के बाल पर आगे से और घुटनों के बाल पर पीछे से थी और मेरी गांड हवा में झूल रही थी। उसने दोनों हाथों से मेरे चूतड़ पकड़कर उन्हें खोका, एक उंगली को थुक लगाकर मेरी गांड पे रगड़ा। मुझे समझ नहीं आ रहा था कि क्या हो रहा है। क्या वो वही करने जा रहा है जो मैं सोच रही हूँ।


मैं डर गई। मैंने अपनी टांगों के बीच से मेरी गांड के पीछे लटक रही थी उसके दो गेंदों को देखा और उसके लौड़े को देखा जो पहले वाले के लग भाग घबरा ही था। उसने मेरी कमर को दोनों हाथों से पकड़ा, अपना लौड़ा मेरी गांड के मुँह पर रखा और मुझे अपनी और खींचा और लौड़ा मेरी तरफ ढका। मेरी चीखें निकल गई। उसका लौड़ा अभी आधा इंच भी अंदर नहीं गया था कि मेरी गांड फट के हाथ में आ रही थी। मैं फूट फूट के रो रही थी और चिल्ला रही थी। मैं घुटनों और कोहनियों के बाल आगे भगाने की कोशिश कर रही थी पर उसकी मजबूत भुजाएं मुझे अपने लौड़े की तरफ खींच रही थीं। “कहाँ जा रही है मैडम मेरी जान। बड़ा दुख दिया है तुमने क्लास में आज मेरी बारी है। चल इधर आज मेरी जान,” वो बोला। जैसे कई साल लग गए हों उसके लौड़े को मेरी गांड में घुसने में। दर्द के मारे मैं लग भाग बहोश ही हो गई थी। फिर उसने भी अपना लौड़ा अंदर बाहर करना शुरू किया। कुछ देर बाद दर्द घटा और मुझे फिर मज़ा आने लगा।


उस के एक बार झड़ने में ही मैं जाने कितनी बार झड़ गई। वो उत्तर तो दूसरे दो लड़कों ने भी मुझे बहुत-बहुत छोड़ा। पर शूकर है उन्होंने मेरी गांड नहीं मारी। फिर चारो ने मुझ पर एक ट्रिप और लगाया। तब तक शाम हो चुकी थी और मैं उनके लौरों के रस से भर चुकी थी। अब मुझमें से सुबह वाली परफ्यूम की खुशबू नहीं, उनकी लौरों के रस की भीनी-भीनी सी गंध आ रही थी। “चल अब तुझे तेरे घर के पास छोड़ दे,” मेरा एक स्टूडेंट मुझे छूते हुए बोला। मैं उठकर अपनी कमीज और पजामी की तरफ बढ़ने लगी तो मेरे से तो सीधा चल भी नहीं पाया जा रहा था। अरे मैडम मेरी जान अभी इतना ज़ोर मत दे कमर लचक जाएगी। एक ऐड घंटे में सब ठीक हो जाएगा तू चलने लायक हो जाएगी। तुझे तेरे कपड़े हम पहन देंगे। ऐसा कहकर मुझे नंगी ही गोद में उठाकर एक वैन में ले गया। सब वैन में बैठ गए और मेरे घर की तरफ चल पड़े। रास्ते में मुझे बारी-बारी अपनी सीट और ड्राइवर बदल-बदल कर सबने मुझे खूब चूसा। फिर मेरे को मेरी पजामी और कमीज पहनाई, मेरी ऊँची एड़ी की चप्पल पहनवाई, दुपट्टा पहनाया मेरा पारस दिया और मुझे मेरे मोहल्ले के पास छोड़ दिया। पर कम्बख्तों ने मेरी ब्रा और पैंटी नहीं लौटाई। “अरे जान यह तो हमारे पास निशानी रहेगी कि हमने हमारी ज़िंदगी की सबसे खूबसूरत, गोरी चिट्टी, और हमारे स्कूल की सबसे सख्त मैडम को जाम कर छोड़ा था,” एक ने जाते जाते मुझे कहा था। वो ब्रा और पैंटी वो जब तक स्कूल से पास आउट नहीं हो गए तब तक हर रोज़ स्कूल में लाते थे और मुझे दिखा के चढ़ाते थे। स्कूल से पास आउट होने के बाद भी मैं कई बार उनसे छूट चुकी हूँ। कई बार उन्होंने मुझे स्कूल में भी मेरे कमरे में मेरे टेबल पर छोड़ा है। और उन्होंने यह किस्सा कई जूनियर स्टूडेंट्स को भी सुनाया और मुझे उनसे इंट्रोड्यूस करवाया। अब भी मैं अक्सर अपने किसी न किसी स्टूडेंट्स से छूटती रहती हूँ। मैं एक रंडी टीचर बनकर रह गई हूँ। और यह सब शुरू हुआ उस दिन जिस दिन शाम को


मैं अपने घर बड़ी मुश्किल से आधी तिरछी चल के पहुँचती हूँ। अगर अँधेरा न हुआ होता और कोई मुझे चलती को देख लेता तो झट सारा माजरा समझ जाता। पर इस सब का कसूरवार कौन है। मेरे वो लुच्चे स्टूडेंट्स जिन्होंने अपनी पिटाई का बदला लेने के लिए अपनी टीचर ही छोड़ दी, या मैं जो अपनी जवानी और खूबसूरती की वजह से उन चारों की हवास का अनजाने में पर अपनी मर्जी से शिकार बनी।

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